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तालाब की मछलियां बचाएंगी गंगा की जैव विविधता

Tue, 21 Jun 2022 12:42 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 21 Jun 2022 12:42 AM IST
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The fish of the pond will save the biodiversity of the Ganges
बिजनौर का गंगा बैराज - फोटो : BIJNOR
तालाब की मछलियां बचाएंगी गंगा की जैव विविधता
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रजनीश त्यागी
बिजनौर। अभी तक आपने सुना होगा कि गंगा में स्नान मात्र से उद्धार हो जाता है और पाप तक धुल जाते हैं, लेकिन अब गंगा में कमजोर पड़ती जैव विविधता को बचाने के लिए तालाब की मछलियां आएंगी। जी हां सुनने में अजीब लगता है, लेकिन यही सच है। जिला प्रशासन बिजनौर गंगा बैराज पर रोहू, कतला और नैन प्रजाति की करीब तीन लाख छोटी मछलियों को छोड़ने की तैयारी कर रहा है, ताकि गंगा की जैव विविधता का संतुलन बना रहे। असल में इन तीनों प्रजाति की मछलियों की संख्या गंगा में कम हो गई है।
गंगा में गर्मी के दिनों में घटते जलस्तर, प्रदूषण और अवैध शिकार के चलते लगातार जैव विविधता को खतरा बढ़ रहा है। फिर चाहे कछुओं की बात करें या फिर मछली, सभी की संख्या में गिरावट आ रही है। दस से ज्यादा प्रजाति के कछुओं को गंगा में संकटग्रस्त की सूची में डाला गया है। वहीं अब रोहू, कतना और नैन प्रजाति की मछलियों की घटती संख्या ने भी चिंता बढ़ा दी है। पिछले साल करीब सवा लाख मछलियां गंगा में छोड़ी गई थीं। इस बार यह संख्या बढ़ाकर तीन लाख कर दी गई है। जिला प्रशासन ने इसके लिए टेंडर भी कराए हैं, जो इन प्रजाति की छोटी मछलियों को उपलब्ध कराएंगे। हर साल इसी तरह इन मछलियों को छोड़ने का लक्ष्य रखा गया है। इस बार पहले चरण में 40 हजार छोटी मछलियां आने वाली हैं, जिन्हें अगले सप्ताह गंगा में छोड़ा जाएगा। (संवाद)
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गंगा की सफाईकर्मी हैं मछलियां, कई जीव इन पर निर्भर
गंगा में फैले प्रदूषण, शवों के अवशेष आदि को मछलियां साफ करने का काम करती हैं। इसके अलावा गंगा में कछुए, घड़ियाल जैसे जीव मछलियों को खाते हैं। गंगा में इस तरह पूरा क्रम चलता है और गंगा में सफाई से लेकर जीवों की संख्या तक का संतुलन बना रहता है।
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करा दिए गए हैं टेंडर: सीडीओ
सीडीओ केपी सिंह ने बताया कि गंगा में तीन प्रजाति की मछलियों को छोड़ा जाना है। इसके लिए टेंडर करा दिए गए हैं। जल्द ही मछलियों की पहली खेप गंगा में छोड़ी जाएगी।
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