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कागजों में सरेंडर, रोड पर दौड़ रहीं बसें
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कागजों में सरेंडर, रोड पर दौड़ रहीं बसें
बिजनौर। कोरोना काल में टैक्स से निजात पाने के लिए नगीना-बढ़ापुर मार्ग की करीब आधी संख्या में एआरटीओ कार्यालय में सरेंडर हुई बसें परिवहन विभाग की आंखों में धूल झोंककर पूर्व की भांति मार्ग पर संचालित हैं। इतना ही नहीं ये सरेंडर बसें बिजनौर समेत आसपास के जनपदों तक की बुकिंग ले जा रही हैं। एक व्यक्ति ने आरटीओ मुरादाबाद से इस मामले की शिकायत की है।
जिले में कुल 161 बसें और 77 ट्रक सरेंडर हुए हैं। ये अप्रैल और मई माह के लिए सरेंडर की गई थीं। बढ़ापुर कस्बा क्षेत्र को जनपद से जोड़ने वाले एकमात्र मार्ग नगीना-बढ़ापुर मार्ग पर संचालित निजी बसों की संख्या 22 है। कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने पर कोरोना कर्फ्यू के चलते टैक्स से निजात पाने के लिए नगीना-बढ़ापुर मार्ग पर संचालित निजी बसों के दस मालिकों ने एआरटीओ कार्यालय में अपनी बसों के परमिट समेत सभी संबंधित दस्तावेज जमा कर बसें सरेंडर कर दी थीं।
क्षेत्र के ही विकास कुमार विश्नोई ने इस मामले की शिकायत आरटीओ मुरादाबाद से की है। आरोप है कि नगीना-बढ़ापुर मार्ग की सरेंडर र्हुइं दस में से नौ बसों का अवैध रूप से संचालन किया जा रहा है। इनमें से केवल एक बस स्वामी ही सरेंडर नियमों का पालन कर रहे हैं, जबकि सरेंडर हुई शेष नौ बसें नगीना-बढ़ापुर मार्ग पर चल रही हैं। इन बसों से जनपद के शहरों कस्बों व गांवों के अलावा भी आसपास के जिलों में भी बुकिंग ले जाई जा रही हैं।
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उधर, नगीना-बढ़ापुर मार्ग पर बस मालिकों द्वारा सरेंडर नहीं की जाने वाली बसों की संख्या 12 है। इन बसों को एआरटीओ कार्यालय में प्रतिमाह निर्धारित टैक्स का भुगतान करना होता है, जबकि टैक्स का कोई भुगतान नहीं करने वाली बसें कागजों में ही सरेंडर हैं और लगातार मार्ग पर चलने तथा शादी-बारात की बुकिंग करने के कारण पात्र बस संचालकों की आय भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
मामला संज्ञान में आया है। कोई भी व्यवसायिक वाहन सरेंडर अवधि के भीतर रोड पर संचालित नहीं किया जा सकता। यदि फिर भी किसी ने नियम विरुद्घ बसों का संचालन किया है, तो संबंधित बस का सरेंडर निरस्त कर उससे पूरा टैक्स वसूला जाएगा - मनोज सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन, बिजनौर
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बिजनौर। कोरोना काल में टैक्स से निजात पाने के लिए नगीना-बढ़ापुर मार्ग की करीब आधी संख्या में एआरटीओ कार्यालय में सरेंडर हुई बसें परिवहन विभाग की आंखों में धूल झोंककर पूर्व की भांति मार्ग पर संचालित हैं। इतना ही नहीं ये सरेंडर बसें बिजनौर समेत आसपास के जनपदों तक की बुकिंग ले जा रही हैं। एक व्यक्ति ने आरटीओ मुरादाबाद से इस मामले की शिकायत की है।
जिले में कुल 161 बसें और 77 ट्रक सरेंडर हुए हैं। ये अप्रैल और मई माह के लिए सरेंडर की गई थीं। बढ़ापुर कस्बा क्षेत्र को जनपद से जोड़ने वाले एकमात्र मार्ग नगीना-बढ़ापुर मार्ग पर संचालित निजी बसों की संख्या 22 है। कोरोना की दूसरी लहर शुरू होने पर कोरोना कर्फ्यू के चलते टैक्स से निजात पाने के लिए नगीना-बढ़ापुर मार्ग पर संचालित निजी बसों के दस मालिकों ने एआरटीओ कार्यालय में अपनी बसों के परमिट समेत सभी संबंधित दस्तावेज जमा कर बसें सरेंडर कर दी थीं।
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क्षेत्र के ही विकास कुमार विश्नोई ने इस मामले की शिकायत आरटीओ मुरादाबाद से की है। आरोप है कि नगीना-बढ़ापुर मार्ग की सरेंडर र्हुइं दस में से नौ बसों का अवैध रूप से संचालन किया जा रहा है। इनमें से केवल एक बस स्वामी ही सरेंडर नियमों का पालन कर रहे हैं, जबकि सरेंडर हुई शेष नौ बसें नगीना-बढ़ापुर मार्ग पर चल रही हैं। इन बसों से जनपद के शहरों कस्बों व गांवों के अलावा भी आसपास के जिलों में भी बुकिंग ले जाई जा रही हैं।
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उधर, नगीना-बढ़ापुर मार्ग पर बस मालिकों द्वारा सरेंडर नहीं की जाने वाली बसों की संख्या 12 है। इन बसों को एआरटीओ कार्यालय में प्रतिमाह निर्धारित टैक्स का भुगतान करना होता है, जबकि टैक्स का कोई भुगतान नहीं करने वाली बसें कागजों में ही सरेंडर हैं और लगातार मार्ग पर चलने तथा शादी-बारात की बुकिंग करने के कारण पात्र बस संचालकों की आय भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है।
मामला संज्ञान में आया है। कोई भी व्यवसायिक वाहन सरेंडर अवधि के भीतर रोड पर संचालित नहीं किया जा सकता। यदि फिर भी किसी ने नियम विरुद्घ बसों का संचालन किया है, तो संबंधित बस का सरेंडर निरस्त कर उससे पूरा टैक्स वसूला जाएगा - मनोज सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन, बिजनौर