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बिजनौर: चीनी मिलों ने 298 करोड़ से ज्यादा की चीनी व शीरा बेचा, भुगतान नहीं किया
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शामली के कृषि विज्ञान केंद्र जलालपुर में आयोजित किसान दिवस में मौजूद किसान।
- किसानों के हंगामे के बाद डीसीओ बोले पिछले चार सालों से हो रहा था डायर्वजन
- डीएम ने जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का दिया आश्वासन
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। किसान दिवस में किसानों ने चीनी मिलों पर वर्तमान पेराई सत्र में 298 करोड़ से अधिक का चीनी और शीरा बेचने का आरोप लगाया। गन्ना भुगतान न करने को लेकर हंगामा किया। दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की मांग की। डीसीओ ने किसानों के आरोपों की पुष्टि कर दी तो डीएम ने जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
किसान दिवस में जिला पंचायत सदस्य उमेश पंवार समेत अन्य किसान नेताओं ने डीसीओ विजय बहादुर सिंह से जिले की चीनी मिलों की वर्तमान पेराई सत्र के चीनी उत्पादन, बिक्री और स्टॉक में का डीसीओ विजय बहादुर सिंह से ब्यौरा मांंगा। किसानों ने कहा कि जिले की तीनों चीनी मिलों ने गन्ना किसानों का भुगतान 298 करोड़ रुपये का डायवर्जन करने का आरोप लगाया। कहा कि नियम विरुद्ध चीनी व शीरा बेचकर डायवर्जन किया गया।
शामली मिल में इस वर्ष केवल 62000 बोरों में लगभग 21 करोड़ की चीनी स्टॉक में है। जबकि मिल पर 194 करोड़ का गन्ना भुगतान बकाया है। ऐसे में पूरे वर्ष भी भुगतान होने की कोई संभावना नहीं है। इसी प्रकार अन्य चीनी मिलों में भी किया गया है। सभी किसानों ने दोषी चीनी मिल अधिकारियों व मालिकों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराकर वसूली करने की मांग की।
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किसानों के दबाव में डीसीओ विजय बहादुर सिंह ने मिलों के चीनी उत्पादन, बिक्री और स्टाक के साथ बकाया गन्ना भुगतान की जानकारी दी। डीसीओ ने यह भी स्वीकार किया कि जिले की तीनों चीनी मिलों ने गन्ना किसानों का भुगतान 298 करोड़ रुपये का डायवर्जन किया। जिसमें नियम विरुद्ध चीनी व शीरा बेचकर डायवर्जन किया गया। शामली मिल में इस वर्ष केवल 62000 बोरे लगभग 21 करोड़ की चीनी स्टॉक में है। जबकि नए अब तक का भुगतान 194 करोड़ है। डीसीओ ने बताया कि पिछले चार सालों वर्ष 2018-19 से शामली चीनी का घाटे के चलते लगातार डायवर्जन किया जा रहा है। वर्ष 2018- 19 में 80 करोड़ रुपये का डायर्वजन था। उसके बाद शामली चीनी मिल का घाटा बढ़ता गया। घाटे के चलते चीनी मिल चीनी का डायर्वजन करती गई। चीनी का डायर्वजन के लिए शामली चीनी मिल के मालिक और अफसर जिम्मेदार है। गन्ना विभाग लगातार चीनी मिल को नोटिस जारी करके डायवर्जन की राशि की पूर्ति करने को लगातार दबाब बनाया जा रहा है।
डीएम जसजीत कौर ने पूरा मामले की जांच कराकर दोषी चीनी मिल मालिकों, अफसरों की जांच कराकर तत्काल कार्रवाई आश्वासन दिया। आखिर में किसान नेता सवित मलिक ने कहा कि अगले किसान दिवस तक डायवर्जन के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने गन्ना पर्ची में मिल का नाम अंकित न किए जाने की मांग की। ऊन के किसानों ने चीनी मिल पर नकद गन्ना खरीदने का आरोप लगाया। इस मौके पर शामली मिल के जीएम केन सुशील खोखर, एजीएम दीपक राणा, ऊन मिल से गन्ना महाप्रबंधक कुलदीप पिलानिया मौजूद रहे।
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- डीएम ने जांच कराकर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का दिया आश्वासन
संवाद न्यूज एजेंसी
शामली। किसान दिवस में किसानों ने चीनी मिलों पर वर्तमान पेराई सत्र में 298 करोड़ से अधिक का चीनी और शीरा बेचने का आरोप लगाया। गन्ना भुगतान न करने को लेकर हंगामा किया। दोषी अधिकारियों के खिलाफ जांच कराकर कार्रवाई की मांग की। डीसीओ ने किसानों के आरोपों की पुष्टि कर दी तो डीएम ने जांच कराकर कार्रवाई का आश्वासन दिया।
किसान दिवस में जिला पंचायत सदस्य उमेश पंवार समेत अन्य किसान नेताओं ने डीसीओ विजय बहादुर सिंह से जिले की चीनी मिलों की वर्तमान पेराई सत्र के चीनी उत्पादन, बिक्री और स्टॉक में का डीसीओ विजय बहादुर सिंह से ब्यौरा मांंगा। किसानों ने कहा कि जिले की तीनों चीनी मिलों ने गन्ना किसानों का भुगतान 298 करोड़ रुपये का डायवर्जन करने का आरोप लगाया। कहा कि नियम विरुद्ध चीनी व शीरा बेचकर डायवर्जन किया गया।
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शामली मिल में इस वर्ष केवल 62000 बोरों में लगभग 21 करोड़ की चीनी स्टॉक में है। जबकि मिल पर 194 करोड़ का गन्ना भुगतान बकाया है। ऐसे में पूरे वर्ष भी भुगतान होने की कोई संभावना नहीं है। इसी प्रकार अन्य चीनी मिलों में भी किया गया है। सभी किसानों ने दोषी चीनी मिल अधिकारियों व मालिकों के खिलाफ तत्काल एफआईआर दर्ज कराकर वसूली करने की मांग की।
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किसानों के दबाव में डीसीओ विजय बहादुर सिंह ने मिलों के चीनी उत्पादन, बिक्री और स्टाक के साथ बकाया गन्ना भुगतान की जानकारी दी। डीसीओ ने यह भी स्वीकार किया कि जिले की तीनों चीनी मिलों ने गन्ना किसानों का भुगतान 298 करोड़ रुपये का डायवर्जन किया। जिसमें नियम विरुद्ध चीनी व शीरा बेचकर डायवर्जन किया गया। शामली मिल में इस वर्ष केवल 62000 बोरे लगभग 21 करोड़ की चीनी स्टॉक में है। जबकि नए अब तक का भुगतान 194 करोड़ है। डीसीओ ने बताया कि पिछले चार सालों वर्ष 2018-19 से शामली चीनी का घाटे के चलते लगातार डायवर्जन किया जा रहा है। वर्ष 2018- 19 में 80 करोड़ रुपये का डायर्वजन था। उसके बाद शामली चीनी मिल का घाटा बढ़ता गया। घाटे के चलते चीनी मिल चीनी का डायर्वजन करती गई। चीनी का डायर्वजन के लिए शामली चीनी मिल के मालिक और अफसर जिम्मेदार है। गन्ना विभाग लगातार चीनी मिल को नोटिस जारी करके डायवर्जन की राशि की पूर्ति करने को लगातार दबाब बनाया जा रहा है।
डीएम जसजीत कौर ने पूरा मामले की जांच कराकर दोषी चीनी मिल मालिकों, अफसरों की जांच कराकर तत्काल कार्रवाई आश्वासन दिया। आखिर में किसान नेता सवित मलिक ने कहा कि अगले किसान दिवस तक डायवर्जन के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई नहीं हुई तो इस मुद्दे पर आंदोलन शुरू किया जाएगा। उन्होंने गन्ना पर्ची में मिल का नाम अंकित न किए जाने की मांग की। ऊन के किसानों ने चीनी मिल पर नकद गन्ना खरीदने का आरोप लगाया। इस मौके पर शामली मिल के जीएम केन सुशील खोखर, एजीएम दीपक राणा, ऊन मिल से गन्ना महाप्रबंधक कुलदीप पिलानिया मौजूद रहे।