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महिला अपराधों के खिलाफ कड़े कानून जरूरी

Sun, 11 Oct 2020 11:45 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 11 Oct 2020 11:45 PM IST
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Strict laws against women crimes are necessary
बिजनौर में अमर उजाला द्वारा आयोजित वेबिनार में भाग लेते नगरवासी। - फोटो : BIJNOR
महिला अपराधों के खिलाफ कड़े कानून जरूरी
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बिजनौर। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी का बुद्धिजीवी एवं शिक्षाविदों ने स्वागत किया है । एडवाइजरी के अनुसार महिलाओं के साथ छेड़छाड़ और दुष्कर्म के मामलों में मुकदमा न लिखने वाले पुलिस अधिकारियों के विरुद्ध कार्रवाई होगी।
अमर उजाला द्वारा आयोजित वेबिनार से जुड़े न्यायालय किशोर न्याय बोर्ड के सदस्य पीएस मलिक ने कहा कि एडवाइजरी में दिया गया नया नियम स्वागत योग्य है, लेकिन इस नियम का दुरुपयोग रोकने की भी आवश्यकता है। महिलाओं के विरुद्ध बढ़ते मामलों को देखते हुए इस प्रकार के कठोर नियमों का लागू होना अनिवार्य है।
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आंगनबाड़ी एवं सहायिका एसोसिएशन की प्रदेश अध्यक्ष राजेश्वरी राठी का कहना है कि नए नियम से महिला उत्पीड़न के मामलों में कमी आयेगी। सामाजिक स्तर पर ऐसे मामलों को रोकने के लिए टीम बनाने की भी आवश्यकता है। प्रशासन की शिथिलता और हीला हवाली के कारण अनेक मामले न्यायालय में नहीं पहुंच पाते। इसके लिए समाज को जागरूक करने की आवश्यकता है।
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सिविल कोर्ट बिजनौर की अधिवक्ता हिना चौधरी का कहना है कि महिलाओं को अपने विरुद्ध होने वाले अत्याचारों के लिए इंसान को अपनी आवाज बुलंद करनी चाहिए। महिलाओं को चुप नहीं होना चाहिए। सरकार द्वारा जाी की गई एडवाइजरी तो ठीक है लेकिन नियमों को धरातल पर लागू कराना जरूरी है।
राजकीय कन्या इंटर कॉलेज झालू की प्रवक्ता रजनी का मानना है कि कई बार झिझक एवं सामाजिक दबाव के कारण महिला उत्पीड़न के मामले कोर्ट तक नहीं पहुंच पाते। इस प्रकार की आपराधिक घटनाओं को अंजाम देने वाले ज्यादातर लोग दबंग होते हैं, जिनके विरुद्ध आवाज नहीं उठाई जाती। गृह मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के बाद महिला उत्पीड़न के मामलों में प्राथमिक स्तर पर एफआईआर दर्ज होने से दबंगों पर लगाम लगाई जा सकेगी।
ग्राम प्रधान संघ की पूर्व जिला अध्यक्ष आशु राणा का मानना है कि महिलाओं के विरुद्ध अपराध होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती प्राथमिकी दर्ज कराने की ही होती है। कई बार पुलिस घटना को गंभीरता से नहीं लेती, जिससे ऐसे मामलों में प्राथमिकी दर्ज नहीं हो पाती और अपराधी बच निकलते हैं। इससे अपराधियों के हौसले भी बुलंद होते हैं। इस नियम के बाद महिलाओं की रिपोर्ट आसानी से दर्ज हो सकेगी।

व्यापारी पवन कटारिया का कहना है कि गृह मंत्रालय द्वारा जारी एडवाइजरी के अनुसार यदि पुलिस अधिकारी महिला की रिपोर्ट दर्ज नहीं करता है तब अधिकारी के विरुद्ध रिपोर्ट दर्ज की जाएगी। इसमें जुर्माना और एक वर्ष तक की सजा का प्रावधान किया गया है। यह नियम लागू होने के बाद महिला उत्पीड़न के मामलों में तुरंत कार्रवाई हो सकेगी।
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