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दो दशक से मुद्दे और वादों में अटकी कताई मिल
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नगीना के बाबर अली।
- फोटो : BIJNOR
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दो दशक से मुद्दे और वादों में अटकी कताई मिल
नगीना। पिछले दो दशकों से तमाम सरकारें और जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन बंद पड़ी नगीना सहकारी कताई मिल की तकदीर नहीं बदली। दो हजार से ज्यादा युवकों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराने वाली नगीना की बंद पड़ी कताई मिल 21 वर्षों से हर बार चुनावी मुद्दा बन कर रह जाती है। मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी इस कताई मिल की जगह के इस्तेमाल के लिए तमाम तरह की घोषणा की गईं, लेकिन धरातल पर कोई नहीं उतरी।
नगीना कोतवाली मार्ग पर स्थित बंद पड़ी सहकारी कताई मिल का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने 1979 में किया था। रोजगार की दृष्टि से पिछड़े नगीना क्षेत्र में सहकारी क्षेत्र की कताई मिल चालू होने से करीब दो हजार बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार उपलब्ध हो गया था। बताया जाता है कि श्रमिकों की यूनियन बाजी, प्रबंधकों और श्रमिकों के बीच टकराव व आपसी खींचतान के कारण मिल को भारी नुकसान होने लगा। बाद में सरकार की सहमति से 22 जनवरी 2001 को नगीना सहकारी कताई मिल में तालाबंदी कर इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया। कताई मिल के बंद होने से हजारों लोग बेरोजगार होकर सड़कों पर आ गए। पिछले दो दशकों में हर विधानसभा व लोकसभा चुनाव में नगीना की बंद पड़ी कताई मिल चुनावी मुद्दा बनती है, लेकिन आज तक कोई भी सरकार व जनप्रतिनिधि इस मुद्दे का समाधान नहीं कर सका है।
नगीना की बंद पड़ी सहकारी कताई मिल को चालू कराने के लिए पिछली सपा सरकार व मौजूदा भाजपा सरकार में भी कई बार घोषणा की गई, लेकिन चालू नहीं कराई जा सकी। कताई मिल की जमीन को आवास विकास प्राधिकरण को देकर प्लॉट काटने, कताई मिल की जमीन पर नगीना के विश्व प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट उद्योग को स्थापित कराने तथा पीएसी की बटालियन लगाने के प्रस्ताव भी मौजूदा सरकार के दौर में आए लेकिन सभी ठंडे बस्ते में चले गए।
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53 एकड़ भूमि पर है कताई मिल
वर्तमान में मिल की देखभाल कर रहे श्रम सहायक मदन पाल ने बताया कि वर्तमान में मिल की जगह पर पीएसी बटालियन की स्थापना का मामला चल रहा है। उन्होंने मिल की जगह पर लगे 1109 पेड़ों का मूल्यांकन करके भी भे दिया है। उन्होंने बताया कि 53 एकड़ भूमि पर स्थित कताई मिल पर श्रमिकों का करीब 105 करोड़ रुपये बकाया है।
उद्योग लगे तो मिले रोजगार : बाबर अली
पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के नगर महामंत्री बाबर अली का कहना है कि नगीना की बंद पड़ी सहकारी कताई मिल पर कोई नया उद्योग स्थापित होना चाहिए। जिससे यहां के बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध हो सके।
गायब हुई बाजारों की रौनक : परवेज आदिल
शिक्षाविद् परवेज आदिल का कहना है कि नगीना की सहकारी कताई मिल बंद होने से यहां के बाजारों की रौनक भी गायब हो गई है। उनका कहना है कि नगीना कताई मिल में बनने वाले सूत की दुनिया भर में डिमांड थी।
बेरोजगारों केे मिलेगा रोजगार : सचिव शर्मा
ब्राह्मण सभा के पूर्व नगर अध्यक्ष पंडित सचिन शर्मा और दीपक अग्रवाल का कहना है कि नगीना कताई मिल को चालू किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को योजना बनाकर इमानदारी से कार्य करना होगा।
जनप्रतिनिधि भी करें प्रयास : दीपक अग्रवाल
व्यापारी नेता दीपक अग्रवाल का कहना है कि जीतने वाले जनप्रतिनिधियों को नगीना की बंद पड़ी कताई मिल की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से ही कताई मिल शुरू हो सकती है। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेंगे।
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नगीना। पिछले दो दशकों से तमाम सरकारें और जनप्रतिनिधि बदले, लेकिन बंद पड़ी नगीना सहकारी कताई मिल की तकदीर नहीं बदली। दो हजार से ज्यादा युवकों को प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार उपलब्ध कराने वाली नगीना की बंद पड़ी कताई मिल 21 वर्षों से हर बार चुनावी मुद्दा बन कर रह जाती है। मौजूदा भाजपा सरकार के कार्यकाल में भी इस कताई मिल की जगह के इस्तेमाल के लिए तमाम तरह की घोषणा की गईं, लेकिन धरातल पर कोई नहीं उतरी।
नगीना कोतवाली मार्ग पर स्थित बंद पड़ी सहकारी कताई मिल का शिलान्यास तत्कालीन मुख्यमंत्री नारायण दत्त तिवारी ने 1979 में किया था। रोजगार की दृष्टि से पिछड़े नगीना क्षेत्र में सहकारी क्षेत्र की कताई मिल चालू होने से करीब दो हजार बेरोजगार युवक-युवतियों को रोजगार उपलब्ध हो गया था। बताया जाता है कि श्रमिकों की यूनियन बाजी, प्रबंधकों और श्रमिकों के बीच टकराव व आपसी खींचतान के कारण मिल को भारी नुकसान होने लगा। बाद में सरकार की सहमति से 22 जनवरी 2001 को नगीना सहकारी कताई मिल में तालाबंदी कर इसे पूरी तरह बंद कर दिया गया। कताई मिल के बंद होने से हजारों लोग बेरोजगार होकर सड़कों पर आ गए। पिछले दो दशकों में हर विधानसभा व लोकसभा चुनाव में नगीना की बंद पड़ी कताई मिल चुनावी मुद्दा बनती है, लेकिन आज तक कोई भी सरकार व जनप्रतिनिधि इस मुद्दे का समाधान नहीं कर सका है।
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नगीना की बंद पड़ी सहकारी कताई मिल को चालू कराने के लिए पिछली सपा सरकार व मौजूदा भाजपा सरकार में भी कई बार घोषणा की गई, लेकिन चालू नहीं कराई जा सकी। कताई मिल की जमीन को आवास विकास प्राधिकरण को देकर प्लॉट काटने, कताई मिल की जमीन पर नगीना के विश्व प्रसिद्ध हैंडीक्राफ्ट उद्योग को स्थापित कराने तथा पीएसी की बटालियन लगाने के प्रस्ताव भी मौजूदा सरकार के दौर में आए लेकिन सभी ठंडे बस्ते में चले गए।
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53 एकड़ भूमि पर है कताई मिल
वर्तमान में मिल की देखभाल कर रहे श्रम सहायक मदन पाल ने बताया कि वर्तमान में मिल की जगह पर पीएसी बटालियन की स्थापना का मामला चल रहा है। उन्होंने मिल की जगह पर लगे 1109 पेड़ों का मूल्यांकन करके भी भे दिया है। उन्होंने बताया कि 53 एकड़ भूमि पर स्थित कताई मिल पर श्रमिकों का करीब 105 करोड़ रुपये बकाया है।
उद्योग लगे तो मिले रोजगार : बाबर अली
पश्चिमी उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल के नगर महामंत्री बाबर अली का कहना है कि नगीना की बंद पड़ी सहकारी कताई मिल पर कोई नया उद्योग स्थापित होना चाहिए। जिससे यहां के बेरोजगार युवकों को रोजगार उपलब्ध हो सके।
गायब हुई बाजारों की रौनक : परवेज आदिल
शिक्षाविद् परवेज आदिल का कहना है कि नगीना की सहकारी कताई मिल बंद होने से यहां के बाजारों की रौनक भी गायब हो गई है। उनका कहना है कि नगीना कताई मिल में बनने वाले सूत की दुनिया भर में डिमांड थी।
बेरोजगारों केे मिलेगा रोजगार : सचिव शर्मा
ब्राह्मण सभा के पूर्व नगर अध्यक्ष पंडित सचिन शर्मा और दीपक अग्रवाल का कहना है कि नगीना कताई मिल को चालू किया जाना चाहिए। इसके लिए सरकार को योजना बनाकर इमानदारी से कार्य करना होगा।
जनप्रतिनिधि भी करें प्रयास : दीपक अग्रवाल
व्यापारी नेता दीपक अग्रवाल का कहना है कि जीतने वाले जनप्रतिनिधियों को नगीना की बंद पड़ी कताई मिल की तरफ भी ध्यान देना चाहिए। जनप्रतिनिधियों के प्रयासों से ही कताई मिल शुरू हो सकती है। इससे लोगों को रोजगार भी मिलेंगे।

नगीना के मदन पाल सिंह।- फोटो : BIJNOR

नगीना के पंडर त सचिन शर्मा।- फोटो : BIJNOR

नगीना की बंद पड़ी सहकारी कताई मिल।- फोटो : BIJNOR