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30 जनवरी पुण्यतिथित पर विशेष : धामपुर में बसना चाहते थे महात्मा गांधी
Sat, 29 Jan 2022 12:15 AM IST
मेरठ ब्यूरो
न्यूज डेस्क अमर उजाला, मेरठ
न्यूज डेस्क अमर उजाला, मेरठ
Published by: मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 29 Jan 2022 12:15 AM IST
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धामपुर नगर पालिका में लगी गांधीजी की प्रतिमा।
- फोटो : BIJNOR
राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एक बार धामपुर आए तो बेहद प्रभावित हुए। उन्होंने धामपुर में बस जाने इच्छा भी जाहिर की थी। आजादी की लड़ाई में सहयोग के लिए धामपुर के लोगों ने गांधी जी को 644 रुपये पांच आने की एक थैैली भेंट की। गांधी जी रेलवे स्टेशन पर स्वागत करने वालों को कतार में खड़ा देख आश्चर्यचकित हो गए थे। कतार में लोग बेहद शांति के साथ खड़े थे, न शोरगुल था और न ही आगे बढ़कर स्वागत करने की जल्दबाजी।
धामपुर शहर की शांति व्यवस्था से गांधी जी इतने प्रभावित थे कि उन्होंने कहा था कि यदि मेरे सामने इतना विस्तृत लक्ष्य न होता तो मैं धामपुर में ही बस जाता। महात्मा गांधी के धामपुर आगमन के बाद सैकड़ों लोग उनके अनुयायी हो गए थे। धामपुर निवासी मास्टर शिवकुमार बताते हैं कि धामपुर के लेखक सुमन सिंह चरण ने अपनी पुस्तक में बताया है कि 13 अक्टूबर 1929 को विजयदशमी थी। इसी दिन दोपहर 11:40 पर महात्मा गांधी रेलगाड़ी से धामपुर आए थे। इससे पूर्व महात्मा गांधी मुरादाबाद रुके थे जहां भारी भीड़ तथा लोगों की अव्यवस्था के कारण वह बेहद थक गए थे, लेकिन जब धामपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर पहुंचे तो गांधीजी यह देखकर बेहद प्रसन्न हुए कि उनके स्वागत में खड़े लोग विनम्रता के साथ कतार में खड़े हुए हैं तथा भारी भीड़ होने के बावजूद बिल्कुल भी शोरगुल नहीं है।
महात्मा गांधी ने सार्वजनिक सभा में इस बात का जिक्र किया था। धामदेव की नगरी धामपुर पुस्तक के लेखक डॉ. पंकज भारद्वाज बताते हैं कि लंबे सफर के कारण गांधी जी ने कई दिनों तक दाढ़ी नहीं बनवाई थी। धामपुर में गांधी जी ने दाढ़ी बनवाने की इच्छा जताई तो निरंजन सिंह नाम के नाई को बुलाया गया। निरंजन सिंह ने मुल्तानी मिट्टी से महात्मा गांधी की दाढ़ी बनाई थी।
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पुस्तक के सहायक लेखक अनिल शर्मा अनिल बताते हैं कि गांधीजी ने तत्कालीन अंग्रेजी स्कूल जो वर्तमान में के एम इंटर कॉलेज है वहां चरखा कातते हुए कार्यकर्ताओं से बातचीत भी की थी। इसके अतिरिक्त गांधी जी ने धामपुर में छोटी मंडी में महिलाओं की सभा को संबोधित किया था। सभा में लगभग पांच हजार महिलाएं गांधी जी के विचार सुनने के लिए पहुंची थी।
वह विजयदशमी का दिन था, इसके बावजूद शाम चार बजे गांधी जी ने धामपुर में लगभग बीस हजार लोगों की एक सभा को संबोधित किया था। डॉ. पंकज भारद्वाज बताते हैं कि चरखा कातते हुए गांधीजी कार्यकर्ताओं से बात करते थे। इस दौरान रतनगढ़ के जमींदार रघुनंदन सिंह त्यागी ने गांधी जी से प्रश्न किया था कि आपको धामपुर कैसा लगा? इस पर गांधी जी ने उत्तर दिया था कि यदि मेरे सामने इतना विस्तृत लक्ष्य न होता तो मैं यही बस जाता।
धामपुर में गांधी जी के साथ मिस स्लेड, बाबू पुरुषोत्तम दास टंडन, जेबी कृपलानी, प्यारे लाल, कमलनयन बजाज, देवदास गांधी आदि भी आए थे। डॉ. पंकज भारद्वाज बताते हैं कि महात्मा गांधी के भाषण के बाद उन्हें धामपुर नगर निवासियों की ओर से 644 रुपये पांच आने की थैली भेंट की गई थी। विभिन्न संस्थाओं द्वारा गांधी जी को सम्मान पत्र दिए गए थे, उन्हें गांधी जी की इच्छा पर वहीं नीलाम कर दिया गया था जिससे 46 रुपये प्राप्त हुए थे।
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धामपुर शहर की शांति व्यवस्था से गांधी जी इतने प्रभावित थे कि उन्होंने कहा था कि यदि मेरे सामने इतना विस्तृत लक्ष्य न होता तो मैं धामपुर में ही बस जाता। महात्मा गांधी के धामपुर आगमन के बाद सैकड़ों लोग उनके अनुयायी हो गए थे। धामपुर निवासी मास्टर शिवकुमार बताते हैं कि धामपुर के लेखक सुमन सिंह चरण ने अपनी पुस्तक में बताया है कि 13 अक्टूबर 1929 को विजयदशमी थी। इसी दिन दोपहर 11:40 पर महात्मा गांधी रेलगाड़ी से धामपुर आए थे। इससे पूर्व महात्मा गांधी मुरादाबाद रुके थे जहां भारी भीड़ तथा लोगों की अव्यवस्था के कारण वह बेहद थक गए थे, लेकिन जब धामपुर रेलवे स्टेशन के प्लेटफार्म पर पहुंचे तो गांधीजी यह देखकर बेहद प्रसन्न हुए कि उनके स्वागत में खड़े लोग विनम्रता के साथ कतार में खड़े हुए हैं तथा भारी भीड़ होने के बावजूद बिल्कुल भी शोरगुल नहीं है।
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महात्मा गांधी ने सार्वजनिक सभा में इस बात का जिक्र किया था। धामदेव की नगरी धामपुर पुस्तक के लेखक डॉ. पंकज भारद्वाज बताते हैं कि लंबे सफर के कारण गांधी जी ने कई दिनों तक दाढ़ी नहीं बनवाई थी। धामपुर में गांधी जी ने दाढ़ी बनवाने की इच्छा जताई तो निरंजन सिंह नाम के नाई को बुलाया गया। निरंजन सिंह ने मुल्तानी मिट्टी से महात्मा गांधी की दाढ़ी बनाई थी।
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पुस्तक के सहायक लेखक अनिल शर्मा अनिल बताते हैं कि गांधीजी ने तत्कालीन अंग्रेजी स्कूल जो वर्तमान में के एम इंटर कॉलेज है वहां चरखा कातते हुए कार्यकर्ताओं से बातचीत भी की थी। इसके अतिरिक्त गांधी जी ने धामपुर में छोटी मंडी में महिलाओं की सभा को संबोधित किया था। सभा में लगभग पांच हजार महिलाएं गांधी जी के विचार सुनने के लिए पहुंची थी।
वह विजयदशमी का दिन था, इसके बावजूद शाम चार बजे गांधी जी ने धामपुर में लगभग बीस हजार लोगों की एक सभा को संबोधित किया था। डॉ. पंकज भारद्वाज बताते हैं कि चरखा कातते हुए गांधीजी कार्यकर्ताओं से बात करते थे। इस दौरान रतनगढ़ के जमींदार रघुनंदन सिंह त्यागी ने गांधी जी से प्रश्न किया था कि आपको धामपुर कैसा लगा? इस पर गांधी जी ने उत्तर दिया था कि यदि मेरे सामने इतना विस्तृत लक्ष्य न होता तो मैं यही बस जाता।
धामपुर में गांधी जी के साथ मिस स्लेड, बाबू पुरुषोत्तम दास टंडन, जेबी कृपलानी, प्यारे लाल, कमलनयन बजाज, देवदास गांधी आदि भी आए थे। डॉ. पंकज भारद्वाज बताते हैं कि महात्मा गांधी के भाषण के बाद उन्हें धामपुर नगर निवासियों की ओर से 644 रुपये पांच आने की थैली भेंट की गई थी। विभिन्न संस्थाओं द्वारा गांधी जी को सम्मान पत्र दिए गए थे, उन्हें गांधी जी की इच्छा पर वहीं नीलाम कर दिया गया था जिससे 46 रुपये प्राप्त हुए थे।