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हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार, अब भी आसमान में छाया है स्मॉग
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हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार, अब भी आसमान में छाया है स्मॉग
बिजनौर। दीपावली के बाद खराब हुई जिले की हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ है। शनिवार को हवा की गुणवत्ता 139 एक्यूआई रही, जबकि शुक्रवार को एक्यूआई 148 थी। अगर ऐसा रहा तो गुणवत्ता में जल्दी सुधार हो जाएगा।
दिल्ली के स्मॉग और दीपावली से जिले की हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। जिले में सामान्यतौर पर हवा की गुणवत्ता 65 से 75 एक्यूआई तक रहती है। दीपावली पर हवा की एक्यूआई 75 थी। दीपावली के बाद यह बढ़कर 148 हो गई थी। इससे स्मॉग की परत आसमान में छा गई थी। शनिवार को हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ है। हवा की गुणवत्ता 139 एक्यूआई पर आ गई। हालांकि आसमान में स्मॉग अब भी छाया हुआ है। गोवर्धन की पूजा के बाद भी आतिशबाजी होती है। हवा साफ होने पर एक्यूआई 100 हो जाएगी। इस श्रेणी की हवा साफ मानी जाती है।
केवल आतिशबाजी ही स्मॉग की जिम्मेदार नहीं
स्मॉग के लिए आतिशबाजी को जिम्मेदार माना जाता है जबकि बदलते मौसम में स्मॉग आता ही है। वाहनों से निकलने वाला धुआं और इनके चलने से उड़ने वाली धूल इसका सबसे प्रमुख कारण है। धूल के कण वायुमंडल जाते हैं और नमी सोखकर फुल जाते हैं और स्मॉग की परत बना देते हैं।
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छोड़े गए तेज आवाज के पटाखे
शुक्रवार को भी घंटाघर क्षेत्र में अधिक क्षमता के पटाखे छोड़े गए। वहां दिन में 55 डेसिबल तक की आवाज वाले पटाखे ही छोड़े जा सकते हैं। शुक्रवार को भी दिन में 72 डेसिबल आवाज वाले पटाखे छोड़े गए।
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बिजनौर। दीपावली के बाद खराब हुई जिले की हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ है। शनिवार को हवा की गुणवत्ता 139 एक्यूआई रही, जबकि शुक्रवार को एक्यूआई 148 थी। अगर ऐसा रहा तो गुणवत्ता में जल्दी सुधार हो जाएगा।
दिल्ली के स्मॉग और दीपावली से जिले की हवा की गुणवत्ता पर असर पड़ा है। जिले में सामान्यतौर पर हवा की गुणवत्ता 65 से 75 एक्यूआई तक रहती है। दीपावली पर हवा की एक्यूआई 75 थी। दीपावली के बाद यह बढ़कर 148 हो गई थी। इससे स्मॉग की परत आसमान में छा गई थी। शनिवार को हवा की गुणवत्ता में थोड़ा सुधार हुआ है। हवा की गुणवत्ता 139 एक्यूआई पर आ गई। हालांकि आसमान में स्मॉग अब भी छाया हुआ है। गोवर्धन की पूजा के बाद भी आतिशबाजी होती है। हवा साफ होने पर एक्यूआई 100 हो जाएगी। इस श्रेणी की हवा साफ मानी जाती है।
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केवल आतिशबाजी ही स्मॉग की जिम्मेदार नहीं
स्मॉग के लिए आतिशबाजी को जिम्मेदार माना जाता है जबकि बदलते मौसम में स्मॉग आता ही है। वाहनों से निकलने वाला धुआं और इनके चलने से उड़ने वाली धूल इसका सबसे प्रमुख कारण है। धूल के कण वायुमंडल जाते हैं और नमी सोखकर फुल जाते हैं और स्मॉग की परत बना देते हैं।
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छोड़े गए तेज आवाज के पटाखे
शुक्रवार को भी घंटाघर क्षेत्र में अधिक क्षमता के पटाखे छोड़े गए। वहां दिन में 55 डेसिबल तक की आवाज वाले पटाखे ही छोड़े जा सकते हैं। शुक्रवार को भी दिन में 72 डेसिबल आवाज वाले पटाखे छोड़े गए।