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वैज्ञानिकों ने बताए फसल अवशेष प्रबंधन के गुर
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वैज्ञानिकों ने बताए फसल अवशेष प्रबंधन के गुर
बिजनौर। बिजनौर पब्लिक स्कूल में फार्मर क्लब की ओर से कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के वैज्ञानिकों द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी दी गई।
कृषि वैज्ञानिक डा.डीपी सिंह ने बताया कि फसल अवशेष को जलाना नहीं चाहिए, इसे मिट्टी में गलाकर खाद बनाना चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ेगी। कृषि वैज्ञानिक डा.नरेंद्र सिंह ने बताया कि जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है। कृषि वैज्ञानिक डा.राजेंद्र सिंह मलिक ने जैविक विधि से कम खर्च से अधिक उत्पादन पर जोर दिया। डा.डीपी सिंह ने आम व डा.नरेंद्र सिंह ने गेहूं की फसल प्रबंधन के बारे में बताया। सेवानिवृत्त प्रमुख कृषि वैज्ञानिक आईसीएआरआई दिल्ली डा.कामता प्रसाद, एलडीएम ओबीसी पलवल हरियाणा नेमवीर सिंह ने भी खेेती से जुड़ी जानकारी दी। विद्यालय प्रबंधक महेंद्र सिंह व प्रधानाचार्य विकास त्यागी ने जैविक खेती से जोड़ने को प्रेरित किया। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता डा.धर्मवीर सिंह, डा.विजय राणा, ठाकुर अवनीश, आचार्य भूपेंद्र, मदन सिंह, चरण सिंह, महेंद्र सिंह, पद्म सिंह आदि मौजूद रहे।
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बिजनौर। बिजनौर पब्लिक स्कूल में फार्मर क्लब की ओर से कृषि विज्ञान केंद्र नगीना के वैज्ञानिकों द्वारा फसल अवशेष प्रबंधन की जानकारी दी गई।
कृषि वैज्ञानिक डा.डीपी सिंह ने बताया कि फसल अवशेष को जलाना नहीं चाहिए, इसे मिट्टी में गलाकर खाद बनाना चाहिए। इससे मिट्टी की उर्वरक शक्ति बढ़ेगी। कृषि वैज्ञानिक डा.नरेंद्र सिंह ने बताया कि जैविक खाद के प्रयोग से मिट्टी की उर्वरक क्षमता को सुरक्षित रखा जा सकता है। कृषि वैज्ञानिक डा.राजेंद्र सिंह मलिक ने जैविक विधि से कम खर्च से अधिक उत्पादन पर जोर दिया। डा.डीपी सिंह ने आम व डा.नरेंद्र सिंह ने गेहूं की फसल प्रबंधन के बारे में बताया। सेवानिवृत्त प्रमुख कृषि वैज्ञानिक आईसीएआरआई दिल्ली डा.कामता प्रसाद, एलडीएम ओबीसी पलवल हरियाणा नेमवीर सिंह ने भी खेेती से जुड़ी जानकारी दी। विद्यालय प्रबंधक महेंद्र सिंह व प्रधानाचार्य विकास त्यागी ने जैविक खेती से जोड़ने को प्रेरित किया। इस दौरान सामाजिक कार्यकर्ता डा.धर्मवीर सिंह, डा.विजय राणा, ठाकुर अवनीश, आचार्य भूपेंद्र, मदन सिंह, चरण सिंह, महेंद्र सिंह, पद्म सिंह आदि मौजूद रहे।