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डेढ़ साल बाद खुले स्कूल, बच्चे पहुंचे तो लौटी रौनक
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बिजनौर पुलिस लाइन के पूर्व माध्यमिक विद्यालय में कक्षा एक से पांच के बच्चों के स्कूल पहुंचने पर उ
- फोटो : BIJNOR
बिजनौर। बुधवार को प्राथमिक व मांटेसरी स्कूलों को नजारा बदला हुआ था। डेढ़ साल से वीरान स्कूलों में बच्चों का शोर सुनाई दे रहा था। सालों से स्कूल की घंटी सुनने के लिए बेताब बच्चे स्कूलों की ओर दौड़ पड़े। बच्चों के गेट पर पहुंचते ही गुरु जनों ने हर्षित मुद्रा में पहले थर्मल स्क्रीनिंग किया। फिर एक-एक बच्चे का तिलक वंदन करके स्वागत किया गया।
कोरोना के कारण मार्च 2020 से पांचवीं तक के स्कूल बंद थे। बच्चे घरों में कैद थे। डेढ़ साल के संक्रमण काल में खेल व खेल का मैदान बच्चों के लिए दूर की कौड़ी हो गया था। बुधवार को स्कूल खुले तो मानो बच्चों को नई जिंदगी मिल गई हो। स्कूलों में चहल-पहल लौटी आई। स्कूल में चारों ओर बच्चों की किलकारियां, शोर शराबा गूंज रहा था। शिक्षक भी बच्चों के उछल-कूद से भाव विभोर दिखाई दे रहे थे।
बच्चे डेढ़ साल बाद आपस में मिले हैं। बच्चों के हाव भाव देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो बच्चे कोरोना काल के डेढ़ साल के विछोह की कहानी मौन भाव से बता रहे हो। प्राथमिक विद्यालय सिविल लाइंस बिजनौर के प्रधानाध्यापक अमित पाठक बताते हैं कि बच्चों से ही स्कूल की शोभा है। शिक्षक लगातार स्कूल आ रहे हैं लेकिन बच्चों के नहीं आने से समय काटना मुश्किल हो रहा था।
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स्कूलों में कोरोना गाइडलाइंस का पालन हो रहा था। सोशल डिस्टेंस का पालन हो रहा था। बच्चे मास्क लगाकर आए थे। जो लगाकर नहीं आए थे, उन्हें शिक्षकों ने मास्क दिए। उपस्थिति कुछ जगह कम तथा कुछ जगह ठीक ठाक थी। पब्लिक स्कूलों में काफी संख्या में बच्चे आए। स्कूलों में बच्चों का तिलक करके स्वागत किया गया। कुछ स्कूलों में बच्चों को टॉफी बांटी गई।
पहला दिन उल्लास व उत्साह से भरपूर रहा
पहला दिन बच्चों का मजे से बीता। शांतनु कक्षा दो में पढ़ता है। शरमाते हुए बताया कि स्कूल आकर अच्छा लगा। खूब खेले हैं। पढ़ाई भी हुई है। शिक्षक अमित पाठक बताते हैं कि सालों बाद खेल का सामान बच्चों में बटा है। बच्चों ने मनपसंद खेल खेले हैं। खेल के मैदान में भी रौनक लौटी है। पांचवीं की संध्या, सुमन, का भी कमोबेश यही कहना था। कुल मिलाकर बच्चों का स्कूल खुलने का पहला दिन उल्लास व उत्साह से भरपूर रहा।
बच्चों का टीकाकरण प्राथमिकता से हो
कुछ अभिभावक बच्चों को स्वयं स्कूल लेकर आए। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के चेहरों पर चिंता की लकीरें दिखाई पड़ रही थी। उपेन्द्र सिंह ने कहा कि यह ठीक है कि स्कूलों में सुरक्षा की पुख्ता सुविधाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की स्थिति सुधरी है, परंतु कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कहा कि बच्चों को कोरोना का टीका लग जाए तो बड़ी राहत होगी। बच्चों का टीकाकरण प्राथमिकता से हो।
बच्चों में स्कूल जाने की रही बेसब्री
सेंट मेरी स्कूल बच्चों के साथ आए अभिभावक एनके गौड़ बताते हैं कि बच्चों में स्कूल में आने की बेताबी मंगलवार से ही थी। बच्चे बिना कहे सोकर उठे। स्कूल आने की तैयारी फटाफट की। इसके बाद जैसे ही स्कूली बस का हॉर्न बजा तो बस्ता उठाकर बस की ओर दौड़ पड़े। बताया कि वे स्कूलों में सुरक्षा सुविधाओं से संतुष्ट हैं। छुट्टी होने के बाद बच्चे खुशी-खुशी मम्मियों के साथ घर लौटे।
वाहन चालकों ने राहत महसूस की
पांचवीं तक के स्कूल डेढ़ साल बाद खुले हैं। स्कूली वाहनों के चालक नरेंद्र ने बताया कि साहब कोरोना संक्रमण काल में स्कूल बंद होने से उनके परिवार की रोजी रोटी छिन गई है। स्कूल खुले हैं तो रोजगार की उम्मीद बंधी है। अब वे कोरोना काल को दुस्वप्न की तरह याद करना नहीं चाहते। गाड़ी में पहले से आधे से भी कम बच्चे बैठा रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा पहले है।
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कोरोना के कारण मार्च 2020 से पांचवीं तक के स्कूल बंद थे। बच्चे घरों में कैद थे। डेढ़ साल के संक्रमण काल में खेल व खेल का मैदान बच्चों के लिए दूर की कौड़ी हो गया था। बुधवार को स्कूल खुले तो मानो बच्चों को नई जिंदगी मिल गई हो। स्कूलों में चहल-पहल लौटी आई। स्कूल में चारों ओर बच्चों की किलकारियां, शोर शराबा गूंज रहा था। शिक्षक भी बच्चों के उछल-कूद से भाव विभोर दिखाई दे रहे थे।
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बच्चे डेढ़ साल बाद आपस में मिले हैं। बच्चों के हाव भाव देखकर ऐसा लग रहा था कि मानो बच्चे कोरोना काल के डेढ़ साल के विछोह की कहानी मौन भाव से बता रहे हो। प्राथमिक विद्यालय सिविल लाइंस बिजनौर के प्रधानाध्यापक अमित पाठक बताते हैं कि बच्चों से ही स्कूल की शोभा है। शिक्षक लगातार स्कूल आ रहे हैं लेकिन बच्चों के नहीं आने से समय काटना मुश्किल हो रहा था।
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स्कूलों में कोरोना गाइडलाइंस का पालन हो रहा था। सोशल डिस्टेंस का पालन हो रहा था। बच्चे मास्क लगाकर आए थे। जो लगाकर नहीं आए थे, उन्हें शिक्षकों ने मास्क दिए। उपस्थिति कुछ जगह कम तथा कुछ जगह ठीक ठाक थी। पब्लिक स्कूलों में काफी संख्या में बच्चे आए। स्कूलों में बच्चों का तिलक करके स्वागत किया गया। कुछ स्कूलों में बच्चों को टॉफी बांटी गई।
पहला दिन उल्लास व उत्साह से भरपूर रहा
पहला दिन बच्चों का मजे से बीता। शांतनु कक्षा दो में पढ़ता है। शरमाते हुए बताया कि स्कूल आकर अच्छा लगा। खूब खेले हैं। पढ़ाई भी हुई है। शिक्षक अमित पाठक बताते हैं कि सालों बाद खेल का सामान बच्चों में बटा है। बच्चों ने मनपसंद खेल खेले हैं। खेल के मैदान में भी रौनक लौटी है। पांचवीं की संध्या, सुमन, का भी कमोबेश यही कहना था। कुल मिलाकर बच्चों का स्कूल खुलने का पहला दिन उल्लास व उत्साह से भरपूर रहा।
बच्चों का टीकाकरण प्राथमिकता से हो
कुछ अभिभावक बच्चों को स्वयं स्कूल लेकर आए। बच्चों की सुरक्षा को लेकर अभिभावकों के चेहरों पर चिंता की लकीरें दिखाई पड़ रही थी। उपेन्द्र सिंह ने कहा कि यह ठीक है कि स्कूलों में सुरक्षा की पुख्ता सुविधाएं हैं। उन्होंने कहा कि कोरोना की स्थिति सुधरी है, परंतु कोरोना पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है। कहा कि बच्चों को कोरोना का टीका लग जाए तो बड़ी राहत होगी। बच्चों का टीकाकरण प्राथमिकता से हो।
बच्चों में स्कूल जाने की रही बेसब्री
सेंट मेरी स्कूल बच्चों के साथ आए अभिभावक एनके गौड़ बताते हैं कि बच्चों में स्कूल में आने की बेताबी मंगलवार से ही थी। बच्चे बिना कहे सोकर उठे। स्कूल आने की तैयारी फटाफट की। इसके बाद जैसे ही स्कूली बस का हॉर्न बजा तो बस्ता उठाकर बस की ओर दौड़ पड़े। बताया कि वे स्कूलों में सुरक्षा सुविधाओं से संतुष्ट हैं। छुट्टी होने के बाद बच्चे खुशी-खुशी मम्मियों के साथ घर लौटे।
वाहन चालकों ने राहत महसूस की
पांचवीं तक के स्कूल डेढ़ साल बाद खुले हैं। स्कूली वाहनों के चालक नरेंद्र ने बताया कि साहब कोरोना संक्रमण काल में स्कूल बंद होने से उनके परिवार की रोजी रोटी छिन गई है। स्कूल खुले हैं तो रोजगार की उम्मीद बंधी है। अब वे कोरोना काल को दुस्वप्न की तरह याद करना नहीं चाहते। गाड़ी में पहले से आधे से भी कम बच्चे बैठा रहे हैं। बच्चों की सुरक्षा पहले है।