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कोल्हुओं के संचालन से किसानों को राहत
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नांगलसोती में कोल्हू पर गुड़ बनाता कारीगर।
- फोटो : NAZIBABAD
कोल्हुओं के संचालन से किसानों को राहत
नांगलसोती। क्षेत्र में कोल्हुओं का संचालन शुरू होने से आर्थिक संकटों से जूझ रहे किसानों को राहत मिली है। नांगलसोती क्षेत्र के सरायआलम, जालपुर, सहजादपुर आदि गांवों में प्रतिवर्ष 50 कोल्हुओं का संचालन किया जाता है। अधिकांश कोल्हुओं का संचालन नवरात्र में शुरू हो जाता है, लेकिन बारिश होने से नांगलसोती क्षेत्र में कोल्हुओं को संचालन नहीं हो सका।
अब मौसम सही होने पर कोल्हुओं का संचालन शुरू होने से किसानों को राहत तो मिली है। कोल्हुओं पर 250 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य पर किसानों से गन्ना खरीदा जा रहा है। किसान बृजपाल सिंह, विक्रम सिंह, इरशाद अहमद, राजीव का कहना है कि आर्थिक तंगी और चारे की समस्या से जूझ रहे किसानों को मजबूरन कोल्हुओं पर कम दामों पर गन्ना बेचना पड़ रहा है। वहीं, कोल्हू संचालक ओमवीर सिंह, मोनू, नितिन, अर्जुन, राजवीर सिंह का कहना है कि क्षेत्र के कोल्हुओं में निर्मित गुड़ अपने छोटे आकार और मिठास के कारण बिजनौर समेत आसपास के प्रदेशों में प्रसिद्ध है। इन कोल्हुओं में प्रतिदिन करीब पांच हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर 500-600 क्विंटल गुड़ तैयार किया जाता है। किरतपुर मंडी में क्षेत्र के कोल्हुओं में निर्मित गुड़ की दिमांड लगातार बढ़ रही है।
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नांगलसोती। क्षेत्र में कोल्हुओं का संचालन शुरू होने से आर्थिक संकटों से जूझ रहे किसानों को राहत मिली है। नांगलसोती क्षेत्र के सरायआलम, जालपुर, सहजादपुर आदि गांवों में प्रतिवर्ष 50 कोल्हुओं का संचालन किया जाता है। अधिकांश कोल्हुओं का संचालन नवरात्र में शुरू हो जाता है, लेकिन बारिश होने से नांगलसोती क्षेत्र में कोल्हुओं को संचालन नहीं हो सका।
अब मौसम सही होने पर कोल्हुओं का संचालन शुरू होने से किसानों को राहत तो मिली है। कोल्हुओं पर 250 रुपये प्रति क्विंटल के मूल्य पर किसानों से गन्ना खरीदा जा रहा है। किसान बृजपाल सिंह, विक्रम सिंह, इरशाद अहमद, राजीव का कहना है कि आर्थिक तंगी और चारे की समस्या से जूझ रहे किसानों को मजबूरन कोल्हुओं पर कम दामों पर गन्ना बेचना पड़ रहा है। वहीं, कोल्हू संचालक ओमवीर सिंह, मोनू, नितिन, अर्जुन, राजवीर सिंह का कहना है कि क्षेत्र के कोल्हुओं में निर्मित गुड़ अपने छोटे आकार और मिठास के कारण बिजनौर समेत आसपास के प्रदेशों में प्रसिद्ध है। इन कोल्हुओं में प्रतिदिन करीब पांच हजार क्विंटल गन्ने की पेराई कर 500-600 क्विंटल गुड़ तैयार किया जाता है। किरतपुर मंडी में क्षेत्र के कोल्हुओं में निर्मित गुड़ की दिमांड लगातार बढ़ रही है।
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