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अभिव्यक्ति साहित्य संस्था की ओर से काव्य संध्या का आयोजन
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‘यकीनन मुस्कुराना पड़े तो मुस्कुरा लेता हूं...’
नजीबाबाद। अभिव्यक्ति साहित्य संस्था की ओर से आयोजित काव्य संध्या में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। संस्था के सक्रिय रचनाकार जयप्रकाश टॉक जौली के आवास पर सोमवार को आयोजित काव्य संध्या में मुख्य अतिथि व्यापारी सुभाषचंद बंसल और विशिष्ठ अतिथि कवि अनिल शर्मा रहे।
धामपुर के वरिष्ठ साहित्यकार राजकुमार वर्मा की अध्यक्षता में राजेश मिश्रा राजू ने सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जितेंद्र जैन ने बसा हुआ है आंगन लोगों की भीड़ से.., कुमुद कुमार ने दिलों में खुद्दारी मचेगी एक दिन देख लेना.., नीरज सिंघल ने यकीनन मुस्कुराना पड़े तो मुस्कुरा लेता हूं, हर गम अपने सीने में छुपा लेता हूं.., अजय जौहरी ने दो कदम भी साथ में ना चल सके.., राजेश मिश्रा राजू ने जीत पर जीत अपनी सुनिश्चित करो.., मंजू जौहरी मधुर ने सांसे वेंटिलेटरों पर हैं क्या करोगे ख्वाबों का.., जयप्रकाश जौली ने ये जो है कोरोना कभी तुम डरो ना.., अनिल शर्मा अनिल ने मन से मन का मिलन ही तो प्रीत है.., और राजकुमार वर्मा, भागीरथ सिंह, प्रमोद शर्मा, प्रदीप डेजी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक प्रदीप डेजी, श्याम तिवारी, उमापति गर्ग, तरुण अग्रवाल, सुदेश, माधव आदि मौजूद रहे।
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नजीबाबाद। अभिव्यक्ति साहित्य संस्था की ओर से आयोजित काव्य संध्या में कवियों ने अपनी-अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। संस्था के सक्रिय रचनाकार जयप्रकाश टॉक जौली के आवास पर सोमवार को आयोजित काव्य संध्या में मुख्य अतिथि व्यापारी सुभाषचंद बंसल और विशिष्ठ अतिथि कवि अनिल शर्मा रहे।
धामपुर के वरिष्ठ साहित्यकार राजकुमार वर्मा की अध्यक्षता में राजेश मिश्रा राजू ने सरस्वती वंदना के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ किया। कार्यक्रम में जितेंद्र जैन ने बसा हुआ है आंगन लोगों की भीड़ से.., कुमुद कुमार ने दिलों में खुद्दारी मचेगी एक दिन देख लेना.., नीरज सिंघल ने यकीनन मुस्कुराना पड़े तो मुस्कुरा लेता हूं, हर गम अपने सीने में छुपा लेता हूं.., अजय जौहरी ने दो कदम भी साथ में ना चल सके.., राजेश मिश्रा राजू ने जीत पर जीत अपनी सुनिश्चित करो.., मंजू जौहरी मधुर ने सांसे वेंटिलेटरों पर हैं क्या करोगे ख्वाबों का.., जयप्रकाश जौली ने ये जो है कोरोना कभी तुम डरो ना.., अनिल शर्मा अनिल ने मन से मन का मिलन ही तो प्रीत है.., और राजकुमार वर्मा, भागीरथ सिंह, प्रमोद शर्मा, प्रदीप डेजी ने अपनी रचनाएं प्रस्तुत की। इस अवसर पर संस्था के संस्थापक प्रदीप डेजी, श्याम तिवारी, उमापति गर्ग, तरुण अग्रवाल, सुदेश, माधव आदि मौजूद रहे।
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