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अशोक की शहादत को भूल गए लोग, वीरान पड़ा शहीद स्मारक
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बिजनौर के गांव फीना में कारगिल युद्ध में शहीद हुए नायक अशोक कुमार की प्रतिमा।
- फोटो : BIJNOR
अशोक की शहादत को भूल गए लोग, वीरान पड़ा शहीद स्मारक
शिवाला कलां। फीना के रहने वाले अशोक कुमार को कारगिल युद्ध में शहीद हुए 23 वर्ष बीत गए, लेकिन शहादत के समय की घोषणाओं को अभी पूरा नहीं किया जा सका है। शहीद के पिता की बीमारी के चलते एक साल पहले मौत हो गई है। शहीद का इकलौता बेटा अपनी बूढ़ी दादी ओमवती की सेवा कर रहा है। जिसे रोजगार भी नहीं मिल पाया।
गोरखा रेजीमेंट की तीसरी बटालियन में नायक के पद पर तैनात अशोक कुमार अपने माता पिता इकलौती संतान थे। माता ओमवती देवी ने बताया कि बेटे की शहादत पर प्रशासन ने उन्हें 50 बीघा जमीन देने, अशोक के नाम पर डिग्री कॉलेज खोलने, उसके बच्चों को मुफ्त शिक्षा एवं परिजनों को पेट्रोल पंप का लाइसेंस दिलाने का वादा किया था। लेकिन शहादत के 23 वर्ष बीतने के बाद भी उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। उन्हें सिर्फ 4 हजार रुपये महीना पेंशन तो जरूर मिलती है। उसी से वे अपने परिवार का गुजारा करती है।
युद्ध के समय अशोक कुमार कि बटालियन की तैनाती दास सेक्टर में थी। शहीद की माता ओमवती देवी ने बताया कि 10 जुलाई की रात को उनकी बटालियन को एक चोटी को जीतने का लक्ष्य दिया गया था। दुश्मन काफी ऊपर था, जबकि भारतीय फौज पहाड़ी पर नीचे से चढ़ रही थी। दुश्मन को भारतीय फौज के आने का पता लग गया जिसके बाद कई घंटे गोलियां चलीं और 11 जुलाई की सुबह तक सभी पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इस दौरान भारतीय फौज ने उस चोटी पर विजय पताका फहरा दी, लेकिन दुर्भाग्य से अशोक कुमार को कई गोलियां लगीं और वे भारत माता की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।
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ग्राम फीना के दो प्राथमिक और एक जूनियर हाई स्कूल का यज्ञ नाम कारगिल शहीद अशोक कुमार के नाम पर रखा गया है। इसके अलावा चांदपुर फीना मार्ग का नाम भी शहीद अशोक कुमार के नाम पर है। शहीद अशोक कुमार मार्ग की हालत फीना से चांदपुर तक बेहद खराब है। बरसात के मौसम में सड़क में बने गड्ढों में पानी भर जाता है। इससे आए दिन हादसे होते हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य रश्मि देवी के अनुसार यह सड़क लोक निर्माण विभाग के अधीन आती है। सड़क के दोनों नाले बंद होने के कारण सड़क में हमेशा जलभराव रहता है।
बदतर हालात में है शहीद शहीद मार्ग
हल्दौर। नगर के मोहल्ला अल्ला वाला में स्थित कारगिल शहीद अशोक कुमार वाल्मीकि मार्ग की हालत सरकारी उपेक्षाओं का शिकार होकर के कारण बद से बदतर हुई पड़ी है। मार्ग में जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण जलभराव बना हुआ है। मार्ग के किनारे गंदगी के अंबार लगे पड़े हैं। मोहल्ला अल्लाहवाला में स्थित वाल्मीकि बस्ती के मुख्य मार्ग का नाम उसी दौरान देश के अमर शहीद अशोक कुमार वाल्मीकि की यादगार में रखा गया। राजीव कुमार, श्रीचंद, श्रीकांत, संजय, सतीश कुमार, राहुल कुमार, सीपी सिंह आदि मोहल्लेवासियों का कहना है कि हर साल कारगिल दिवस पर शहीद अशोक कुमार वाल्मीकि की शहादत को नमन किया जाता है।
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शिवाला कलां। फीना के रहने वाले अशोक कुमार को कारगिल युद्ध में शहीद हुए 23 वर्ष बीत गए, लेकिन शहादत के समय की घोषणाओं को अभी पूरा नहीं किया जा सका है। शहीद के पिता की बीमारी के चलते एक साल पहले मौत हो गई है। शहीद का इकलौता बेटा अपनी बूढ़ी दादी ओमवती की सेवा कर रहा है। जिसे रोजगार भी नहीं मिल पाया।
गोरखा रेजीमेंट की तीसरी बटालियन में नायक के पद पर तैनात अशोक कुमार अपने माता पिता इकलौती संतान थे। माता ओमवती देवी ने बताया कि बेटे की शहादत पर प्रशासन ने उन्हें 50 बीघा जमीन देने, अशोक के नाम पर डिग्री कॉलेज खोलने, उसके बच्चों को मुफ्त शिक्षा एवं परिजनों को पेट्रोल पंप का लाइसेंस दिलाने का वादा किया था। लेकिन शहादत के 23 वर्ष बीतने के बाद भी उन्हें सिर्फ कोरे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। उन्हें सिर्फ 4 हजार रुपये महीना पेंशन तो जरूर मिलती है। उसी से वे अपने परिवार का गुजारा करती है।
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युद्ध के समय अशोक कुमार कि बटालियन की तैनाती दास सेक्टर में थी। शहीद की माता ओमवती देवी ने बताया कि 10 जुलाई की रात को उनकी बटालियन को एक चोटी को जीतने का लक्ष्य दिया गया था। दुश्मन काफी ऊपर था, जबकि भारतीय फौज पहाड़ी पर नीचे से चढ़ रही थी। दुश्मन को भारतीय फौज के आने का पता लग गया जिसके बाद कई घंटे गोलियां चलीं और 11 जुलाई की सुबह तक सभी पाकिस्तानी सैनिक मारे गए। इस दौरान भारतीय फौज ने उस चोटी पर विजय पताका फहरा दी, लेकिन दुर्भाग्य से अशोक कुमार को कई गोलियां लगीं और वे भारत माता की रक्षा करते हुए शहीद हो गए।
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ग्राम फीना के दो प्राथमिक और एक जूनियर हाई स्कूल का यज्ञ नाम कारगिल शहीद अशोक कुमार के नाम पर रखा गया है। इसके अलावा चांदपुर फीना मार्ग का नाम भी शहीद अशोक कुमार के नाम पर है। शहीद अशोक कुमार मार्ग की हालत फीना से चांदपुर तक बेहद खराब है। बरसात के मौसम में सड़क में बने गड्ढों में पानी भर जाता है। इससे आए दिन हादसे होते हैं। पूर्व जिला पंचायत सदस्य रश्मि देवी के अनुसार यह सड़क लोक निर्माण विभाग के अधीन आती है। सड़क के दोनों नाले बंद होने के कारण सड़क में हमेशा जलभराव रहता है।
बदतर हालात में है शहीद शहीद मार्ग
हल्दौर। नगर के मोहल्ला अल्ला वाला में स्थित कारगिल शहीद अशोक कुमार वाल्मीकि मार्ग की हालत सरकारी उपेक्षाओं का शिकार होकर के कारण बद से बदतर हुई पड़ी है। मार्ग में जल निकासी की व्यवस्था नहीं होने के कारण जलभराव बना हुआ है। मार्ग के किनारे गंदगी के अंबार लगे पड़े हैं। मोहल्ला अल्लाहवाला में स्थित वाल्मीकि बस्ती के मुख्य मार्ग का नाम उसी दौरान देश के अमर शहीद अशोक कुमार वाल्मीकि की यादगार में रखा गया। राजीव कुमार, श्रीचंद, श्रीकांत, संजय, सतीश कुमार, राहुल कुमार, सीपी सिंह आदि मोहल्लेवासियों का कहना है कि हर साल कारगिल दिवस पर शहीद अशोक कुमार वाल्मीकि की शहादत को नमन किया जाता है।

कारगिल युद्ध में शहीद हुए नायक अशोक कुमार की माता ओमवती देवी व पुत्र नितिन कुमार।- फोटो : BIJNOR