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Bijnor News: सील अस्पताल में हो रहा था मरीजों का इलाज, प्राथमिकी दर्ज
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बिजनौर/कोतवाली देहात। कोतवाली देहात में सील किए गए न्यू फैमली हेल्थ केयर सेंटर को अवैध रूप से दोबारा खोलने पर संचालिका नफीसा के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। स्वास्थ्य विभाग की शिकायत पर यह कार्रवाई हुई है, जिसने पाया कि सील तोड़कर मरीजों का इलाज किया जा रहा था। इसी बीच बिजनौर के चौधरी नर्सिंग होम का लाइसेंस मरीजों के इलाज में लापरवाही के कारण रद्द करने की संस्तुति की गई है।
न्यू फैमली हेल्थ केयर सेंटर को पहले जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी (न्यायिक) नगीना और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने सील किया था। निरीक्षण के दौरान मुख्य क्लीनिक बंद मिला था, लेकिन बराबर में बने हॉल से इसका संचालन हो रहा था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की ओर से उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केपी सिंह ने कोतवाली देहात पुलिस को तहरीर दी। तहरीर में सील किए गए संस्थान को अवैध रूप से खोलने और सरकारी संपत्ति में अवैध प्रवेश का आरोप लगाया गया। पुलिस ने नफीसा के खिलाफ नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट सहित बीएनएस की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस उपाधीक्षक नगीना राजेश सोलंकी ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और विधिक कार्रवाई की जा रही है।
-चौधरी नर्सिंग होम का पंजीकरण रद्द करने की संस्तुति की
चौधरी नर्सिंग होम के मामले में पाडली निवासी अवधेश कुमार ने शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि उनकी गर्भवती पत्नी की डिलीवरी में लापरवाही से नवजात की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि चिकित्सक बीएएमएस थे और डिलीवरी के लिए अधिकृत नहीं थे। उन्होंने मरीज की डिलीवरी करने से इन्कार कर दिया और जांच अधिकारी को इनडोर रजिस्टर भी नहीं दिखा पाए। मरीज को ओपीडी के पर्चे के अलावा कोई कागज नहीं दिया गया था। सीएमओ डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि जांच अधिकारी ने चौधरी नर्सिंग होम का पंजीकरण रद्द करने की संस्तुति की है। जांच रिपोर्ट देखने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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-अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई जारी
स्वास्थ्य विभाग ने इस साल कई अन्य अवैध अस्पतालों पर भी कार्रवाई की है। नगीना के गांव नंदपुर में बिना पंजीकरण चल रहे मीना क्लीनिक को सील किया गया था। धामपुर में पीयूष नर्सिंग होम और काजूवाला में कमलेश देवी मेमोरियल नर्सिंग होम को भी सील करने की कार्रवाई की गई। विभाग ने पंजीकृत अस्पतालों में कमियां मिलने पर भी सील करने की कार्रवाई की है। यह दर्शाता है कि विभाग अवैध और अनियमित स्वास्थ्य सुविधाओं के खिलाफ सक्रिय है। हालांकि, जिले में अभी भी कई बिना पंजीकरण अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं।
-घटना होने पर ही जागता है स्वास्थ्य विभाग
जिले में बिना पंजीकरण अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग अक्सर किसी घटना के बाद ही सक्रिय होता है। अस्पतालों पर कार्रवाई के लिए तहसील और सीएचसी स्तर पर अवैध चिकित्सकों पर कार्रवाई के लिए नोडल अधिकारी भी बनाए गए हैं। नगीना में शिवालय हेल्थ केयर सेंटर पर डॉ. आशीष अहलावत का नाम अंकित था। यह चिकित्सक उस समय संविदा पर पुरैनी पीएचसी में भी तैनात थे। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं में निगरानी की कमी को उजागर करती है। अधिकारियों को घटनाओं से पहले ही सक्रिय होकर अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की जरूरत है।
-मरीजों की सुरक्षा पर सवाल
अवैध और अनियमित अस्पतालों का संचालन मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। चौधरी नर्सिंग होम जैसे मामलों में चिकित्सकों की योग्यता और उपचार की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। बिना पंजीकरण वाले क्लीनिकों में अक्सर अयोग्य कर्मचारी और अपर्याप्त सुविधाएं होती हैं। इससे मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन को जोखिम होता है। स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी स्वास्थ्य सुविधाएं निर्धारित मानकों का पालन करें। सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई से ही मरीजों को सुरक्षित उपचार मिल पाएगा।
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न्यू फैमली हेल्थ केयर सेंटर को पहले जिलाधिकारी के निर्देश पर उप जिलाधिकारी (न्यायिक) नगीना और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त टीम ने सील किया था। निरीक्षण के दौरान मुख्य क्लीनिक बंद मिला था, लेकिन बराबर में बने हॉल से इसका संचालन हो रहा था। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय की ओर से उप मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. केपी सिंह ने कोतवाली देहात पुलिस को तहरीर दी। तहरीर में सील किए गए संस्थान को अवैध रूप से खोलने और सरकारी संपत्ति में अवैध प्रवेश का आरोप लगाया गया। पुलिस ने नफीसा के खिलाफ नेशनल मेडिकल कमीशन एक्ट सहित बीएनएस की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। पुलिस उपाधीक्षक नगीना राजेश सोलंकी ने बताया कि मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई है और विधिक कार्रवाई की जा रही है।
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-चौधरी नर्सिंग होम का पंजीकरण रद्द करने की संस्तुति की
चौधरी नर्सिंग होम के मामले में पाडली निवासी अवधेश कुमार ने शिकायत की थी। उन्होंने बताया कि उनकी गर्भवती पत्नी की डिलीवरी में लापरवाही से नवजात की मौत हो गई थी। जांच में सामने आया कि चिकित्सक बीएएमएस थे और डिलीवरी के लिए अधिकृत नहीं थे। उन्होंने मरीज की डिलीवरी करने से इन्कार कर दिया और जांच अधिकारी को इनडोर रजिस्टर भी नहीं दिखा पाए। मरीज को ओपीडी के पर्चे के अलावा कोई कागज नहीं दिया गया था। सीएमओ डॉ. कौशलेंद्र सिंह ने बताया कि जांच अधिकारी ने चौधरी नर्सिंग होम का पंजीकरण रद्द करने की संस्तुति की है। जांच रिपोर्ट देखने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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-अवैध अस्पतालों पर कार्रवाई जारी
स्वास्थ्य विभाग ने इस साल कई अन्य अवैध अस्पतालों पर भी कार्रवाई की है। नगीना के गांव नंदपुर में बिना पंजीकरण चल रहे मीना क्लीनिक को सील किया गया था। धामपुर में पीयूष नर्सिंग होम और काजूवाला में कमलेश देवी मेमोरियल नर्सिंग होम को भी सील करने की कार्रवाई की गई। विभाग ने पंजीकृत अस्पतालों में कमियां मिलने पर भी सील करने की कार्रवाई की है। यह दर्शाता है कि विभाग अवैध और अनियमित स्वास्थ्य सुविधाओं के खिलाफ सक्रिय है। हालांकि, जिले में अभी भी कई बिना पंजीकरण अस्पताल धड़ल्ले से चल रहे हैं।
-घटना होने पर ही जागता है स्वास्थ्य विभाग
जिले में बिना पंजीकरण अस्पताल धड़ल्ले से संचालित हो रहे हैं। स्वास्थ्य विभाग अक्सर किसी घटना के बाद ही सक्रिय होता है। अस्पतालों पर कार्रवाई के लिए तहसील और सीएचसी स्तर पर अवैध चिकित्सकों पर कार्रवाई के लिए नोडल अधिकारी भी बनाए गए हैं। नगीना में शिवालय हेल्थ केयर सेंटर पर डॉ. आशीष अहलावत का नाम अंकित था। यह चिकित्सक उस समय संविदा पर पुरैनी पीएचसी में भी तैनात थे। यह स्थिति स्वास्थ्य सेवाओं में निगरानी की कमी को उजागर करती है। अधिकारियों को घटनाओं से पहले ही सक्रिय होकर अवैध गतिविधियों पर रोक लगाने की जरूरत है।
-मरीजों की सुरक्षा पर सवाल
अवैध और अनियमित अस्पतालों का संचालन मरीजों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा पैदा करता है। चौधरी नर्सिंग होम जैसे मामलों में चिकित्सकों की योग्यता और उपचार की गुणवत्ता पर सवाल उठते हैं। बिना पंजीकरण वाले क्लीनिकों में अक्सर अयोग्य कर्मचारी और अपर्याप्त सुविधाएं होती हैं। इससे मरीजों के स्वास्थ्य और जीवन को जोखिम होता है। स्वास्थ्य विभाग को यह सुनिश्चित करना होगा कि सभी स्वास्थ्य सुविधाएं निर्धारित मानकों का पालन करें। सख्त निगरानी और त्वरित कार्रवाई से ही मरीजों को सुरक्षित उपचार मिल पाएगा।