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मरीजों को मिल रही तारीख, नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड
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बिजनौर के जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के बाहर लगी मरीजों और तीमारदारों की भीड़।
- फोटो : BIJNOR
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मरीजों को मिल रही तारीख, नहीं हो रहे अल्ट्रासाउंड
अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की तीन मशीनें हैं, मगर चिकित्सक सिर्फ एक ही है। जिसके चलते जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए नंबर लेना पड़ता है। क्योंकि मरीजों को 15 दिन से पहले की अल्ट्रासाउंड कराने की तारीख नहीं मिल रही है। जैसे-जैसे मरीज बढ़ रहे हैं, वैसे ही उन्हें आगे की तारीख मिलती जा रही है।
जिला अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में सिर्फ एक ही रेडियोलॉजिस्ट है, जो अल्ट्रासाउंड से लेकर सीटी स्कैन की रिपोर्ट तैयार करता है। एक चिकित्सक होने की वजह से रोजाना मरीजों को तारीख लेनी पड़ती है। अगर मरीज को अल्ट्रासाउंड की जरूरत आज है तो उसका अल्ट्रासाउंड 15 दिन बाद होगा। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। रोजाना अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीजों और तीमारदारों की लंबी कतार लग जाती है। लेकिन अल्ट्रासाउंड उन्हीं का होता है, जिनकी तारीख लगी होती है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों की एंट्री कराकर उन्हें नई तारीख दे दी जाती है। जिला अस्पताल में रोजाना 30 से 40 मरीज आ रहे हैं, लेकिन रोजाना 20 से 25 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड किया जाता है। बाकी बचे हुए मरीजों को नई तारीख दे दी जाती है।
बाहर अल्ट्रासांउड कराने में होता है ज्यादा खर्चा
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड निशुल्क किया जाता है, लेकिन जब कोई मरीज बाहर अल्ट्रासाउंड कराता है तो उसकी जेब पर 500 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक का भार पड़ता है। जिला अस्पताल में 15 दिन तक की तारीख मिलने की वजह से ज्यादा जरूरत पड़ने पर मरीज बाहर भी अल्ट्रासाउंड करा लेते हैं।
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रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए भेजा पत्र : सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट की कमी से अल्ट्रासाउंड करने में दिक्कत आ रही है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए करीब 15 दिन बाद तक की तारीख मिल रही है। जिसके चलते एक चिकित्सक का अटैचमेंट अभी जिला अस्पताल से ही हैं। उनकी वापस जिला अस्पताल में तैनाती के लिए एडी मुरादाबाद, सीएमओ और डीएम को पत्र भेज दिया गया है।
सबसे पहले मेडिकोलिगल और इमरजेंसी मरीजों का अल्ट्रासाउंड प्राथमिकता के आधार पर किए जाते हैं। समय पूरा होने पर जो मरीज बच जाते हैं, उन्हें अगली तारीख दी जाती है। प्रयास किया जाता है कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जा सके-डॉ. वीआर त्यागी, रेडियोलॉजिस्ट
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अमन कुमार शर्मा
बिजनौर। जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की तीन मशीनें हैं, मगर चिकित्सक सिर्फ एक ही है। जिसके चलते जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने के लिए नंबर लेना पड़ता है। क्योंकि मरीजों को 15 दिन से पहले की अल्ट्रासाउंड कराने की तारीख नहीं मिल रही है। जैसे-जैसे मरीज बढ़ रहे हैं, वैसे ही उन्हें आगे की तारीख मिलती जा रही है।
जिला अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग में सिर्फ एक ही रेडियोलॉजिस्ट है, जो अल्ट्रासाउंड से लेकर सीटी स्कैन की रिपोर्ट तैयार करता है। एक चिकित्सक होने की वजह से रोजाना मरीजों को तारीख लेनी पड़ती है। अगर मरीज को अल्ट्रासाउंड की जरूरत आज है तो उसका अल्ट्रासाउंड 15 दिन बाद होगा। इससे मरीज परेशान हो रहे हैं। रोजाना अल्ट्रासाउंड कक्ष के बाहर मरीजों और तीमारदारों की लंबी कतार लग जाती है। लेकिन अल्ट्रासाउंड उन्हीं का होता है, जिनकी तारीख लगी होती है। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड कराने वाले मरीजों की एंट्री कराकर उन्हें नई तारीख दे दी जाती है। जिला अस्पताल में रोजाना 30 से 40 मरीज आ रहे हैं, लेकिन रोजाना 20 से 25 मरीजों का ही अल्ट्रासाउंड किया जाता है। बाकी बचे हुए मरीजों को नई तारीख दे दी जाती है।
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बाहर अल्ट्रासांउड कराने में होता है ज्यादा खर्चा
जिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड निशुल्क किया जाता है, लेकिन जब कोई मरीज बाहर अल्ट्रासाउंड कराता है तो उसकी जेब पर 500 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक का भार पड़ता है। जिला अस्पताल में 15 दिन तक की तारीख मिलने की वजह से ज्यादा जरूरत पड़ने पर मरीज बाहर भी अल्ट्रासाउंड करा लेते हैं।
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रेडियोलॉजिस्ट की तैनाती के लिए भेजा पत्र : सीएमएस
जिला अस्पताल के सीएमएस डॉ. अरुण कुमार पांडेय ने बताया कि रेडियोलॉजिस्ट की कमी से अल्ट्रासाउंड करने में दिक्कत आ रही है। मरीजों को अल्ट्रासाउंड कराने के लिए करीब 15 दिन बाद तक की तारीख मिल रही है। जिसके चलते एक चिकित्सक का अटैचमेंट अभी जिला अस्पताल से ही हैं। उनकी वापस जिला अस्पताल में तैनाती के लिए एडी मुरादाबाद, सीएमओ और डीएम को पत्र भेज दिया गया है।
सबसे पहले मेडिकोलिगल और इमरजेंसी मरीजों का अल्ट्रासाउंड प्राथमिकता के आधार पर किए जाते हैं। समय पूरा होने पर जो मरीज बच जाते हैं, उन्हें अगली तारीख दी जाती है। प्रयास किया जाता है कि ज्यादा से ज्यादा मरीजों का अल्ट्रासाउंड किया जा सके-डॉ. वीआर त्यागी, रेडियोलॉजिस्ट