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Bijnor News: छूट रहा धैर्य का साथ, छोटी बात आ रहा बड़ा गुस्सा
Sun, 20 Jul 2025 12:09 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Sun, 20 Jul 2025 12:09 AM IST
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बिजनौर। बच्चे का गुस्सा नजरअंदाज करना उनकी सेहत पर असर डाल रहा है। बदलती सामाजिक संरचना, तकनीकी प्रगति और बढ़ते तनाव ने बच्चों और वयस्कों में गुस्से और उसे संभालने में असमर्थता जैसी समस्या को और गंभीर बना दिया है। लगातार छोटी-छोटी बातों पर बड़ा गुस्सा जीवन बर्बाद कर रहा है।
मेडिकल अस्पताल के मनकक्ष में रोजाना चार से पांच मरीज तक ऐसे पहुंच रहे हैं, जिन्हें छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ रहा है। गुस्से की वजह से वह अपनों को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। गुस्सा एक स्वाभाविक मानवीय भावना है, लेकिन उसे सही ढंग से व्यक्त करना आना चाहिए। इसे नकारने के बजाय समझना और संभालना सीखना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों और दफ्तरों को अब भावनात्मक साक्षरता, क्रोध प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श को प्राथमिकता देनी चाहिए। बच्चों को योग, ध्यान और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए ताकि, गुस्से की वजह से बढ़ रही घटनाओं को रोका जा सके।
केस नंबर एक
नूरपुर क्षेत्र में 10 वर्षीय बच्चे की गुस्से की वजह से स्कूल से बहुत शिकायत आती हैं। बच्चों के साथ लड़ाई, झगड़ा करता है। अपनी चीजें किसी के साथ साझा नहीं करता है। समस्या के हल के लिए परिजन बच्चे को लेकर मेडिकल अस्पताल पहुंचे।
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केस नंबर दो
बिजनौर निवासी दंपती मेडिकल अस्पताल में पहुंचा। पत्नी ने बताया कि उसके पति को गुस्सा बहुत आता है। वह फोन पर बात कर रही थी। पहली बार में उसने अपने पति का फोन नहीं उठाया। जिसके बाद उसके पति ने उसके साथ मारपीट कर दी
केस नंबर तीन
बिजनौर के एक मोहल्ला निवासी युवक की अभी हाल ही शादी हुई है। उसने अपनी पत्नी को ज्यादा फोन चलाने के लिए मना किया। इस बात पर वह भड़क गई और सभी के सामने झगड़ा करने लगी। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों में मारपीट हो गई।
इन वजहों से बढ़ रहा है गुस्सा
-तनावपूर्ण जीवनशैली और प्रतिस्पर्धा
-तकनीकी निर्भरता और सोशल मीडिया का प्रभाव
-पारिवारिक संवाद में कमी
-मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
-बचपन के आघात और अनुचित पालन-पोषण
ऐसे रखे ख्याल
-बच्चों को बैठाकर समझाएं
-उनकी बातों को सुने और समाधान तलाशें
-सोशल मीडिया से दूरी बनाएं
-कुछ भी समस्या होने पर परिवार के लोगों से बात करें
-संतुलित आहार लें
लोगों में बढ़ रहा अधिक उनकी निजी जिंदगी पर ही भारी पड़ रहा है। इन लोगों को हर जगह सामंजस्य बनाने में परेशानी होती है। पारिवारिक तालमेल बढ़ाकर गुस्से की प्रवृत्ति को समझा जा सकता है। गुस्से से परेशान काफी लोग मनकक्ष पहुंच रहे हैं।
आयुषी दीक्षित, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मेडिकल अस्पताल
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मेडिकल अस्पताल के मनकक्ष में रोजाना चार से पांच मरीज तक ऐसे पहुंच रहे हैं, जिन्हें छोटी-छोटी बातों पर गुस्सा आ रहा है। गुस्से की वजह से वह अपनों को ही नुकसान पहुंचा रहे हैं। गुस्सा एक स्वाभाविक मानवीय भावना है, लेकिन उसे सही ढंग से व्यक्त करना आना चाहिए। इसे नकारने के बजाय समझना और संभालना सीखना होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि स्कूलों और दफ्तरों को अब भावनात्मक साक्षरता, क्रोध प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य परामर्श को प्राथमिकता देनी चाहिए। बच्चों को योग, ध्यान और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाना चाहिए ताकि, गुस्से की वजह से बढ़ रही घटनाओं को रोका जा सके।
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केस नंबर एक
नूरपुर क्षेत्र में 10 वर्षीय बच्चे की गुस्से की वजह से स्कूल से बहुत शिकायत आती हैं। बच्चों के साथ लड़ाई, झगड़ा करता है। अपनी चीजें किसी के साथ साझा नहीं करता है। समस्या के हल के लिए परिजन बच्चे को लेकर मेडिकल अस्पताल पहुंचे।
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केस नंबर दो
बिजनौर निवासी दंपती मेडिकल अस्पताल में पहुंचा। पत्नी ने बताया कि उसके पति को गुस्सा बहुत आता है। वह फोन पर बात कर रही थी। पहली बार में उसने अपने पति का फोन नहीं उठाया। जिसके बाद उसके पति ने उसके साथ मारपीट कर दी
केस नंबर तीन
बिजनौर के एक मोहल्ला निवासी युवक की अभी हाल ही शादी हुई है। उसने अपनी पत्नी को ज्यादा फोन चलाने के लिए मना किया। इस बात पर वह भड़क गई और सभी के सामने झगड़ा करने लगी। बात इतनी बढ़ गई कि दोनों में मारपीट हो गई।
इन वजहों से बढ़ रहा है गुस्सा
-तनावपूर्ण जीवनशैली और प्रतिस्पर्धा
-तकनीकी निर्भरता और सोशल मीडिया का प्रभाव
-पारिवारिक संवाद में कमी
-मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की कमी
-बचपन के आघात और अनुचित पालन-पोषण
ऐसे रखे ख्याल
-बच्चों को बैठाकर समझाएं
-उनकी बातों को सुने और समाधान तलाशें
-सोशल मीडिया से दूरी बनाएं
-कुछ भी समस्या होने पर परिवार के लोगों से बात करें
-संतुलित आहार लें
लोगों में बढ़ रहा अधिक उनकी निजी जिंदगी पर ही भारी पड़ रहा है। इन लोगों को हर जगह सामंजस्य बनाने में परेशानी होती है। पारिवारिक तालमेल बढ़ाकर गुस्से की प्रवृत्ति को समझा जा सकता है। गुस्से से परेशान काफी लोग मनकक्ष पहुंच रहे हैं।
आयुषी दीक्षित, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मेडिकल अस्पताल