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55 वर्ष में सेवानिवृत्ति का विरोध

Sun, 13 Sep 2020 11:42 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 13 Sep 2020 11:42 PM IST
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Opposing retirement at 55
सुधीर कुमार। - फोटो : BIJNOR
55 वर्ष में सेवानिवृत्ति का विरोध
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बिजनौर। केंद्र सरकार के 30 वर्ष की सेवा पूरी करने व 55 वर्ष की आयु होने पर केंद्रीय कर्मचारी को सेवानिवृत्त करने के फरमान से कर्मचारियों में रोष है। सरकार के आदेश को कर्मचारी नेता काला कानून बता रहे हैं। कर्मचारी संगठनों ने कर्मचारियों का अहित करने वाले आदेश को तत्काल वापस लेने की मांग की है। कहा सरकार कर्मचारी हितों में पुरानी पेंशन व्यवस्था को लागू करे।
केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए आदेश से कर्मचारियों में हड़कंप मचा है। कर्मचारी संगठनों के पदाधिकारियों का कहना है कि 30 वर्ष की सेवा पूरी करने या 55 वर्ष की आयु पूरी होने पर जबरन सेवानिवृत्त होने की स्थिति में कर्मचारी अनावश्यक रूप से परेशान होंगे। सरकार ने ऐसा कानून लाकर उन्हें संकट में खड़ा कर दिया है। इस उम्र में कर्मचारी को सहारे की आवश्यकता होती है। ऐसे में सेवा समाप्त करना घोर अन्याय होगा। कर्मचारी संगठनों ने सरकार इस आदेश पर पुनर्विचार कर वापस लेने की मांग की है।
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राष्ट्रीय डाक कर्मचारी संघ के डिविजनल सेक्रेटरी अनुराग मेहरोत्रा ने बताया कि 30 वर्ष की सेवा पर सेवानिवृत्त करने का कानून काला कानून है। ऐसे कानून को सरकार को तुरंत वापस लेना चाहिए। जूनियर हाईस्कूल शिक्षक संघ के जिलाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि सरकार ने कर्मचारी विरोधी कानून बनाकर कर्मचारियों को संकट में खड़ा कर दिया है। इस कानून का पुरजोर विरोध किया जाएगा। यदि सरकार ने कानून वापस नहीं लिया तो केंद्रीय कर्मचारी संगठनों के साथ एकजुट होकर देश में बड़ा आंदोलन चलाया जाएगा।
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जूनियर हाई स्कूल शिक्षक संघ के जिला मंत्री ताज वीर सिंह देवरा ने बताया इस सरकार को कर्मचारियों के बुढ़ापे के हितों को भी ध्यान में रखना चाहिए था। सरकार ने पहले पुरानी पेंशन खत्म कर कर्मचारियों को मुसीबत में डाला है। अब 55 वर्ष की आयु में जबरन रिटायर करने का फरमान जारी कर दिया है। ऑल इंडिया एससी एसटी एंपलाइज एसोसिएशन उत्तर रेलवे के सहायक मंडल मंत्री मनुज प्रकाश ने बताया के रेलवे ने इस आदेश का पालन करने के लिए तैयारी शुरू की है। लेकिन रेलवे के कर्मचारी इसका विरोध कर रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से पुन: विचार करते हुए कर्मचारी विरोधी आदेश को वापस करने की मांग की है।

राजनेताओं के लिए भी बनें ऐसे कानून
प्राथमिक शिक्षक संघ के अध्यक्ष अरविंद चौधरी ने बताया कि यदि सरकार पुरानी पेंशन बहाल करती तो ज्यादा अच्छा होता। परंतु इसके विपरीत जाकर सरकार ने 55 वर्ष की आयु में कर्मचारियों को सेवानिवृत्त करने का आदेश दे दिया। यदि ऐसे कानून बनाए जा रहे हैं तो राजनेताओं के लिए भी कुछ ऐसे ही सरकार को मानक तय करने की जरूरत है। उत्तर प्रदेश प्रशिक्षण एवं सेवायोजन सेवा संगठन के प्रदेश संयुक्त मंत्री नीरज सिंह ने बताया कि केंद्र सरकार ने कर्मचारी विरोधी आदेश पास कर अपनी मंशा जाहिर कर दी है। अब सभी संगठनों को एकजुट होकर कर्मचारी विरोधी आदेश का विरोध करने की आवश्यकता है। यूपी एजुकेशनल मिनिस्ट्रियल ऑफिसर्स एसोसिएशन के जिला मंत्री क्रांति कुमार शर्मा ने बताया कि संकट की इस घड़ी में संगठन केंद्रीय कर्मचारियों के साथ हैं। यदि सरकार कानून को वापस नहीं करती तो इसका पुरजोर विरोध किया जाएगा।

मनुज प्रकाश।

मनुज प्रकाश।- फोटो : BIJNOR

अनुराग मेहरोत्रा।

अनुराग मेहरोत्रा।- फोटो : BIJNOR

ताजवीर सिंह देवरा।

ताजवीर सिंह देवरा।- फोटो : BIJNOR

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