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मैली मालन को निर्मल बनाने के लिए पहुंचे एक हजार भगीरथ
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मैली मालन को निर्मल बनाने के लिए पहुंचे एक हजार भगीरथ
बिजनौर। अमर उजाला का ‘मालन मांगे अविरल धारा’ अभियान मंगलवार को सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ गया। मालन के उद्धार के लिए मंगलवार सुबह मंडावर रोड पर स्थित नदी के पुल के नीचे फावड़े लेकर एक हजार से ज्यादा लोग पहुंच गए। भीड़ मानो यही कह रही हो, कि देखों मालन, तुम्हारे उद्धार को कितने भगीरथ आए हैं। हवन के बाद डीएम उमेश मिश्रा ने सबसे पहले फावड़ा चलाकर तसले में मिट्टी उठाकर बाहर डाली। इसके बाद वहां पहुंची सफाईकर्मियों, मनरेगा मजदूरों, ग्रामीणों ने मालन के किनारे पर खोदाई शुरू कर दी।
अब यह खोदाई अभियान मालन के जिले में प्रवेश स्थल हल्दूखाता से संगम स्थल रावली गंगा घाट तक चलाया जाएगा। प्रशासन ने मंगलवार से मालन के चौड़ीकरण के लिए अभियान की शुरूआत कर दी। मंगलवार सुबह करीब आठ बजे मंडावर के पास मालन नदी के पुल के नीचे पहले हवन किया गया, उसके बाद खोदाई का काम शुरू हुआ। डीएम उमेश मिश्रा, सीडीओ केपी सिंह, ब्लॉक प्रमुख के पिता उदयपाल सिंह समेत श्रमदान कर अभियान शुरू किया। इसके बाद मालन के दोनों ओर लोगों ने खोदाई शुरू कर दी।
- दुष्यंत और शकुंतला के प्रणय की साक्षी रही है मालन
मालन नदी राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रणय की साक्षी रही है। वहीं इसका महाभारत और कालीदास के संस्कृत महाकाव्य अभिज्ञान शाकुंतलन में जिक्र मिलता है। मालन के किनारों पर निकली मूर्तियां, शिवलिंग गवाही दे रही है कि इस नदी के किनारे समृद्ध सभ्यता बसती थी।
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53 किमी दूरी तय करने के बाद गंगा में मिलती है
-जिले में हल्दूखाता से रावली तक मालन की लंबाई 53 किलोमीटर है, जबकि धरातल पर मालन की धारा करीब 101 किलोमीटर की दूरी तय कर गंगा तक पहुंच रही है। अब खोदाई के बाद नाले का स्वरूप ले चुकी मालन नदी के स्वरूप में लौटेगी।
कोट
-मालन को पुराना स्वरूप लौटाने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। यह अभियान तब तक चलेगा, जब तक हल्दूखाता से रावली घाट तक मालन को उसका मूल स्वरूप नहीं लौटा देंगे। उमेश मिश्रा, जिलाधिकारी बिजनौर
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बिजनौर। अमर उजाला का ‘मालन मांगे अविरल धारा’ अभियान मंगलवार को सफलता की पहली सीढ़ी चढ़ गया। मालन के उद्धार के लिए मंगलवार सुबह मंडावर रोड पर स्थित नदी के पुल के नीचे फावड़े लेकर एक हजार से ज्यादा लोग पहुंच गए। भीड़ मानो यही कह रही हो, कि देखों मालन, तुम्हारे उद्धार को कितने भगीरथ आए हैं। हवन के बाद डीएम उमेश मिश्रा ने सबसे पहले फावड़ा चलाकर तसले में मिट्टी उठाकर बाहर डाली। इसके बाद वहां पहुंची सफाईकर्मियों, मनरेगा मजदूरों, ग्रामीणों ने मालन के किनारे पर खोदाई शुरू कर दी।
अब यह खोदाई अभियान मालन के जिले में प्रवेश स्थल हल्दूखाता से संगम स्थल रावली गंगा घाट तक चलाया जाएगा। प्रशासन ने मंगलवार से मालन के चौड़ीकरण के लिए अभियान की शुरूआत कर दी। मंगलवार सुबह करीब आठ बजे मंडावर के पास मालन नदी के पुल के नीचे पहले हवन किया गया, उसके बाद खोदाई का काम शुरू हुआ। डीएम उमेश मिश्रा, सीडीओ केपी सिंह, ब्लॉक प्रमुख के पिता उदयपाल सिंह समेत श्रमदान कर अभियान शुरू किया। इसके बाद मालन के दोनों ओर लोगों ने खोदाई शुरू कर दी।
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- दुष्यंत और शकुंतला के प्रणय की साक्षी रही है मालन
मालन नदी राजा दुष्यंत और शकुंतला के प्रणय की साक्षी रही है। वहीं इसका महाभारत और कालीदास के संस्कृत महाकाव्य अभिज्ञान शाकुंतलन में जिक्र मिलता है। मालन के किनारों पर निकली मूर्तियां, शिवलिंग गवाही दे रही है कि इस नदी के किनारे समृद्ध सभ्यता बसती थी।
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53 किमी दूरी तय करने के बाद गंगा में मिलती है
-जिले में हल्दूखाता से रावली तक मालन की लंबाई 53 किलोमीटर है, जबकि धरातल पर मालन की धारा करीब 101 किलोमीटर की दूरी तय कर गंगा तक पहुंच रही है। अब खोदाई के बाद नाले का स्वरूप ले चुकी मालन नदी के स्वरूप में लौटेगी।
कोट
-मालन को पुराना स्वरूप लौटाने की पूरी रूपरेखा तैयार कर ली गई है। यह अभियान तब तक चलेगा, जब तक हल्दूखाता से रावली घाट तक मालन को उसका मूल स्वरूप नहीं लौटा देंगे। उमेश मिश्रा, जिलाधिकारी बिजनौर

बिजनौर-मंडावर रोड़ पर मालन नदी के पुल के पास मालन नदी के चौड़ीकरण के शुभारंभ पर हवन में आहुति देते - फोटो : BIJNOR

बिजनौर-मंडावर रोड़ पर मालन नदी के पुल के पास मालन नदी के चौड़ीकरण के शुभारंभ पर हवन में मंत्र पढ़त?- फोटो : BIJNOR