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गंगा के आगे अफसर लाचार, फिलहाल ‘कोफर डेम’ ही समाधान
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गंगा के आगे अफसर लाचार, फिलहाल ‘कॉफर डेम’ ही समाधान
चांदपुर/जलीलपुर (बिजनौर)। जलीलपुर और हस्तिनापुर के बीच गंगा नदी पर बने पुल की अप्रोच सड़क को फिर से बनाने का काम रुक गया है। गंगा में उफान के चलते दूसरे दिन भी काम बंद रहा। लोक निर्माण विभाग के अफसर गंगा की धार के सामने लाचार होकर पानी में बही सड़क के निकट से पत्थर आदि दूर ले जाकर जमा कर रहे हैं। वहीं, बुधवार को रुड़की से पहुंचे तकनीकी विशेषज्ञ और लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने निरीक्षण कर कार्य योजना पर विचार किया। आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर एमएल कंसल ने अस्थायी तौर पर ‘कॉफर डेम’ बनाकर पानी रोकने का सुझाव दिया। इसमें बांस और बल्लियों का ढांचा बनाकर पानी का बहाव रोका जाएगा।
चांदपुर से मेरठ और दिल्ली जाने के लिए जलीलपुर व हस्तिनापुर के बीच गंगा नदी पर बने पुल की अप्रोच सड़क का पानी में बह चुका हिस्सा जल्दी ठीक होता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को पुल के अंतिम पिलर के निकट अप्रोच सड़क का कुछ हिस्सा धंस गया था, तब से इस पुल से यातायात बंद है। रविवार को लोक निर्माण विभाग मेरठ ने सड़क को दुरुस्त करने के लिए अपस्ट्रीम में बल्ली व मिट्टी भरे बोरे लगाकर पानी की धार को रोकने का प्रयास शुरू किया। सोमवार को पुल के डाउन स्ट्रीम में कटान रोकने का काम चला, लेकिन शाम को गंगा में उफान के चलते धार रोकने वाले इंतजाम पानी में बह गए। गंगा के विकराल रूप के आगे दो दिन से सड़क को सुधारने का काम बंद है। पुल की अप्रोच सड़क कट कर गंगा में बहने वाले स्थान पर कटान जारी है। पुल से सड़क के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। लगातार सड़क गंगा की धार के साथ बहकर जा रही है, जिसको देखते हुए जेसीबी मशीन से सड़क को उखाड़कर उसके पत्थर आदि दूर ले जाकर जमा किए जा रहे हैं। अफसरों को कटान और बढ़ने की आशंका है।
गाइड बंध से होगा स्थायी समाधान
बेकाबू गंगा की धार और अपेक्षित सफलता न मिलती देख लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने बुधवार को रुड़की से आए तकनीकी विशेषज्ञों के साथ कार्य योजना पर विचार किया। प्रोफेसर एमएल कंसल ने अस्थाई ‘कॉफर डेम’ बनाकर पानी रोकने का सुझाव दिया। अधिशासी अभियंता एसके सारस्वत ने बताया कि सभी तकनीकी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है, जल्द ही सड़क को ठीक कर लिया जाएगा। सड़क उखाड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा मजबूत बेस बनाने के लिए काम किया जा रहा है। आईआईटी रुड़की के तकनीकी विशेषज्ञ एमएल कंसल ने अमर उजाला से बातचीत में कहा पुल व सड़क को सुरक्षित रखने के लिए गाइड बंध बनाना जरूरी है, अन्यथा समस्याएं आती रहेंगी। अभी पानी का बहाव सड़क बहने वाले छोर पर है। यदि दूसरे छोर पर कटान होने लगा तब उधर भी समस्या आ सकती है, इसलिए गाइड बंध बेहद जरूरी है।
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ऐसे बनाया जाता है गाइड बंध
ऐसी कोई जगह जहां नदी प्रवाह फैला हुआ होता है यानी पानी कहीं भी मुड़ सकता है, ऐसी जगहों पर बहाव को नियंत्रित करने के लिए तटबंध या गाइड बंध बनाए जाते हैं। गाइड बंध नदी को प्रवाह के लिए गाइड करता है। जिससे बहाव को बांधकर एक निश्चित स्थान से ही पानी को ले जाया सके। अक्सर सड़क को पानी के कटान से बचाने के लिए पत्थरों की एक दीवार खड़ी कर दी जाती है। इन पत्थरों के पीछे मिट्टी का ढेर होता है। तेज बहाव में पानी गाइड बंध से टकराकर निर्धारित जगह से बहता हुआ निकल जाता है। पानी की तेज धार भी इससे टकराकर मंद पड़ जाती है और सड़क या पुल को नुकसान भी नहीं पहुंचता।
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चांदपुर/जलीलपुर (बिजनौर)। जलीलपुर और हस्तिनापुर के बीच गंगा नदी पर बने पुल की अप्रोच सड़क को फिर से बनाने का काम रुक गया है। गंगा में उफान के चलते दूसरे दिन भी काम बंद रहा। लोक निर्माण विभाग के अफसर गंगा की धार के सामने लाचार होकर पानी में बही सड़क के निकट से पत्थर आदि दूर ले जाकर जमा कर रहे हैं। वहीं, बुधवार को रुड़की से पहुंचे तकनीकी विशेषज्ञ और लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने निरीक्षण कर कार्य योजना पर विचार किया। आईआईटी रुड़की के प्रोफेसर एमएल कंसल ने अस्थायी तौर पर ‘कॉफर डेम’ बनाकर पानी रोकने का सुझाव दिया। इसमें बांस और बल्लियों का ढांचा बनाकर पानी का बहाव रोका जाएगा।
चांदपुर से मेरठ और दिल्ली जाने के लिए जलीलपुर व हस्तिनापुर के बीच गंगा नदी पर बने पुल की अप्रोच सड़क का पानी में बह चुका हिस्सा जल्दी ठीक होता नजर नहीं आ रहा है। शनिवार को पुल के अंतिम पिलर के निकट अप्रोच सड़क का कुछ हिस्सा धंस गया था, तब से इस पुल से यातायात बंद है। रविवार को लोक निर्माण विभाग मेरठ ने सड़क को दुरुस्त करने के लिए अपस्ट्रीम में बल्ली व मिट्टी भरे बोरे लगाकर पानी की धार को रोकने का प्रयास शुरू किया। सोमवार को पुल के डाउन स्ट्रीम में कटान रोकने का काम चला, लेकिन शाम को गंगा में उफान के चलते धार रोकने वाले इंतजाम पानी में बह गए। गंगा के विकराल रूप के आगे दो दिन से सड़क को सुधारने का काम बंद है। पुल की अप्रोच सड़क कट कर गंगा में बहने वाले स्थान पर कटान जारी है। पुल से सड़क के बीच दूरी बढ़ती जा रही है। लगातार सड़क गंगा की धार के साथ बहकर जा रही है, जिसको देखते हुए जेसीबी मशीन से सड़क को उखाड़कर उसके पत्थर आदि दूर ले जाकर जमा किए जा रहे हैं। अफसरों को कटान और बढ़ने की आशंका है।
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गाइड बंध से होगा स्थायी समाधान
बेकाबू गंगा की धार और अपेक्षित सफलता न मिलती देख लोक निर्माण विभाग के अफसरों ने बुधवार को रुड़की से आए तकनीकी विशेषज्ञों के साथ कार्य योजना पर विचार किया। प्रोफेसर एमएल कंसल ने अस्थाई ‘कॉफर डेम’ बनाकर पानी रोकने का सुझाव दिया। अधिशासी अभियंता एसके सारस्वत ने बताया कि सभी तकनीकी पहलुओं पर विचार किया जा रहा है, जल्द ही सड़क को ठीक कर लिया जाएगा। सड़क उखाड़ने के सवाल पर उन्होंने कहा मजबूत बेस बनाने के लिए काम किया जा रहा है। आईआईटी रुड़की के तकनीकी विशेषज्ञ एमएल कंसल ने अमर उजाला से बातचीत में कहा पुल व सड़क को सुरक्षित रखने के लिए गाइड बंध बनाना जरूरी है, अन्यथा समस्याएं आती रहेंगी। अभी पानी का बहाव सड़क बहने वाले छोर पर है। यदि दूसरे छोर पर कटान होने लगा तब उधर भी समस्या आ सकती है, इसलिए गाइड बंध बेहद जरूरी है।
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ऐसे बनाया जाता है गाइड बंध
ऐसी कोई जगह जहां नदी प्रवाह फैला हुआ होता है यानी पानी कहीं भी मुड़ सकता है, ऐसी जगहों पर बहाव को नियंत्रित करने के लिए तटबंध या गाइड बंध बनाए जाते हैं। गाइड बंध नदी को प्रवाह के लिए गाइड करता है। जिससे बहाव को बांधकर एक निश्चित स्थान से ही पानी को ले जाया सके। अक्सर सड़क को पानी के कटान से बचाने के लिए पत्थरों की एक दीवार खड़ी कर दी जाती है। इन पत्थरों के पीछे मिट्टी का ढेर होता है। तेज बहाव में पानी गाइड बंध से टकराकर निर्धारित जगह से बहता हुआ निकल जाता है। पानी की तेज धार भी इससे टकराकर मंद पड़ जाती है और सड़क या पुल को नुकसान भी नहीं पहुंचता।