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Bijnor News: अमानगढ़ रेंज के 152 वन गुर्जरों को नोटिस जारी
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- वन विभाग ने मांगे अमानगढ़ में रहने के वैध कागजात
-वन गुर्जरों के पुनर्वास अभियान का पहला चरण शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
अफजलगढ़। वन विभाग ने अमानगढ़ वन क्षेत्र में रह रहे वन गुर्जरों को एक सप्ताह पूर्व नोटिस जारी करते हुए उनसे रेंज में अध्यासन के संबंध में आवश्यक वैध अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा है। इस संबंध में वन गुर्जरों की ओर से कोई कागजात न उपलब्ध कराए जाने पर विभाग की ओर से बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। नोटिस मिलने से अमानगढ़ वन रेंज में प्रवास कर गुर्जरों में हड़कंप मचा हैं।
वर्ष 2012 में अमानगढ़ रेंज को कार्बेट नेशनल पार्क का बफर जोन बाघ आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया था। अमानगढ़ वन क्षेत्र में हिन्दुस्तान- पाकिस्तान के बंटवारे के दशकों पहले से कश्मीर सहित अविभाजित उत्तर प्रदेश के उत्तराखंड राज्य के काफी लोग अपने पशुओं को लेकर अमानगढ़ रेंज में आ बसे थें। पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा व पानी उपलब्ध होने के कारण सैकड़ों की संख्या में यह लोग अमानगढ़ में बस गए थें, जिन्हें स्थानीय भाषा में वन गुर्जर कहा जाने लगा।
अमानगढ़ रेंज के कंपार्टमेंट कोठीरो, नबीगढ़, ढ़ेरी, मकौनिया, खत्ता, केहरीपुर बीट में लगभग दो सौ से अधिक वन गुर्जरों के परिवार निवास करतें हैं, जो सिर्फ पशुपालन कर दुग्ध व्यापार पर ही निर्भर हैं। वन गुर्जरों का कहना हैं कि विभाग की ओर से की गई। इस कार्रवाई से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
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वहीं अमानगढ़ वन रेंज अधिकारी खुशबू उपाध्याय के अनुसार करीब 152 वन गुर्जरों को नोटिस देकर आवश्यक कागजात जैसे परमिट, चराई रसीद आदि अभिलेख लेकर डीएफओ आफ़िस में उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया गया हैं। वन गुर्जरों से अध्यासन के संबंध में अभिलेख जमा करने के पश्चात उनका रिकार्ड डीएम को भेजा जाएगा।
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-वन गुर्जरों के पुनर्वास अभियान का पहला चरण शुरू
संवाद न्यूज एजेंसी
अफजलगढ़। वन विभाग ने अमानगढ़ वन क्षेत्र में रह रहे वन गुर्जरों को एक सप्ताह पूर्व नोटिस जारी करते हुए उनसे रेंज में अध्यासन के संबंध में आवश्यक वैध अभिलेख प्रस्तुत करने को कहा है। इस संबंध में वन गुर्जरों की ओर से कोई कागजात न उपलब्ध कराए जाने पर विभाग की ओर से बेदखली की कार्रवाई की जाएगी। नोटिस मिलने से अमानगढ़ वन रेंज में प्रवास कर गुर्जरों में हड़कंप मचा हैं।
वर्ष 2012 में अमानगढ़ रेंज को कार्बेट नेशनल पार्क का बफर जोन बाघ आरक्षित वन क्षेत्र घोषित किया गया था। अमानगढ़ वन क्षेत्र में हिन्दुस्तान- पाकिस्तान के बंटवारे के दशकों पहले से कश्मीर सहित अविभाजित उत्तर प्रदेश के उत्तराखंड राज्य के काफी लोग अपने पशुओं को लेकर अमानगढ़ रेंज में आ बसे थें। पशुओं के लिए पर्याप्त मात्रा में चारा व पानी उपलब्ध होने के कारण सैकड़ों की संख्या में यह लोग अमानगढ़ में बस गए थें, जिन्हें स्थानीय भाषा में वन गुर्जर कहा जाने लगा।
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अमानगढ़ रेंज के कंपार्टमेंट कोठीरो, नबीगढ़, ढ़ेरी, मकौनिया, खत्ता, केहरीपुर बीट में लगभग दो सौ से अधिक वन गुर्जरों के परिवार निवास करतें हैं, जो सिर्फ पशुपालन कर दुग्ध व्यापार पर ही निर्भर हैं। वन गुर्जरों का कहना हैं कि विभाग की ओर से की गई। इस कार्रवाई से उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो जाएगा।
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वहीं अमानगढ़ वन रेंज अधिकारी खुशबू उपाध्याय के अनुसार करीब 152 वन गुर्जरों को नोटिस देकर आवश्यक कागजात जैसे परमिट, चराई रसीद आदि अभिलेख लेकर डीएफओ आफ़िस में उपस्थित होने के लिए निर्देशित किया गया हैं। वन गुर्जरों से अध्यासन के संबंध में अभिलेख जमा करने के पश्चात उनका रिकार्ड डीएम को भेजा जाएगा।