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सेवामित्र एप पर एक भी पंजीकरण नहीं
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सेवामित्र एप पर एक भी पंजीकरण नहीं
बिजनौर। कोरोना काल से बेरोजगार हुए लोगों को रोजगार देने के लिए शुरू किए गए सेवामित्र पोर्टल पर अब तक एक भी पंजीकरण नहीं हुआ है। शासन ने मजदूूरों के बजाए ठेकेदारों का पंजीकरण तो करा दिया लेकिन शर्तें कठोर कर दीं। जिले में ऐसे ठेकेदार नहीं हैं जो इतने लोगों को अपने साथ रखते हों। शर्तों की वजह से किसी भी ठेकेदार ने पंजीकरण नहीं कराया है। सेवायोजन विभाग के अफसर अब खुद ही ऐसे ठेकेदारों की तलाश कर रहे हैं।
समय-समय पर जनता की काम की जरूरत बदलती रहती हैं। कभी घर में प्लंबर, कभी बाइक मैकेनिक, कभी मिस्त्री, कभी कार क्लीनर की जरूरत होती है। अगर घर के मालिक मजदूर के पास जाते हैं तो कभी मजदूर मिल नहीं पाता है और कभी उसे फुर्सत नहीं होती है। जबकि बाकी कई जगह इन कामों के मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पाता है। जनता को घर पर ही इन सेवाओं से उपलब्ध कराने और रोजगार दिलाने के लिए सेवामित्र पोर्टल शुरू किया गया था। इस पर मजदूरों का पंजीकरण होना था।
कोरोना काल में बेरोजगार हुए जिले के 16500 प्रवासी श्रमिकों का डाटा इस पोर्टल पर डालने की तैयारी की जा रही थी। लेकिन इन श्रमिकों का पुलिस सत्यापन कराना भी चुनौती था। इस वजह से बाद में श्रमिकों के बजाए ठेकेदारों के पंजीकरण कराने का आदेश जारी किया गया। ठेकेदारों के पास काफी श्रमिक रहते हैं और उनकी जानकारी भी। लेकिन ठेकेदारों के पंजीकरण में भी नियम और शर्त लागू कर दी गईं। इन नियमों के फेर में फंसने की वजह से अब तक किसी भी ठेकेदार ने पंजीकरण नहीं कराया है। पंजीकरण कराने के लिए ठेकेदारों के लिए हालांकि चार श्रेणी लागू की गई हैं। एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इतनी शर्तों को जिले का शायद ही कोई ठेकेदार पूरी कर सके। वहीं, जिला सेवायोजन अधिकारी विशाल राठी के अनुसार योजना पर काम चल रहा है। सेवा उपलब्ध कराने वालों का डाटा एकत्र करके योजना से जोड़ा जा रहा है।
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प्रथम श्रेणी
- 25 लाख का वार्षिक टर्नओवर हो।
- जीएसटी में पंजीकृत हो।
- तीन वर्ष का आईटीआर फाइल हो।
- 30 कर्मचारी पे रोल पर हों।
- ऑन बोर्ड फीस दस हजार रुपये भुगतान करने पर सहमत हो।
द्वितीय श्रेणी
- 15 लाख का वार्षिक टर्नओवर हो।
- जीएसटी में पंजीकृत हो।
- दो वर्ष का आईटीआर फाइल हो।
- 15 कर्मचारी पेरोल पर हों।
- ऑन बोर्ड फीस दस हजार रुपये भुगतान करने पर सहमत हो।
तृतीय श्रेणी
- पांच लाख का वार्षिक टर्नओवर हो।
- जीएसटी में पंजीकृत हो।
- एक वर्ष का आईटीआर फाइल हो।
- दस कर्मचारी पेरोल पर हों।
- ऑन बोर्ड फीस दस हजार रुपये भुगतान करने पर सहमत हो।
चतुर्थ श्रेणी
- जीएसटी में पंजीकृत हो।
- आईटीआर फाइल करता हो।
- स्टार्टअप में पंजीकृत हो।
ये मिल सकती हैं सुविधाएं
ब्यूटीशियन, कार क्लीनिंग, कारपेंटर, कुकिंग, इलैक्ट्रिशियन, इलैक्ट्रोनिक्स सर्विस एंड रिपेयर, होम पेंटिंग, हाउस क्लीनिंग, हाउस हेल्प, मसाज, प्लंबर, रनर, कीट नियंत्रण आदि।
साल पंजीकरण मिले रोजगार
2012 37684 --
2013 94975 --
2014 97470 --
2015 97752 124
2016 41296 256
2017 24500 272
2018 23579 789
2019 36302 1268
2020 40540 1545
नोट : आंकड़े सेवायोजन विभाग से लिए गए हैं। रोजगार मेले 2015 से लगने शुरू हुए हैं।
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बिजनौर। कोरोना काल से बेरोजगार हुए लोगों को रोजगार देने के लिए शुरू किए गए सेवामित्र पोर्टल पर अब तक एक भी पंजीकरण नहीं हुआ है। शासन ने मजदूूरों के बजाए ठेकेदारों का पंजीकरण तो करा दिया लेकिन शर्तें कठोर कर दीं। जिले में ऐसे ठेकेदार नहीं हैं जो इतने लोगों को अपने साथ रखते हों। शर्तों की वजह से किसी भी ठेकेदार ने पंजीकरण नहीं कराया है। सेवायोजन विभाग के अफसर अब खुद ही ऐसे ठेकेदारों की तलाश कर रहे हैं।
समय-समय पर जनता की काम की जरूरत बदलती रहती हैं। कभी घर में प्लंबर, कभी बाइक मैकेनिक, कभी मिस्त्री, कभी कार क्लीनर की जरूरत होती है। अगर घर के मालिक मजदूर के पास जाते हैं तो कभी मजदूर मिल नहीं पाता है और कभी उसे फुर्सत नहीं होती है। जबकि बाकी कई जगह इन कामों के मजदूरों को रोजगार नहीं मिल पाता है। जनता को घर पर ही इन सेवाओं से उपलब्ध कराने और रोजगार दिलाने के लिए सेवामित्र पोर्टल शुरू किया गया था। इस पर मजदूरों का पंजीकरण होना था।
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कोरोना काल में बेरोजगार हुए जिले के 16500 प्रवासी श्रमिकों का डाटा इस पोर्टल पर डालने की तैयारी की जा रही थी। लेकिन इन श्रमिकों का पुलिस सत्यापन कराना भी चुनौती था। इस वजह से बाद में श्रमिकों के बजाए ठेकेदारों के पंजीकरण कराने का आदेश जारी किया गया। ठेकेदारों के पास काफी श्रमिक रहते हैं और उनकी जानकारी भी। लेकिन ठेकेदारों के पंजीकरण में भी नियम और शर्त लागू कर दी गईं। इन नियमों के फेर में फंसने की वजह से अब तक किसी भी ठेकेदार ने पंजीकरण नहीं कराया है। पंजीकरण कराने के लिए ठेकेदारों के लिए हालांकि चार श्रेणी लागू की गई हैं। एक ठेकेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि इतनी शर्तों को जिले का शायद ही कोई ठेकेदार पूरी कर सके। वहीं, जिला सेवायोजन अधिकारी विशाल राठी के अनुसार योजना पर काम चल रहा है। सेवा उपलब्ध कराने वालों का डाटा एकत्र करके योजना से जोड़ा जा रहा है।
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प्रथम श्रेणी
- 25 लाख का वार्षिक टर्नओवर हो।
- जीएसटी में पंजीकृत हो।
- तीन वर्ष का आईटीआर फाइल हो।
- 30 कर्मचारी पे रोल पर हों।
- ऑन बोर्ड फीस दस हजार रुपये भुगतान करने पर सहमत हो।
द्वितीय श्रेणी
- 15 लाख का वार्षिक टर्नओवर हो।
- जीएसटी में पंजीकृत हो।
- दो वर्ष का आईटीआर फाइल हो।
- 15 कर्मचारी पेरोल पर हों।
- ऑन बोर्ड फीस दस हजार रुपये भुगतान करने पर सहमत हो।
तृतीय श्रेणी
- पांच लाख का वार्षिक टर्नओवर हो।
- जीएसटी में पंजीकृत हो।
- एक वर्ष का आईटीआर फाइल हो।
- दस कर्मचारी पेरोल पर हों।
- ऑन बोर्ड फीस दस हजार रुपये भुगतान करने पर सहमत हो।
चतुर्थ श्रेणी
- जीएसटी में पंजीकृत हो।
- आईटीआर फाइल करता हो।
- स्टार्टअप में पंजीकृत हो।
ये मिल सकती हैं सुविधाएं
ब्यूटीशियन, कार क्लीनिंग, कारपेंटर, कुकिंग, इलैक्ट्रिशियन, इलैक्ट्रोनिक्स सर्विस एंड रिपेयर, होम पेंटिंग, हाउस क्लीनिंग, हाउस हेल्प, मसाज, प्लंबर, रनर, कीट नियंत्रण आदि।
साल पंजीकरण मिले रोजगार
2012 37684 --
2013 94975 --
2014 97470 --
2015 97752 124
2016 41296 256
2017 24500 272
2018 23579 789
2019 36302 1268
2020 40540 1545
नोट : आंकड़े सेवायोजन विभाग से लिए गए हैं। रोजगार मेले 2015 से लगने शुरू हुए हैं।