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नई प्रजाति करेगी किसानों को मालामाल
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नगीना के कृषि अनुसंधान केंद्र में खड़ी डीबीडब्लू-187 प्रजाति के गेंहू की फसल।
- फोटो : BIJNOR
नई प्रजाति करेगी किसानों को मालामाल
बिजनौर। किसानों की आमदनी फसलों के मूल्य या फसलों का उत्पादन दोनों को थोड़ा बढ़ावा देने से ही बढ़ेगी। इसके लिए केंद्र व प्रदेश सरकार पूरे प्रयास कर रही है। फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को उन्नत प्रजाति के बीज दिए जा रहे हैं। किसानों को अगले साल डीबीडब्लू 187, एचडी 3226 प्रजाति का बीज दिया जाएगा। इस बीज से गेहूं का उत्पादन लगभग दोगुना होगा और भूसा भी ज्यादा मिलेगा।
जिले में गन्ने के बाद गेहूं सबसे ज्यादा रकबे में बोई जाने वाली फसल है। जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेअर जमीन में गेहूं की खेती की जाती है। इतने अधिक रकबे में बोए जाने के बाद भी किसान गेहूं की फसल को मजबूरी का सौदा ही मानते हैं। गेहूं की फसल की पैदावार बहुत कम होती है। गन्ने, धान, फल, सब्जी आदि की तो उन्नत प्रजाति आने लगी हैं, गेहूं की फसल पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया था। लेकिन अब गेहूं की फसल की उन्नत प्रजाति किसानों के बीच लाने की पूरी तैयारी की जा रही है।
गेहूं शोध निदेशालय करनाल द्वारा गेहूं की प्रजाति राज डीबीडब्लू 187, एचडी 3226 का बीज किसानों को देने की तैयारी की जा रही है। यह प्रजाति 84 क्विंटल प्रति हेक्टेअर तक का उत्पादन देगी। सामान्य तौर पर जिले में प्रति बीघा गेहूं का औसत उत्पादन तीन क्विंटल तक रहता है। डीबीडब्लू प्रजाति प्रति बीघा में करीब सात क्विंटल तक का उत्पादन देगी। इस प्रजाति का उत्पादन बाकी प्रजातियों से लगभग दोगुना होगा। इस साल कृषि अनुसंधान केंद्र में इसका बीज बोया गया है। कुछ किसानों को भी यह बीज दिया गया है। अगले साल यह बीज किसानों को वितरित किया जाएगा।
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खेत में गेहूं का उत्पादन जितना होता है, भूसा भी गेहूं की वजन के बराबर ही निकलता है। गेहूं का उत्पादन बढ़ने से भूसे का उत्पादन भी बढ़ेगा। किसानों को इससे दोहरा फायदा होगा। जिले में दोनों प्रजाति का बीज करीब पांच बीघा जमीन में बोया गया है। अगर गेहूं छह क्विंटल प्रति बीघा भी निकला तो 30 क्विंटल गेहूं निकलेगा। 30 क्विंटल बीज अगले साल करीब 35 बीघा जमीन में बोया जाएगा। दो ही साल में यह प्रजाति पूरे जिले के किसानों तक पहुंच सकती है। कृषि अनुसंधान केंद्र नगीना के इंचार्ज डॉ. डीपी सिंह के अनुसार किसानों को गेहूं का नया बीज अगले साल मिल पाएगा। अभी खेतों में इसकी उपज बढ़ाई जा रही है।
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बिजनौर। किसानों की आमदनी फसलों के मूल्य या फसलों का उत्पादन दोनों को थोड़ा बढ़ावा देने से ही बढ़ेगी। इसके लिए केंद्र व प्रदेश सरकार पूरे प्रयास कर रही है। फसलों का उत्पादन बढ़ाने के लिए किसानों को उन्नत प्रजाति के बीज दिए जा रहे हैं। किसानों को अगले साल डीबीडब्लू 187, एचडी 3226 प्रजाति का बीज दिया जाएगा। इस बीज से गेहूं का उत्पादन लगभग दोगुना होगा और भूसा भी ज्यादा मिलेगा।
जिले में गन्ने के बाद गेहूं सबसे ज्यादा रकबे में बोई जाने वाली फसल है। जिले में करीब डेढ़ लाख हेक्टेअर जमीन में गेहूं की खेती की जाती है। इतने अधिक रकबे में बोए जाने के बाद भी किसान गेहूं की फसल को मजबूरी का सौदा ही मानते हैं। गेहूं की फसल की पैदावार बहुत कम होती है। गन्ने, धान, फल, सब्जी आदि की तो उन्नत प्रजाति आने लगी हैं, गेहूं की फसल पर अब तक कोई ध्यान नहीं दिया गया था। लेकिन अब गेहूं की फसल की उन्नत प्रजाति किसानों के बीच लाने की पूरी तैयारी की जा रही है।
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गेहूं शोध निदेशालय करनाल द्वारा गेहूं की प्रजाति राज डीबीडब्लू 187, एचडी 3226 का बीज किसानों को देने की तैयारी की जा रही है। यह प्रजाति 84 क्विंटल प्रति हेक्टेअर तक का उत्पादन देगी। सामान्य तौर पर जिले में प्रति बीघा गेहूं का औसत उत्पादन तीन क्विंटल तक रहता है। डीबीडब्लू प्रजाति प्रति बीघा में करीब सात क्विंटल तक का उत्पादन देगी। इस प्रजाति का उत्पादन बाकी प्रजातियों से लगभग दोगुना होगा। इस साल कृषि अनुसंधान केंद्र में इसका बीज बोया गया है। कुछ किसानों को भी यह बीज दिया गया है। अगले साल यह बीज किसानों को वितरित किया जाएगा।
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खेत में गेहूं का उत्पादन जितना होता है, भूसा भी गेहूं की वजन के बराबर ही निकलता है। गेहूं का उत्पादन बढ़ने से भूसे का उत्पादन भी बढ़ेगा। किसानों को इससे दोहरा फायदा होगा। जिले में दोनों प्रजाति का बीज करीब पांच बीघा जमीन में बोया गया है। अगर गेहूं छह क्विंटल प्रति बीघा भी निकला तो 30 क्विंटल गेहूं निकलेगा। 30 क्विंटल बीज अगले साल करीब 35 बीघा जमीन में बोया जाएगा। दो ही साल में यह प्रजाति पूरे जिले के किसानों तक पहुंच सकती है। कृषि अनुसंधान केंद्र नगीना के इंचार्ज डॉ. डीपी सिंह के अनुसार किसानों को गेहूं का नया बीज अगले साल मिल पाएगा। अभी खेतों में इसकी उपज बढ़ाई जा रही है।