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पुरानी परंपराओं के साथ नए सृजन भी जरूरी
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पुरानी परंपराओं के साथ नए सृजन भी जरूरी
धामपुर। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से नाट्यदीप फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव व सांस्कृतिक सेमिनार शुक्रवार से निरामय योग चिकित्सा तथा राष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ शुरू हुई। सेमिनार का मुद्दा ‘भारत की संस्कृति पर सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक प्रभाव, मुद्दे एवं चुनौतियां’ रहा।
एसबीडी कॉलेज में संपन्न हुए कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था सचिव डॉ. राजेंद्र चौधरी ने जगद्गुरु बाबा नटराज के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मनोज गिरि ने पित्त, कफ, वात को योग क्रियाओं से नियंत्रित करना सिखाया। संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार की योग छात्रा लता विष्ट के योग प्रदर्शन ने प्रतिभागियों को अत्यधिक आकर्षित किया। इस अवसर पर डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. अमित गिरि, नितेश, नगमा, अब्दुल मुत्तलिब, जतिन गिरि, मनस्वी, सहित 75 प्रतिभागी शामिल हुए। राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि विजय कुमार अग्रवाल, मुख्या वक्ता डॉ. शंकर लाल शर्मा, डॉ, पूनम चौहान, डॉ. विजयपाल सिंह ने भारत संस्कृति को एक जीवित संस्कृत बताया। उन्होंने कहा हमें पुरानी परंपराओं के साथ नए संस्कृति-सृजन के उपायों को अपनाना होगा। हमें संस्कृति का परिमार्जन कर परिवर्धन के आयामों को सुनिश्चित करना होगा। कार्यक्रम में मनीषा, नितेश, अफरीन, नगमा, सना, अब्दुल, रूबी, सुमित, मनीष, प्रह्लाद, अखिलेश, सचिन, अभिषेक, ओमेंद्र, दुर्गेश, कहकशा, तुली, मुजल्फा, पूजा, महविश, क्रिशंपल सिंह, आशुतोष, रफिया, अक्ष, गुलिस्ता, मधु, आदित्य, अमित, जतिन, स्नेह, लता, आकाश, मनस्वी, राजीव, रिया, अवनि, अखी, मजहबी, मंताषा, राजवीर सिंह माथुर का योगदान रहा। संचालन डॉ. राजेंद्र चौधरी ने किया।
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धामपुर। संस्कृति मंत्रालय, भारत सरकार के सहयोग से नाट्यदीप फाउंडेशन की ओर से राष्ट्रीय नाट्य महोत्सव व सांस्कृतिक सेमिनार शुक्रवार से निरामय योग चिकित्सा तथा राष्ट्रीय संगोष्ठी के साथ शुरू हुई। सेमिनार का मुद्दा ‘भारत की संस्कृति पर सामाजिक, आर्थिक व राजनीतिक प्रभाव, मुद्दे एवं चुनौतियां’ रहा।
एसबीडी कॉलेज में संपन्न हुए कार्यक्रम का शुभारंभ संस्था सचिव डॉ. राजेंद्र चौधरी ने जगद्गुरु बाबा नटराज के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। मनोज गिरि ने पित्त, कफ, वात को योग क्रियाओं से नियंत्रित करना सिखाया। संस्कृत महाविद्यालय हरिद्वार की योग छात्रा लता विष्ट के योग प्रदर्शन ने प्रतिभागियों को अत्यधिक आकर्षित किया। इस अवसर पर डॉ. अनिल शर्मा, डॉ. अमित गिरि, नितेश, नगमा, अब्दुल मुत्तलिब, जतिन गिरि, मनस्वी, सहित 75 प्रतिभागी शामिल हुए। राष्ट्रीय संगोष्ठी में मुख्य अतिथि विजय कुमार अग्रवाल, मुख्या वक्ता डॉ. शंकर लाल शर्मा, डॉ, पूनम चौहान, डॉ. विजयपाल सिंह ने भारत संस्कृति को एक जीवित संस्कृत बताया। उन्होंने कहा हमें पुरानी परंपराओं के साथ नए संस्कृति-सृजन के उपायों को अपनाना होगा। हमें संस्कृति का परिमार्जन कर परिवर्धन के आयामों को सुनिश्चित करना होगा। कार्यक्रम में मनीषा, नितेश, अफरीन, नगमा, सना, अब्दुल, रूबी, सुमित, मनीष, प्रह्लाद, अखिलेश, सचिन, अभिषेक, ओमेंद्र, दुर्गेश, कहकशा, तुली, मुजल्फा, पूजा, महविश, क्रिशंपल सिंह, आशुतोष, रफिया, अक्ष, गुलिस्ता, मधु, आदित्य, अमित, जतिन, स्नेह, लता, आकाश, मनस्वी, राजीव, रिया, अवनि, अखी, मजहबी, मंताषा, राजवीर सिंह माथुर का योगदान रहा। संचालन डॉ. राजेंद्र चौधरी ने किया।
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