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हिंदी के प्रति बदलनी होगी मानसिकता

Fri, 17 Jul 2020 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Fri, 17 Jul 2020 11:30 PM IST
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Mindset will have to change towards Hindi
डा.शशि प्रभा। - फोटो : BIJNOR
हिंदी के प्रति बदलनी होगी मानसिकता
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बिजनौर। यूपी बोर्ड परीक्षा में इस साल बड़ी संख्या में विद्यार्थी हिंदी विषय में फेल हुए हैं। अंग्रेजी के बढ़ते प्रचलन को देखकर छात्र हिंदी को कमतर आंकते हैं। इसलिए हिंदी विषय को केवल पास होने वाला विषय मानकर तैयारी करते हैं। हिंदी के विद्वानों का मानना है कि हिंदी के उत्थान के लिए बच्चों की मानसिकता में बदलाव लाना जरूरी है।
वर्धमान कॉलेज बिजनौर के हिंदी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. शशि प्रभा का कहना है कि विद्यार्थी इस गलतफहमी में रहते हैं कि हिंदी तो हमारी मातृभाषा है। हिंदी तो हम सभी को अच्छे से आती है। इसलिए विद्यार्थी लापरवाही बरतते हैं। सही अर्थ में हिंदी में सुधार के लिए घर से प्रयास करने की जरूरत है। बच्चों से हिंदी में संवाद करें। शिक्षक हिंदी को सरल व सरस तरीके से पढ़ाएं। लेखन, व्याकरण तथा उच्चारण हिंदी विषय के प्रमुख पहलू हैं।
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साहु जैन कालेज नजीबाबाद के हिंदी विभाग की प्रमुख डॉ. शुभा माहेश्वरी कहती हैं कि छात्र-छात्राएं हिंदी के प्रति उदासीन है। हिंदी भाषी उत्तर प्रदेश में यह चिंता का विषय है। हिंदी का अपना महत्व है। भाषा व साहित्य का ध्यान रखें तो हिंदी में नौकरियों की कमी नहीं है। हिंदी को लेकर शिक्षक भी गंभीर नहीं हैं।
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जीजीआईसी बिजनौर की प्रधानाचार्य निर्मला शर्मा हिंदी विषय की शिक्षिका हैं। वह बताती हैं कि बच्चे हिंदी ठीक से पढ़, लिख नहीं पाते हैं। शिक्षकों को कक्षा में हिंदी पढ़ाने का तरीका बदलना होगा। पहले स्वयं पढ़ो तथा फिर पढ़ाओ की नीति पर हिंदी को रुचिकर बनाकर आगे बढ़ना है। व्याकरण का ज्ञान हिंदी विषय में अच्छे अंक दिलाता है।

आरजेपी इंटर कॉलेज में हिंदी अध्यापक चंद्रहास सिंह का कहना है कि छात्र परीक्षा नजदीक आने पर ही हिंदी विषय की पढ़ाई करते हैं। दूसरे विषयों की तरह हिंदी को समय नहीं देते। हिंदी विषय में भी शत प्रतिशत अंक आ सकते हैं। शिक्षक भी पाठ्यक्रम को रुचिकर तरीके से पढ़ाएं।

ा.शुभा माहेश्वरी।

ा.शुभा माहेश्वरी।- फोटो : BIJNOR

चंद्रहास सिंह।

चंद्रहास सिंह।- फोटो : BIJNOR

निर्मला शर्मा।

निर्मला शर्मा।- फोटो : BIJNOR

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