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नेताजी की प्रेरणा से आंदोलन में कूदे थे मंगू सिंह
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नेताजी की प्रेरणा से आंदोलन में कूदे थे मंगू सिंह
बरुकी। थाना क्षेत्र के गांव गाजीपुर निवासी मंगू सिंह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अपील पर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। वह जीवन भर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों को मानते रहे।
थाना क्षेत्र किरतपुर के गांव गाजीपुर निवासी मंगू सिंह का जन्म सन 1903 को हुआ था। उनके पिता डूंगर सिंह क्षेत्र के संभ्रांत किसान थे। वह गांधीजी के विचारों से बेहद प्रेरित थे। उसके बाद वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनुयायी हो गए थे। 1930 में दांडी यात्रा के दौरान उन्होंने नगीना में नमक बनाकर सत्याग्रह किया था। उनके पौत्र ओमपाल सिंह बताते हैं कि दादाजी बचपन में उन्हें सुभाष चंद्र बोस की कहानियां सुनाया करते थे। वह बताते थे कि उनकी इच्छा आजाद हिंद फौज में जाने की थी लेकिन पिता ने उन्हें ऐसा न करने को कहा था। नेता जी के आह्वान तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा के उद्घोष के बाद हजारों युवा नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ हो गए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान मंगू सिंह अंग्रेजी सरकार की आंखों में खटकते रहे। अंग्रेजी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 27 मार्च 1941 को न्यायालय ने उन्हें धारा 34 /35 के अंतर्गत छह माह कारावास की सजा सुनाई। उन पर 250 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। आजादी के बाद सरकार द्वारा मंगू सिंह को पेंशन प्रदान की गई, लेकिन उन्होंने उसे लेने से इंकार कर दिया। 1972 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने उन्हें ताम्रपत्र भेंट कर सम्मानित किया था। 1993 में मंगू सिंह की मृत्यु हो गई थी।
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बरुकी। थाना क्षेत्र के गांव गाजीपुर निवासी मंगू सिंह नेताजी सुभाष चंद्र बोस की अपील पर स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े थे। वह जीवन भर नेताजी सुभाष चंद्र बोस के आदर्शों को मानते रहे।
थाना क्षेत्र किरतपुर के गांव गाजीपुर निवासी मंगू सिंह का जन्म सन 1903 को हुआ था। उनके पिता डूंगर सिंह क्षेत्र के संभ्रांत किसान थे। वह गांधीजी के विचारों से बेहद प्रेरित थे। उसके बाद वह नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अनुयायी हो गए थे। 1930 में दांडी यात्रा के दौरान उन्होंने नगीना में नमक बनाकर सत्याग्रह किया था। उनके पौत्र ओमपाल सिंह बताते हैं कि दादाजी बचपन में उन्हें सुभाष चंद्र बोस की कहानियां सुनाया करते थे। वह बताते थे कि उनकी इच्छा आजाद हिंद फौज में जाने की थी लेकिन पिता ने उन्हें ऐसा न करने को कहा था। नेता जी के आह्वान तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा के उद्घोष के बाद हजारों युवा नेताजी सुभाषचंद्र बोस के साथ हो गए थे। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान मंगू सिंह अंग्रेजी सरकार की आंखों में खटकते रहे। अंग्रेजी सरकार ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया। 27 मार्च 1941 को न्यायालय ने उन्हें धारा 34 /35 के अंतर्गत छह माह कारावास की सजा सुनाई। उन पर 250 रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। आजादी के बाद सरकार द्वारा मंगू सिंह को पेंशन प्रदान की गई, लेकिन उन्होंने उसे लेने से इंकार कर दिया। 1972 में उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री कमलापति त्रिपाठी ने उन्हें ताम्रपत्र भेंट कर सम्मानित किया था। 1993 में मंगू सिंह की मृत्यु हो गई थी।
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