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बिजनौर मंडी में सवा करोड़ से मंडी शुल्क हुआ शून्य
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बिजनौर मंडी में सवा करोड़ से मंडी शुल्क हुआ शून्य
बिजनौर। सरकार के मंडी समिति से जुड़े कृषि कानून के बाद बिजनौर जिला मुख्यालय की मंडी की आमदनी सवा करोड़ से सीधे जीरो हो गई है। जिला मुख्यालय से मंडी शुल्क बिल्कुल खत्म हो गया है। मंडी शुल्क खत्म होने से केवल व्यापारियों को ही राहत मिली है।
किसानों की फसल आढ़त पर बेचने के लिए मंडी समिति भवन की व्यवस्था की जाती है। इसके लिए मंडी समिति भवन बनाए जाने का प्रावधान है। मंडी समिति में किसानों को फसल बोली लगाकर खरीदी जाती है। अगर मंडी परिसर न भी हो तो भी कहीं न कहीं पर आढ़त लगती ही है। जिला मुख्यालय पर पहले आढ़त सब्जी व फल मंडी में ही लगती थी। वहां जगह बहुत कम थी और किसानों की फसल बिकने में भारी परेशानी होती थी। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए बाद में आढ़त को नगर पालिका के प्रदर्शनी मैदान में स्थानांतरित कर दिया गया। मंडी में जो व्यापारी फसल खरीदते हैं उस पर ढाई प्रतिशत मंडी शुल्क लगता है। इससे सरकार को राजस्व मिलता है। इसके अलावा व्यापारी जो लकड़ी खरीदते हैं उस पर भी मंडी शुल्क लगता है। कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने कृषि से जुड़े तीन कानून बनाए। इनमें एक में प्रावधान किया गया कि मंडी समिति का परिसर जहां नहीं होगा ,वहां पर व्यापारियों को मंडी शुल्क नहीं देना होगा। मंडी परिसर होने पर भी अगर व्यापारी मंडी स्थल से बाहर किसान से फसल खरीदेगा तो उस पर भी मंडी शुल्क नहीं लगेगा। जिला मुख्यालय में मंडी परिसर नहीं है। यहां पर पहले की व्यवस्था के अनुसार साल में करीब सवा करोड़ रुपये का मंडी शुल्क मिलता था, लेकिन नई व्यवस्था में मंडी शुल्क एकदम खत्म हो गया है। मुख्यालय पर व्यापारी के प्रदर्शनी मैदान या सब्जी मंडी पर आढ़त पर कुछ भी शुल्क नहीं लग रहा है।
अब निजी मंडी की तैयारी शुरू
सरकार की व्यवस्था से व्यापारियों को बहुत फायदा हुआ है। शासन मंडी समिति भवन बनाने में सक्रिय नहीं है। ऐसे में व्यापारियों ने खुद की मंडी खोलने की कोशिश शुरू कर दी है। वे इसके लिए जमीन खरीद रहे हैं। निजी मंडी में भी व्यापारियों को मंडी शुल्क नहीं देना होगा।
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नई व्यवस्था के अनुसार हो रहा काम
मंडी समिति सचिव अर्जुन सिंह के अनुसार मंडी समिति भवन नहीं होने से व्यापारियों से मंडी शुल्क नहीं लिया जा रहा है। नई व्यवस्था के अनुसार ही काम किया जा रहा है।
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बिजनौर। सरकार के मंडी समिति से जुड़े कृषि कानून के बाद बिजनौर जिला मुख्यालय की मंडी की आमदनी सवा करोड़ से सीधे जीरो हो गई है। जिला मुख्यालय से मंडी शुल्क बिल्कुल खत्म हो गया है। मंडी शुल्क खत्म होने से केवल व्यापारियों को ही राहत मिली है।
किसानों की फसल आढ़त पर बेचने के लिए मंडी समिति भवन की व्यवस्था की जाती है। इसके लिए मंडी समिति भवन बनाए जाने का प्रावधान है। मंडी समिति में किसानों को फसल बोली लगाकर खरीदी जाती है। अगर मंडी परिसर न भी हो तो भी कहीं न कहीं पर आढ़त लगती ही है। जिला मुख्यालय पर पहले आढ़त सब्जी व फल मंडी में ही लगती थी। वहां जगह बहुत कम थी और किसानों की फसल बिकने में भारी परेशानी होती थी। कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिए बाद में आढ़त को नगर पालिका के प्रदर्शनी मैदान में स्थानांतरित कर दिया गया। मंडी में जो व्यापारी फसल खरीदते हैं उस पर ढाई प्रतिशत मंडी शुल्क लगता है। इससे सरकार को राजस्व मिलता है। इसके अलावा व्यापारी जो लकड़ी खरीदते हैं उस पर भी मंडी शुल्क लगता है। कुछ समय पहले केंद्र सरकार ने कृषि से जुड़े तीन कानून बनाए। इनमें एक में प्रावधान किया गया कि मंडी समिति का परिसर जहां नहीं होगा ,वहां पर व्यापारियों को मंडी शुल्क नहीं देना होगा। मंडी परिसर होने पर भी अगर व्यापारी मंडी स्थल से बाहर किसान से फसल खरीदेगा तो उस पर भी मंडी शुल्क नहीं लगेगा। जिला मुख्यालय में मंडी परिसर नहीं है। यहां पर पहले की व्यवस्था के अनुसार साल में करीब सवा करोड़ रुपये का मंडी शुल्क मिलता था, लेकिन नई व्यवस्था में मंडी शुल्क एकदम खत्म हो गया है। मुख्यालय पर व्यापारी के प्रदर्शनी मैदान या सब्जी मंडी पर आढ़त पर कुछ भी शुल्क नहीं लग रहा है।
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अब निजी मंडी की तैयारी शुरू
सरकार की व्यवस्था से व्यापारियों को बहुत फायदा हुआ है। शासन मंडी समिति भवन बनाने में सक्रिय नहीं है। ऐसे में व्यापारियों ने खुद की मंडी खोलने की कोशिश शुरू कर दी है। वे इसके लिए जमीन खरीद रहे हैं। निजी मंडी में भी व्यापारियों को मंडी शुल्क नहीं देना होगा।
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नई व्यवस्था के अनुसार हो रहा काम
मंडी समिति सचिव अर्जुन सिंह के अनुसार मंडी समिति भवन नहीं होने से व्यापारियों से मंडी शुल्क नहीं लिया जा रहा है। नई व्यवस्था के अनुसार ही काम किया जा रहा है।