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...दोस्ती कर लो अगर मुझको मिटाना चाहो
ब्यूरो, अमर उजाला /बिजनौर
Updated Thu, 01 Dec 2016 12:43 AM IST
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बिजनौर के इंदिरा बाल भवन में ऑल इंडिया मुशायरे में कलाम पेश करती शायर।
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो
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बिजनौर में सपा विधायक रुचि वीरा के सम्मान में मंगलवार रात इंदिरा बाल भवन में ऑल इंडिया मुशायरा आयोजित हुआ। श्रोता शायरों के कलामों पर ताली बजाते रहे। मुशायरा बुधवार तड़के समाप्त हुआ।
मुशायरे का आगाज विधायक रुचि वीरा और सेठ शकील अहमद अंसारी ने किया। मुशायरे का आगाज इम्तियाज अजहर ने नाते पाक कर किया। नईम खादमी ने फरमाया कि हवा को बस यही तो खल रहा है, मेरा दीया हवा में जल रहा है। शाहिद अंजुम के शेर हम उस मौसम में भी देखो तुम्हारे पास रहते हैं, कि जिस मौसम में पेड़ों को परिंदे छोड़ देते हैं को खूब पसंद किया गया। डॉ. नुजहत ने फरमाया कि दुश्मनी से तुम्हें कुछ नहीं मिलने वाला, दोस्ती कर लो अगर मुझको मिटाना चाहो। डॉ. मुकेश दर्पण के शेर चोला बदलके जिसको छुआ नीला हो गया, कुर्सी मिली तो और भी जहरीला हो गया को खूब पसंद किया गया। शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने पेद्दा प्रकरण के दौरान जिले को सुलगने से बचाने पर विधायक रुचि वीरा की बहुत प्रशंसा की। उन्होंने फरमाया कि मोहब्बत उगे सूरज को ढलने से बचाया है, नई नस्लों के जज्बों को उबलने से बचाया है, तुम्हें शुक्रिया कहता है ये शायर रुचि वीरा जी, इस बिजनौर को तुमने ही जलने से बचाया है। उनको बहुत देर तक सुना गया। बैठने के बाद भी युवाओं की फरमाइश पर उनको कई बार स्टेज पर लाया गया। खुशबू शर्मा ने फरमाया कि मुझे जुलमत में ढ़ाला जा रहा है, मेरे घर से उजाला जा रहा है। रूमानी शायर डॉ. इस्तेखार सागर के शेर काटूंगा जिंदगी फुटपाथ पर कसम से, जुल्फ का साया जो दे तू सर छिपाने के लिए को युवाओं की खूब दाद मिली। डॉ. राही निजामी के शेर जहां हिंदू-मुसलमां प्यार से मिल जुलकर रहते हैं, उसे हम फखिया लहजे में हिंदुस्तान कहते हैं ,पर बहुत देर तक ताली बजती रहीं। डॉ. नदीम शाद ने फरमाया कि बुलंदियों पर यकीनन यकीं रखता हूं, मगर मैं पांव के नीचे जमीन रखता हूं। अल्ताफ जिया के शेर ए परिंदे ये बुलंदी सबको रास नहीं आती, उड़ते-उड़ते टूट जाएंगे तेरे पर लौट जा को सराहना मिली। मुशायरे की सदारत डॉ. तौसीफुर्रहमान व निजामत अनवर जलालपुरी ने की। मुशायरे में खुशनूद खां, जुल्फकार बेबी, दिलशाद अंसारी, शमशाद अंसारी, कंवीनर डॉ. रहमान व असलम प्रधान आदि मौजूद रहे।
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मुशायरे का आगाज विधायक रुचि वीरा और सेठ शकील अहमद अंसारी ने किया। मुशायरे का आगाज इम्तियाज अजहर ने नाते पाक कर किया। नईम खादमी ने फरमाया कि हवा को बस यही तो खल रहा है, मेरा दीया हवा में जल रहा है। शाहिद अंजुम के शेर हम उस मौसम में भी देखो तुम्हारे पास रहते हैं, कि जिस मौसम में पेड़ों को परिंदे छोड़ देते हैं को खूब पसंद किया गया। डॉ. नुजहत ने फरमाया कि दुश्मनी से तुम्हें कुछ नहीं मिलने वाला, दोस्ती कर लो अगर मुझको मिटाना चाहो। डॉ. मुकेश दर्पण के शेर चोला बदलके जिसको छुआ नीला हो गया, कुर्सी मिली तो और भी जहरीला हो गया को खूब पसंद किया गया। शायर इमरान प्रतापगढ़ी ने पेद्दा प्रकरण के दौरान जिले को सुलगने से बचाने पर विधायक रुचि वीरा की बहुत प्रशंसा की। उन्होंने फरमाया कि मोहब्बत उगे सूरज को ढलने से बचाया है, नई नस्लों के जज्बों को उबलने से बचाया है, तुम्हें शुक्रिया कहता है ये शायर रुचि वीरा जी, इस बिजनौर को तुमने ही जलने से बचाया है। उनको बहुत देर तक सुना गया। बैठने के बाद भी युवाओं की फरमाइश पर उनको कई बार स्टेज पर लाया गया। खुशबू शर्मा ने फरमाया कि मुझे जुलमत में ढ़ाला जा रहा है, मेरे घर से उजाला जा रहा है। रूमानी शायर डॉ. इस्तेखार सागर के शेर काटूंगा जिंदगी फुटपाथ पर कसम से, जुल्फ का साया जो दे तू सर छिपाने के लिए को युवाओं की खूब दाद मिली। डॉ. राही निजामी के शेर जहां हिंदू-मुसलमां प्यार से मिल जुलकर रहते हैं, उसे हम फखिया लहजे में हिंदुस्तान कहते हैं ,पर बहुत देर तक ताली बजती रहीं। डॉ. नदीम शाद ने फरमाया कि बुलंदियों पर यकीनन यकीं रखता हूं, मगर मैं पांव के नीचे जमीन रखता हूं। अल्ताफ जिया के शेर ए परिंदे ये बुलंदी सबको रास नहीं आती, उड़ते-उड़ते टूट जाएंगे तेरे पर लौट जा को सराहना मिली। मुशायरे की सदारत डॉ. तौसीफुर्रहमान व निजामत अनवर जलालपुरी ने की। मुशायरे में खुशनूद खां, जुल्फकार बेबी, दिलशाद अंसारी, शमशाद अंसारी, कंवीनर डॉ. रहमान व असलम प्रधान आदि मौजूद रहे।
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