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Bijnor News: चांदपुर की नाकोवाली झील में तलाश रहे रामसर साइट का सपना
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बिजनौर में चांदपुर के पास नाको वाली झील में बैठे प्रवाक्षी पक्षी। स्रोत वन विभाग
रजनीश त्यागी
बिजनौर। पक्षी प्रेमियों के लिए नव वर्ष के साथ ही बड़ी खुशी का मामला है। वन विभाग ने हाल ही में जो चांदपुर क्षेत्र के नाररोर में जो नाकोवाली झील तलाशी है, उसमें अब रामसर साइट का सपना वन अफसर देख रहे हैं। इसके लिए जहां एक ओर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम को पक्षी गणना के लिए बुलाने की तैयारी है, वहीं इसका प्रस्ताव भी शीघ्र तैयार किया जाएगा।
चांदपुर क्षेत्र में नारोर झील है, जिसे नाकोवाली झील भी कहा जाता है। यहां पर मगरमच्छ मिलते थे, जिन्हें स्थानीय भाषा में नाका कहा गया। वहीं से इस झील का नाम नाकोवाली झील पड़ गया। पिछले माह ही वन विभाग की नजर इस झील पर पड़ी तो यहां पक्षियों की संख्या देख हैरान रह गए। यही नहीं यहां पर दो मीटर से गहरा और कहीं उथला पानी प्रवासी पक्षियों के लिए मुफीद नजर आया।
इस समय यहां पर स्थानीय और प्रवासी मिलाकर 200 से ज्यादा प्रजाति के पक्षी होने की संभावना है। इसके अलावा वन विभाग वहां पर अलग-अलग प्रजाति की 20 से ज्यादा वनस्पति चिन्हित कर चुका है। यह वनस्पति ऐसी हैं, जो प्रवासी पक्षियों के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। वन विभाग की मुहिम रंग लाई तो यह क्षेत्र रामसर साइट बन जाएगा। ऐसा होने पर यहां पर पर्यटन तो बढ़ेगा ही, साथ ही इस झील का संरक्षण भी होगा।
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गंगा के नजदीक होने से पक्षियों की संख्या ज्यादा : वन विभाग के एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि नाकोवाली झील गंगा क्षेत्र के पास है। बरसात में यहां पर गंगा का पानी ही भर जाता है। ऐसे में गंगा खादर में आने वाली पक्षी धीरे धीरे इस झील पर एकत्रित हो रहे हैं। इसे रामसर साइट घोषित कराने के लिए प्रस्ताव तैयार होगा। इसमें डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और संबंधित विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी।
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बिजनौर। पक्षी प्रेमियों के लिए नव वर्ष के साथ ही बड़ी खुशी का मामला है। वन विभाग ने हाल ही में जो चांदपुर क्षेत्र के नाररोर में जो नाकोवाली झील तलाशी है, उसमें अब रामसर साइट का सपना वन अफसर देख रहे हैं। इसके लिए जहां एक ओर डब्ल्यूडब्ल्यूएफ की टीम को पक्षी गणना के लिए बुलाने की तैयारी है, वहीं इसका प्रस्ताव भी शीघ्र तैयार किया जाएगा।
चांदपुर क्षेत्र में नारोर झील है, जिसे नाकोवाली झील भी कहा जाता है। यहां पर मगरमच्छ मिलते थे, जिन्हें स्थानीय भाषा में नाका कहा गया। वहीं से इस झील का नाम नाकोवाली झील पड़ गया। पिछले माह ही वन विभाग की नजर इस झील पर पड़ी तो यहां पक्षियों की संख्या देख हैरान रह गए। यही नहीं यहां पर दो मीटर से गहरा और कहीं उथला पानी प्रवासी पक्षियों के लिए मुफीद नजर आया।
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इस समय यहां पर स्थानीय और प्रवासी मिलाकर 200 से ज्यादा प्रजाति के पक्षी होने की संभावना है। इसके अलावा वन विभाग वहां पर अलग-अलग प्रजाति की 20 से ज्यादा वनस्पति चिन्हित कर चुका है। यह वनस्पति ऐसी हैं, जो प्रवासी पक्षियों के लिए काफी बेहतर मानी जाती है। वन विभाग की मुहिम रंग लाई तो यह क्षेत्र रामसर साइट बन जाएगा। ऐसा होने पर यहां पर पर्यटन तो बढ़ेगा ही, साथ ही इस झील का संरक्षण भी होगा।
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गंगा के नजदीक होने से पक्षियों की संख्या ज्यादा : वन विभाग के एसडीओ ज्ञान सिंह ने बताया कि नाकोवाली झील गंगा क्षेत्र के पास है। बरसात में यहां पर गंगा का पानी ही भर जाता है। ऐसे में गंगा खादर में आने वाली पक्षी धीरे धीरे इस झील पर एकत्रित हो रहे हैं। इसे रामसर साइट घोषित कराने के लिए प्रस्ताव तैयार होगा। इसमें डब्ल्यूडब्ल्यूएफ और संबंधित विशेषज्ञों की मदद भी ली जाएगी।