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कुलमणि सिंह ने लगा दी थी सरकारी इमारतों में आग
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कुलमणि सिंह। (फाइल फोटो)
- फोटो : BIJNOR
कुलमणि सिंह ने लगा दी थी सरकारी इमारतों में आग
बिजनौर। धामपुर नगर निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी कुलमणि सिंह ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सरकारी इमारतों में आग लगाकर अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती दी थी। कुलमणि सिंह के परिवार से पांच लोग स्वतंत्रता आंदोलन में जेल भेजे गए थे।
धामपुर निवासी शिक्षाविद शिवकुमार बताते हैं कि कुलमणि सिंह का जन्म सन 1910 में धामपुर हुआ था। इनके पिता चौधरी उमराव सिंह चौहान और माता रामदेई भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। इसके अतिरिक्त इनकी बहन और बुआ भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी रही।
बिजनौर के इतिहास के जानकार फीना निवासी हेमंत कुमार बताते हैं कि सन 1929 में महात्मा गांधी के धामपुर आगमन के बाद कुलमणि सिंह पूरी तरह स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। सन 1932 में शुरू हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन में इनके पिता उमराव सिंह चौहान तथा माता राम देई को जेल भेजा गया। इनकी बहन तथा बुआ भी आंदोलन के कारण जेल गईं। कुलमणि सिंह धामपुर के आसपास के क्षेत्र में स्वतंत्रता की चिंगारी जलाते रहे। सन 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह में भाग लेने के कारण इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और एक वर्ष की कैद तथा 50 रुपये जुर्माने की सजा दी गई। हेमंत कुमार बताते हैं कि नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के आह्वान पर पूरे देश में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा हुई। आंदोलन ने जोर पकड़ा। धामपुर में इस आंदोलन की कमान चौधरी कुलमणि सिंह के हाथों में थी। 12 अगस्त 1942 को कुलमणि सिंह के नेतृत्व में सेनानियों की भीड़ धामपुर में जुटी। उत्साही भीड़ जुलूस के रूप में धामपुर में निकली। रास्ते में मौजूद अंग्रेजी सिपाहियों की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे स्वतंत्रता सेनानियों को रोक सके। आंदोलनकारी जिस भी सरकारी इमारत के सामने से गुजरते उस पर तिरंगा लहरा देते। आंदोलनकारियों ने डाकघर और रेलवे स्टेशन में तोड़ फोड़ कर आग के हवाले कर दिया। रेलवे के सिग्नल को बेकार कर दिया गया तथा स्टेशन में रखे अभिलेखों में आग लगा दी। स्टेशन के नियंत्रण और संचार तंत्र को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। धामपुर में धारा 144 लगा दी गई तथा कुलमणि सिंह की तलाश में निरंतर दबिश दी गई। एक अंग्रेजी अधिकारी ने इनके घर के बाहर आवाज लगाई कि शेर का बच्चा घर में क्यों छुपा है? बाहर निकले। इस पर इनकी बहन ने पुलिस को मुंहतोड़ जवाब दिया और कहा शेर जंगल में मिलते हैं। उन्हें घर में कोई मूर्ख ही ढूंढेगा। घटना के एक सप्ताह बाद कुलमणि सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और अंग्रेजों द्वारा उन्हें तमाम यातनाएं दी गई। भारत छोड़ो आंदोलन में इन्हें दो वर्ष की कैद हुई। कुलमणि सिंह के सम्मान में धामपुर क्षेत्र में आज भी 12 अगस्त का दिन कुलमणि दिवस के रूप में मनाया जाता है। सन 1953 में ये धामपुर नगर पालिका के अध्यक्ष भी बने थे।
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बिजनौर। धामपुर नगर निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी चौधरी कुलमणि सिंह ने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान सरकारी इमारतों में आग लगाकर अंग्रेजी हुकूमत को खुली चुनौती दी थी। कुलमणि सिंह के परिवार से पांच लोग स्वतंत्रता आंदोलन में जेल भेजे गए थे।
धामपुर निवासी शिक्षाविद शिवकुमार बताते हैं कि कुलमणि सिंह का जन्म सन 1910 में धामपुर हुआ था। इनके पिता चौधरी उमराव सिंह चौहान और माता रामदेई भी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे। इसके अतिरिक्त इनकी बहन और बुआ भी स्वतंत्रता आंदोलन से जुड़ी रही।
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बिजनौर के इतिहास के जानकार फीना निवासी हेमंत कुमार बताते हैं कि सन 1929 में महात्मा गांधी के धामपुर आगमन के बाद कुलमणि सिंह पूरी तरह स्वतंत्रता आंदोलन में शामिल हो गए। सन 1932 में शुरू हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन में इनके पिता उमराव सिंह चौहान तथा माता राम देई को जेल भेजा गया। इनकी बहन तथा बुआ भी आंदोलन के कारण जेल गईं। कुलमणि सिंह धामपुर के आसपास के क्षेत्र में स्वतंत्रता की चिंगारी जलाते रहे। सन 1941 में व्यक्तिगत सत्याग्रह में भाग लेने के कारण इन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया और एक वर्ष की कैद तथा 50 रुपये जुर्माने की सजा दी गई। हेमंत कुमार बताते हैं कि नौ अगस्त 1942 को महात्मा गांधी के आह्वान पर पूरे देश में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन की घोषणा हुई। आंदोलन ने जोर पकड़ा। धामपुर में इस आंदोलन की कमान चौधरी कुलमणि सिंह के हाथों में थी। 12 अगस्त 1942 को कुलमणि सिंह के नेतृत्व में सेनानियों की भीड़ धामपुर में जुटी। उत्साही भीड़ जुलूस के रूप में धामपुर में निकली। रास्ते में मौजूद अंग्रेजी सिपाहियों की इतनी हिम्मत नहीं थी कि वे स्वतंत्रता सेनानियों को रोक सके। आंदोलनकारी जिस भी सरकारी इमारत के सामने से गुजरते उस पर तिरंगा लहरा देते। आंदोलनकारियों ने डाकघर और रेलवे स्टेशन में तोड़ फोड़ कर आग के हवाले कर दिया। रेलवे के सिग्नल को बेकार कर दिया गया तथा स्टेशन में रखे अभिलेखों में आग लगा दी। स्टेशन के नियंत्रण और संचार तंत्र को भी क्षतिग्रस्त कर दिया। धामपुर में धारा 144 लगा दी गई तथा कुलमणि सिंह की तलाश में निरंतर दबिश दी गई। एक अंग्रेजी अधिकारी ने इनके घर के बाहर आवाज लगाई कि शेर का बच्चा घर में क्यों छुपा है? बाहर निकले। इस पर इनकी बहन ने पुलिस को मुंहतोड़ जवाब दिया और कहा शेर जंगल में मिलते हैं। उन्हें घर में कोई मूर्ख ही ढूंढेगा। घटना के एक सप्ताह बाद कुलमणि सिंह को गिरफ्तार कर लिया गया और अंग्रेजों द्वारा उन्हें तमाम यातनाएं दी गई। भारत छोड़ो आंदोलन में इन्हें दो वर्ष की कैद हुई। कुलमणि सिंह के सम्मान में धामपुर क्षेत्र में आज भी 12 अगस्त का दिन कुलमणि दिवस के रूप में मनाया जाता है। सन 1953 में ये धामपुर नगर पालिका के अध्यक्ष भी बने थे।
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