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Bijnor News: धामपुर - कालियावाला मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र
Mon, 27 Mar 2023 12:12 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Mon, 27 Mar 2023 12:12 AM IST
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- 450 साल पुराने मंदिर में पूरी होती हैं श्रद्धालुओं की सभी मनोकामनाएं
फोटो दो
- संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। नगर का प्राचीन सिद्धपीठ कालियावाला मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि मंदिर में मां की कृपा से श्रद्धालुओं की सभी मन्नत पूरी होती हैं। मंदिर का इतिहास करीब 450 साल पुराना है। इस मंदिर नींव को मोहल्ला साहूबान निवासी कालियानाथ महाराज ने रखा था, उन्हीं के नाम से इस मंदिर का नाम कालियावाला पड़ा है।
मंदिर परिसर में मां काली की मूर्ति के अलावा अन्य सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां भी विराजमान हैं। नवरात्र में नौ दिन मंदिर परिसर में मेला लगता है। यहां पर दोयज और बूढ़े बाबा का मेला भी लगता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद चढ़ा कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं कालियानाथ के वंशज परिवार के सदस्यों के साथ मंदिर की सेवा में लगे हैं। श्रद्धालु योजना गुप्ता का कहना है कि जो भी सच्चे मन से मां के मंदिर में मन्नत मांगता है, वह अवश्य पूरी होती है।
शिव कुमार का कहना है कि यह मंदिर अति प्राचीन सिद्वपीठ मंदिर है। मंदिर में करीब 450 साल पुराना पीपल का वृक्ष है। इसकी भी पूजा की जाती है। पुजारी सुरेंद्र नाथ का कहना है कि मंदिर में वर्तमान में उनकी पांचवीं पीढ़ी सेवा कर रही है। साल में दो बार नवरात्रों पर मेला लगता है। विजय नाथ बताते हैं कि मंदिर निर्माण में वास्तु कला का पूरा ध्यान रखा गया है। विनीत दीक्षित का कहना है कि मंदिर पर बहुत दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। माता से जो मांगा जाता है, वह सहज ही प्रदान कर देती हैं।
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फोटो दो
- संवाद न्यूज एजेंसी
धामपुर। नगर का प्राचीन सिद्धपीठ कालियावाला मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। मान्यता है कि मंदिर में मां की कृपा से श्रद्धालुओं की सभी मन्नत पूरी होती हैं। मंदिर का इतिहास करीब 450 साल पुराना है। इस मंदिर नींव को मोहल्ला साहूबान निवासी कालियानाथ महाराज ने रखा था, उन्हीं के नाम से इस मंदिर का नाम कालियावाला पड़ा है।
मंदिर परिसर में मां काली की मूर्ति के अलावा अन्य सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां भी विराजमान हैं। नवरात्र में नौ दिन मंदिर परिसर में मेला लगता है। यहां पर दोयज और बूढ़े बाबा का मेला भी लगता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालु प्रसाद चढ़ा कर सुख समृद्धि की कामना करते हैं कालियानाथ के वंशज परिवार के सदस्यों के साथ मंदिर की सेवा में लगे हैं। श्रद्धालु योजना गुप्ता का कहना है कि जो भी सच्चे मन से मां के मंदिर में मन्नत मांगता है, वह अवश्य पूरी होती है।
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शिव कुमार का कहना है कि यह मंदिर अति प्राचीन सिद्वपीठ मंदिर है। मंदिर में करीब 450 साल पुराना पीपल का वृक्ष है। इसकी भी पूजा की जाती है। पुजारी सुरेंद्र नाथ का कहना है कि मंदिर में वर्तमान में उनकी पांचवीं पीढ़ी सेवा कर रही है। साल में दो बार नवरात्रों पर मेला लगता है। विजय नाथ बताते हैं कि मंदिर निर्माण में वास्तु कला का पूरा ध्यान रखा गया है। विनीत दीक्षित का कहना है कि मंदिर पर बहुत दूर-दूर से श्रद्धालु आते हैं। माता से जो मांगा जाता है, वह सहज ही प्रदान कर देती हैं।
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