टाट-पट्टी पर ही पढ़ने को बेबस बचपन
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स्कूलों में न तो सफाई कर्मचारी हैं और न ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी तैनात हैं। शिक्षकों की गैर शैक्षणिक कार्यों में ड्यूटी लगने से भी बेसिक स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है। जिले में 1791 प्राथमिक विद्यालय हैं। इनमें एक लाख 75 छात्र-छात्राएं पंजीकृत हैं। सर्व शिक्षा अभियान के तहत बच्चों के अधिक से अधिक नामांकन कराने का शोर तो मचाया जाता है। लेकिन सुविधाओं के नाम पर बच्चों का उत्पीड़न ही हो रहा है। अधिकतर बच्चों को कुर्सी या बेंच की बजाय टाट पट्टी पर ही बैठना पड़ रहा है।
विद्यालय अनुदान के तहत प्रत्येक वर्ष स्कूलों में पांच -पांच हजार रुपये उपलब्ध कराए जाते हैं। इस धनराशि से ही शिक्षक बच्चों की टाट पट्टी की व्यवस्था करते हैं। जिले में परिषदीय उच्च प्राथमिक विद्यालय 765 हैं। इन स्कूलों में 75 हजार छात्र छात्राएं अध्ययनरत हैं। उच्च प्राथमिक स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए स्कूलों में बेंच हैं। ये भी वर्ष 2008 में सर्व शिक्षा
अभियान में मिले बजट से खरीदी गई थीं। उधर,बीएसए महेश चंद्र ने बताया कि स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए टाट पट्टी खरीदने के लिए स्कूलों को धनराशि उपलब्ध कराई जाती है। उन्होंने बताया कि ग्राम पंचायतों के सफाई कर्मचारियों को सफाई करने के आदेश हैं। यदि सफाई नहीं करता तो उसके खिलाफ जिला पंचायत राज अधिकारी को लिखा जाएगा। उन्होंने बताया कि जिले के सभी स्कूलों में पुस्तकें पहुंच गई है। उनका कहना है कि कुछ दिक्कतें हैं। इन्हें दूर करने के प्रयास हैं।