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कसौंदी की जहरीली फली खाने से मासूम की मौत

Sun, 17 Oct 2021 12:27 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 17 Oct 2021 12:27 AM IST
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Innocent dies after eating poisonous pods of Kasaundi
कसौंदी का पौधा। - फोटो : BIJNOR
कसौंदी की जहरीली फली खाने से मासूम की मौत
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बिजनौर। खेल-खेल में कसौंदी की फली खाने से एक मासूम की मौत हो गई। उपचार के बाद भी बच्ची को बचाया नहीं जा सका।
हल्दौर थाने के गांव झिरौटी निवासी अर्जुन की पांच साल की बेटी गुनगुन की तीन दिन पहले अचानक तबीयत खराब हो गई थी। गुनगुन को एकदम से काफी उलटी आने लगी। परिजन उसे धामपुर ले गए और वहां अस्पताल में भर्ती कराया। आराम न होने पर परिजन उसे मुरादाबाद ले गए। वहां भी कोई आराम नहीं हुआ। इसके बाद परिजन गुनगुन को बिजनौर में एक निजी चिकित्सक के यहां लेकर आए। निजी चिकित्सक ने परिजनों से गुनगुन के कसौंदी की फली खाने के बारे में पूछा। परिजनों ने गांव में फोन करके गुनगुन के साथ खेलने वाले बच्चों से पूछा तो उन्होंने बताया कि खेल-खेल में गुनगुन ने कसौंदी यानी पैमाड़ की फली खा ली थी। तमाम कोशिशों के बाद भी उसे बचाया नहीं जा सका और शनिवार सुबह गुनगुन ने दम तोड़ दिया। गुनगुन के पिता अर्जुन ने बताया कि उन्हें कसौंदी की फली के जहरीली होने के बारे में कुछ नहीं पता था।
जिले में मासूमों का काल है कसौंदी की फली
बजनौर। एक ओर जहां आयुर्वेद कसौंदी को तीस से ज्यादा बीमारियों की दवा बताया जाता है, वहीं बच्चों की नामसमझी में यही कसौंदी की फली मौत बन रही है। पिछले डेढ़ दशक पर नजर डालें तो बिजनौर जिले में 150 से ज्यादा बच्चे खेल-खेल में कसौंदी (पैमाड़) की फली खाने से काल के गाल में समा चुके हैं। जब बच्चों की जान जाती है तो ही विभागों को भी इसे हटाने की याद आती है। इस समय हालात देखें तो गांव हो या शहर, हर जगह सड़कों के किनारे, खाली प्लाट में पैमाड़ खूब खड़ी हैं और इस पर फली भी आ रही है।
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दवा जब जहर बन जाए
चिकित्सकों की माने तो कसौंदी की फली कई आयुर्वेदिक बीमारियों में इस्तेेमाल की जाती है। खासतौर से लीवर की दवाइयों में इसका इस्तेमाल होता है। वहीं बच्चे जब इसका सेवन करते हैं तो लीवर के लिए फायदेमंद तत्व ही बच्चों की जान ले लेता है। विशेषज्ञों की माने तो लीवर की प्रत्येक दवा में कसौंदी का प्रयोग होता है, लेकिन बच्चों के लिए यह जहर से कम नहीं होती। यदि 10 किलो का बच्चा 0.5 प्रतिशत फली खा ले तो उसकी जान बचना बहुत मुश्किल हो जाता है। कसौंदी की फली में एन्थोक्लॉन होता है, जो जानलेवा होता है। ज्यादा फली खाने से बच्चों का लीवर काला पड़कर खत्म हो जाता है। इस फली को मिट्टी खाने वाले व भूखे बच्चे ज्यादा पसंद करते हैं।
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कसौंदी की फली खाने से यह आते हैं लक्षण
-सांस फूलना व दौरे पड़ना
-बुखार और उल्टी आना
-उल्टी सीधी हरकत करना
-हाथ, कंधा या बाल काटना
-हाथ और पैर फेंकने लगना
-मुंह से झाग व खून की उल्टी
जिले में कसौंदी की फली खाने के मामले
वर्ष बीमार मौत
2003 15 9
2004 22 16
2005 18 12
2006 23 17
2007 35 23
2008 21 16
2009 16 11
2010 10 8
2011 1 1
2012 4 3
2013 5 3
2014 3 3
2015 3 2
2016 1 1
2017 2 2
2018 6 5
2019 3 3
अन्य विभागों से करेंगे वार्ता
सीएमओ डा.विजय कुमार गोयल ने बताया कि कुछ पौधे बच्चों के लिए खतरनाक होते हैं। कसौंदी भी उन्हीं में से एक है। अभिभावकों को बच्चों का ध्यान रखना चाहिए। वे विभागों से वार्ता करके कसौंदी के पौधों को नष्ट कराएंगे।
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