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गन्ना पौधे पर अंकुर भेदक कीट का प्रकोप
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गन्ना पौधे पर अंकुर भेदक कीट का प्रकोप
बिजनौर। मौसम में गर्मी बढ़ने के साथ गन्ना फसल पर कीट को खतरा मंडराने लगा है। इस समय गन्ने की पत्तियां एवं तने अपेक्षाकृत मुलायम होते हैं, जिससे विभिन्न कीट गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा देते हैं। गन्ना फसल पर अंकुर भेदक कीट (सूंडी) का प्रकोप जून माह तक रहता है।
गन्ना विकास विभाग की ओर से किसानों को कीट के बारे व उसके नियंत्रण के बारे में बताया जा रहा है। गन्ना विभाग चीनी मिलों की मदद से पम्फलेट व गन्ना सर्वे में लगे कर्मचारियों के माध्यम से इन बीमारियों के बारे में बताया जा रहा है। अफसरों के अनुसार अंकुर भेदक कीट गन्ना फसल में पाया जा रहा है। गन्ने के पौधे में लगी कीट मटमैले रंग का होता है। यह सूंडी पौधों के गोफ को खाती हुई नीचे की तरफ जाती है, जिसकी वजह से गोफ सूख जाती है। यह बीमारी से फसल के उत्पादन पर खासा प्रभाव दिखाई देता है। विभाग व चीनी मिल अधिकारी व कर्मचारी गोष्ठी, बैठक आदि के माध्यम से भी किसानों को गन्ना फसल में लगने वाली बीमारी व उनकी रोकथाम के बारे जानकारी दे रहे हैं। किसानों को इस कीट के लक्षण के बारे में बताया जा रहा है।
कीट नियंत्रण को इसका करें प्रयोग
गन्न बुवाई के 45 दिन के पश्चात प्रति हेक्टेयर की दर से फिप्रोनिल 40 प्रतिशत, इमिडाक्लोप्रिड 40 प्रतिशत, डब्ल्यूजी की 500 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से एक हजार लीटर पानी के साथ मिलाकर फसल पर छिड़काव करें।
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किसानों को कीटों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उनके नियंत्रण के लिए कीटनाशक दवाइयों व उनकी मात्रा तथा छिड़काव की सलाह दी जा रही है। इस समय कुछ क्षेत्र में चोटी भेदक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। किसान इस बीमारी को लेकर जागरूक रहें और खेतों की निगरानी करते रहें। पौधे पर बीमारी के लक्षण दिखाई देते ही उसके नियंत्रण का कार्य करें - यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी
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बिजनौर। मौसम में गर्मी बढ़ने के साथ गन्ना फसल पर कीट को खतरा मंडराने लगा है। इस समय गन्ने की पत्तियां एवं तने अपेक्षाकृत मुलायम होते हैं, जिससे विभिन्न कीट गन्ने की फसल को नुकसान पहुंचा देते हैं। गन्ना फसल पर अंकुर भेदक कीट (सूंडी) का प्रकोप जून माह तक रहता है।
गन्ना विकास विभाग की ओर से किसानों को कीट के बारे व उसके नियंत्रण के बारे में बताया जा रहा है। गन्ना विभाग चीनी मिलों की मदद से पम्फलेट व गन्ना सर्वे में लगे कर्मचारियों के माध्यम से इन बीमारियों के बारे में बताया जा रहा है। अफसरों के अनुसार अंकुर भेदक कीट गन्ना फसल में पाया जा रहा है। गन्ने के पौधे में लगी कीट मटमैले रंग का होता है। यह सूंडी पौधों के गोफ को खाती हुई नीचे की तरफ जाती है, जिसकी वजह से गोफ सूख जाती है। यह बीमारी से फसल के उत्पादन पर खासा प्रभाव दिखाई देता है। विभाग व चीनी मिल अधिकारी व कर्मचारी गोष्ठी, बैठक आदि के माध्यम से भी किसानों को गन्ना फसल में लगने वाली बीमारी व उनकी रोकथाम के बारे जानकारी दे रहे हैं। किसानों को इस कीट के लक्षण के बारे में बताया जा रहा है।
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कीट नियंत्रण को इसका करें प्रयोग
गन्न बुवाई के 45 दिन के पश्चात प्रति हेक्टेयर की दर से फिप्रोनिल 40 प्रतिशत, इमिडाक्लोप्रिड 40 प्रतिशत, डब्ल्यूजी की 500 ग्राम मात्रा प्रति हेक्टेयर की दर से एक हजार लीटर पानी के साथ मिलाकर फसल पर छिड़काव करें।
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किसानों को कीटों के प्रति जागरूक किया जा रहा है। साथ ही उनके नियंत्रण के लिए कीटनाशक दवाइयों व उनकी मात्रा तथा छिड़काव की सलाह दी जा रही है। इस समय कुछ क्षेत्र में चोटी भेदक कीट का प्रकोप देखा जा रहा है। किसान इस बीमारी को लेकर जागरूक रहें और खेतों की निगरानी करते रहें। पौधे पर बीमारी के लक्षण दिखाई देते ही उसके नियंत्रण का कार्य करें - यशपाल सिंह, जिला गन्ना अधिकारी