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Bijnor News: स्क्रीन टाइम बढ़ने से बच्चों में शारीरिक स्फूर्ति घटी

Tue, 10 Mar 2026 12:11 AM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Tue, 10 Mar 2026 12:11 AM IST
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Increased screen time reduces physical fitness in children
बिजनौर। डिजिटल युग में मोबाइल, टैबलेट और कंप्यूटर का उपयोग बच्चों के जीवन का सामान्य हिस्सा बन गया है लेकिन अधिक स्क्रीन देखने की आदत बच्चों के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव डाल रही है। बच्चों में शारीरिक स्फूर्ति, ऊर्जा और सक्रियता में कमी होे रही है। मेडिकल कॉलेज में इस समस्या के हर सप्ताह तीन बच्चे तक पहुंच रहे हैं।
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मेडिकल कॉलेज के मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. नितिन कुमार ने बताया कि पहले बच्चे स्कूल से आने के बाद बाहर खेलते थे। साइकिल चलाते थे या शारीरिक गतिविधियों में हिस्सा लेते थे। अब इनकी जगह मोबाइल गेम, वीडियो और सोशल मीडिया ने ले ली है। कई बच्चे रोजाना चार से छह घंटेे स्क्रीन पर समय बिता रहे हैं। इस वजह से उनका बैठे रहने वाला जीवन बढ़ रहा है। इसके अलावा सोचने, समझने की क्षमता भी मंद पड़ रही है। इसका प्रभाव आमतौर पर बच्चों में दिखाई देने लगा है। कई अभिभावक शिकायत लेकर चिकित्सक के पास पहुंच रहे हैं कि बच्चा थोड़ी देर खेलने या चलने के बाद ही थक जाता है।
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स्क्रीन ज्यादा देखने से बच्चों में दिख रहे यह लक्षण
-शरीर में सुस्ती और ऊर्जा की कमी
-जल्दी थक जाना
-मोटापा या वजन बढ़ना
-शारीरिक सहनशक्ति कम होना
-नींद की समस्या
-आंखों में जलन या सिरदर्द
-ध्यान और एकाग्रता में कमी
-चिड़चिड़ापन और गुस्सा
ऐसे कर सकते हैं रोकथाम
-बच्चों का दैनिक स्क्रीन समय सीमित रखें

-रोजाना कम से कम एक या दो घंटे शारीरिक खेल या आउटडोर गतिविधि करें

-घर में “नो-मोबाइल समय” तय करें, जैसे भोजन के समय

-बच्चों को खेल, योग, साइकिलिंग या खेलकूद के लिए प्रोत्साहित करें

-सोने से कम से कम एक घंटा पहले स्क्रीन बंद कर दें

-माता-पिता स्वयं भी संतुलित डिजिटल व्यवहार अपनाएं
केस नंबर एक
बिजनौर निवासी 14 वर्षीय छात्र पढ़ाई के अलावा अधिकतर समय मोबाइल पर गेम खेलता था। पहले वह क्रिकेट खेलता था, लेकिन पिछले एक वर्ष से उसकी शारीरिक गतिविधि लगभग समाप्त हो गई। अब थोड़ी देर दौड़ने पर ही सांस फूलना और अत्यधिक थकान महसूस होती थी।
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केस नंबर दो
बिजनौर निवासी 12 वर्षीय छात्रा पहले पढ़ाई में अव्वल थी। मगर, पिछले एक साल से फोन में रील देखने में ज्यादा समय बिता रही है। इससे पढ़ाई से भी ध्यान भटका और शारीरिक गतिविधि भी कम कर दी। रोजाना करीब पांच घंटे फोन चलाती है। समस्या होने से परिजन चिकित्सक के पास लेकर पहुंचे।


डिजिटल उपकरण शिक्षा और जानकारी के लिए उपयोगी हैं, लेकिन अत्यधिक उपयोग बच्चों की शारीरिक स्फूर्ति और सक्रियता को कम रहा है। संतुलित स्क्रीन उपयोग, नियमित खेलकूद और परिवार का सहयोग बच्चों के स्वस्थ विकास के लिए जरूरी है। बच्चों का स्क्रीन टाइम घटाने के लिए जरूरी है कि माता-पिता भी सीमित समय में फोन चलाएं।
....डॉ. नितिन कुमार, मानसिक रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज, बिजनौर
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