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‘पढ़ोगे हिंदी, तो बढ़ेगी हिंदी’
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बिजनौर में अमर उजाला के अभियान हिंदी हैं हम के तहत आयोजित वेबिनार में भाग लेते गणमान्य।
- फोटो : BIJNOR
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‘पढ़ोगे हिंदी, तो बढ़ेगी हिंदी’
बिजनौर। अमर उजाला के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में हिंदी के ज्ञाताओं ने हिंदी के सम्मान के लिए हिंदी भाषी लोगों से आगे आने का आह्वान किया।
वेबिनार से जुड़े प्रसिद्ध गीतकार इंद्रदेव भारती ने कहा कि हिंदी को बढ़ाने का मूल मंत्र है ‘पढ़ोगे हिंदी, तो बढ़ेगी हिंदी’ इसी मूल मंत्र पर चलते हुए समस्त अभिभावकों को बच्चों को हिंदी से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि सतेंद्र गुप्ता ने कहा कि कुछ हिंदी भाषी लोग पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से हिंदी की उपेक्षा कर रहे हैं, जो गलत है। उन्होंने कविता पढ़कर सबको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
राजकीय बालिका इंटर कॉलेज झालू की प्रधानाचार्य चारू ने कहा कि हिंदी बोलचाल की भाषा तो बन चुकी है लेकिन व्यवहारिकता में हिंदी को लाने की आवश्यकता है। शिक्षिका एवं केआरपी के पद पर नियुक्त अंशिका वैश्य का कहना है कि हिंदी किताबी भाषा तो बन गई है ,लेकिन राष्ट्रभाषा का दर्जा मिले बिना हिंदी का विकास संभव नहीं है। संसार सिंह विद्या मंदिर इंटर कॉलेज छितावर के प्रधानाचार्य तेजपाल सिंह आर्य का मानना है कि हिंदी हमारे संस्कारों में है और यह संस्कार की भाषा है। प्राथमिक विद्यालय समसपुर में कार्यरत ज्योति का कहना है कि वर्तमान में हिंदी की शैक्षिक गुणवत्ता में कमी आई है। शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए अध्यापकों को विशेष प्रयास करने चाहिए। हिंदी से जुड़े हुए कार्यक्रम नियमित रूप से चलने चाहिए। हिंदी को प्राथमिक स्तर से ही अनिवार्य करना बहुत जरूरी है।
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बिजनौर। अमर उजाला के अभियान ‘हिंदी हैं हम’ के अंतर्गत आयोजित वेबिनार में हिंदी के ज्ञाताओं ने हिंदी के सम्मान के लिए हिंदी भाषी लोगों से आगे आने का आह्वान किया।
वेबिनार से जुड़े प्रसिद्ध गीतकार इंद्रदेव भारती ने कहा कि हिंदी को बढ़ाने का मूल मंत्र है ‘पढ़ोगे हिंदी, तो बढ़ेगी हिंदी’ इसी मूल मंत्र पर चलते हुए समस्त अभिभावकों को बच्चों को हिंदी से जोड़ने का प्रयास करना चाहिए। वरिष्ठ साहित्यकार एवं कवि सतेंद्र गुप्ता ने कहा कि कुछ हिंदी भाषी लोग पाश्चात्य सभ्यता के प्रभाव से हिंदी की उपेक्षा कर रहे हैं, जो गलत है। उन्होंने कविता पढ़कर सबको हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाएं दीं।
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राजकीय बालिका इंटर कॉलेज झालू की प्रधानाचार्य चारू ने कहा कि हिंदी बोलचाल की भाषा तो बन चुकी है लेकिन व्यवहारिकता में हिंदी को लाने की आवश्यकता है। शिक्षिका एवं केआरपी के पद पर नियुक्त अंशिका वैश्य का कहना है कि हिंदी किताबी भाषा तो बन गई है ,लेकिन राष्ट्रभाषा का दर्जा मिले बिना हिंदी का विकास संभव नहीं है। संसार सिंह विद्या मंदिर इंटर कॉलेज छितावर के प्रधानाचार्य तेजपाल सिंह आर्य का मानना है कि हिंदी हमारे संस्कारों में है और यह संस्कार की भाषा है। प्राथमिक विद्यालय समसपुर में कार्यरत ज्योति का कहना है कि वर्तमान में हिंदी की शैक्षिक गुणवत्ता में कमी आई है। शैक्षिक गुणवत्ता को बढ़ाने के लिए अध्यापकों को विशेष प्रयास करने चाहिए। हिंदी से जुड़े हुए कार्यक्रम नियमित रूप से चलने चाहिए। हिंदी को प्राथमिक स्तर से ही अनिवार्य करना बहुत जरूरी है।
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