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पढ़ा नहीं गया तो श्योनाथ ने फाड़ दिया था शपथ का पर्चा

Sun, 30 Jan 2022 10:36 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 30 Jan 2022 10:36 PM IST
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If it was not read, then Sheonath had torn the oath sheet
श्योनाथ सिंह - फोटो : BIJNOR
पढ़ा नहीं गया तो श्योनाथ ने फाड़ दिया था शपथ का पर्चा
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अचल चौधरी
बिजनौर। जिले में एक विधायक श्योनाथ सिंह ऐसे भी रहे हैं, जिन्होंने मंत्री पद की शपथ लेते हुए पर्चा फाड़ दिया था। जिसे समझा गया कि डिप्टी मिनिस्टर के पद से श्योनाथ सिंह खुश नहीं हैं। जिसके तुरंत बाद ही उन्हें राज्य मंत्री बनाया गया। हालांकि उन्होंने शपथ लेने के लिए थमाया गया पर्चा पढ़ नहीं पाने के कारण फाड़ दिया था। क्योंकि श्योनाथ सिंह निरक्षर थे, केवल हस्ताक्षर करना जानते थे।
चौधरी चरण सिंह ने कांग्रेस से बगावत करने के बाद तीन फरवरी 1967 को उत्तर प्रदेश में संयुक्त मोर्चा की सरकार बनाई थी। उस वक्त जनसंघ के 90 विधायक थे। चौधरी चरण सिंह मुख्यमंत्री थे, तभी बिजनौर की स्योहारा सीट से श्योनाथ सिंह विधायक थे। वरिष्ठ कांग्रेस नेता मुनिदेव शर्मा बताते हैं कि बिजनौर के डीएम का तबादला नहीं होने पर श्योनाथ सिंह खफा हो गए। श्योनाथ सिंह ने पूर्व सीएम चंद्रभान गुप्ता से मुलाकात की। उनके साथ-साथ साहनपुर स्टेट के राजा और विधायक देवेंद्र सिंह तथा विधायक रामपाल सिंह भी चंद्रभान गुप्ता के खेमे में चले गए। इतना ही नहीं सूबे में 40 विधायक बागी हो गए।
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श्योनाथ सिंह सभी विधायकों को लेकर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के पास पहुंचे। पहले तो इंदिरा गांधी ने श्योनाथ सिंह से मिलने से मना कर दिया। बाद में मालूम हुआ कि बागी विधायकों को लेकर आए हैं तो मुलाकात की। 25 फरवरी 1968 को चौधरी चरण सिंह की सरकार गिर गई। एक साल तक प्रदेश में राष्ट्रपति शासन लगा रहा। 26 फरवरी 1969 को बनी सरकार में चंद्रभान गुप्ता सीएम बने। जिसमें श्योनाथ सिंह को डिप्टी मिनिस्टर का पद दिया गया। मुनिदेव शर्मा बताते हैं कि चंद्रभान गुप्ता की सरकार में श्योनाथ सिंह डिप्टी मिनिस्टर की शपथ ले रहे थे। उन्हें जो शपथ के लिए पर्चा दिया गया, उसे उन्होंने फाड़ दिया। बताते हैं कि पढ़ नहीं पाने की वजह से पर्चा फाड़ा था, लेकिन सीएम चंद्रभान गुप्ता ने समझा कि डिप्टी मिनिस्टर पद से श्योनाथ सिंह खुश नहीं हैं। जिसके बाद उन्हें गन्ना राज्यमंत्री बनाया गया। (संवाद)
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अपने ही पक्ष में सुनाया फैसला
कांठ क्षेत्र के गांव सलीमपुर गढ़ी के रहने वाले श्योनाथ सिंह ने सहकारिता से राजनीति में कदम रखा। श्योनाथ सिंह स्योहारा विधानसभा से पहली बार विधायक बने। बताते हैं कि इससे पहले 60 के दशक में ही स्योहारा गन्ना समिति का चुनाव हुआ। जिसमें श्योनाथ सिंह संचालक बने। अब सभापति बनने के लिए जाट और ठाकुर आमने-सामने आ गए। दोनों ही गुटों के पास बराबर संचालक वोट थे। ऐसे में दोनों ही पक्ष श्योनाथ सिंह के पास पहुंचे और पंच बना दिया। बताते हैं कि श्योनाथ सिंह ने कहा कि दोनों पक्षों से अलग-अलग बात कर ली है, कोई मानने को तैयार नहीं है। ऐसे में मैं ही सभापति बन जाता हूं। आखिरकार दोनों पक्षों को पंच के समर्थन मेें आना ही पड़ा। सभापति बनने के बाद उन्होंने विधानसभा की राजनीति में कदम रखा। 1980 और 1985 में कांग्रेस के टिकट पर विधायक बने।
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