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मस्जिद की देखभाल कर रहा हिंदू परिवार
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मस्जिद की देखभाल कर रहा हिंदू परिवार
कोतवाली देहात (बिजनौर)। रमजान का महीना है और ऐसे में बात सौहार्द की हो तो कोतवाली देहात के ग्राम हीमपुर मानक उर्फ बढ़ापुर का जिक्र हर किसी की जुबां पर आ जाता है। यहां हिंदू-मुस्लिम एकता का इतिहास संजोये एक मस्जिद की देखभाल गांव के हिंदू लोग कर रहे हैं। गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता, इसके बावजूद भी यहां मस्जिद बनी हुई है।
थाना कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम हीमपुर मानक उर्फ बढ़ापुर में एक मस्जिद आज भी खड़ी है। बिजनौर के इतिहास के जानकार तैय्यब अली के अनुसार यह मस्जिद लगभग 200 साल पुरानी बताई जाती है। आजादी से पूर्व ग्राम बढ़ापुर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के काफी लोग रहते थे, लेकिन देश की आजादी के बाद गांव के सभी मुस्लिम पाकिस्तान चले गए। पिछले 74 सालों से गांव में कोई भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है। दशकों से गांव में रहने वाले मास्टर चौधरी धीर सिंह मस्जिद की देखभाल करते थे। मस्जिद की देखभाल उनके बाद उनके पुत्र चौधरी छत्रपाल सिंह करते हैं और त्योहारों पर मस्जिद की सफाई भी करवाते हैं। ग्राम बढ़ापुर निवासी अरुण कुमार, कामेंद्र सिंह बताते हैं कि आजादी के बाद ज्यादातर मुस्लिम परिवार भी आसपास के शहरों में जा बसे। इसके बावजूद गांव के जाट बिरादरी के लोग मस्जिद को धरोहर मानते हैं। अरुण कुमार के अनुसार ईद से पहले ही मस्जिद की सफाई कराई जाएगी जो कि हर साल कराई जाती है।
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कोतवाली देहात (बिजनौर)। रमजान का महीना है और ऐसे में बात सौहार्द की हो तो कोतवाली देहात के ग्राम हीमपुर मानक उर्फ बढ़ापुर का जिक्र हर किसी की जुबां पर आ जाता है। यहां हिंदू-मुस्लिम एकता का इतिहास संजोये एक मस्जिद की देखभाल गांव के हिंदू लोग कर रहे हैं। गांव में एक भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता, इसके बावजूद भी यहां मस्जिद बनी हुई है।
थाना कोतवाली देहात क्षेत्र के ग्राम हीमपुर मानक उर्फ बढ़ापुर में एक मस्जिद आज भी खड़ी है। बिजनौर के इतिहास के जानकार तैय्यब अली के अनुसार यह मस्जिद लगभग 200 साल पुरानी बताई जाती है। आजादी से पूर्व ग्राम बढ़ापुर में हिंदू और मुस्लिम समुदाय के काफी लोग रहते थे, लेकिन देश की आजादी के बाद गांव के सभी मुस्लिम पाकिस्तान चले गए। पिछले 74 सालों से गांव में कोई भी मुस्लिम परिवार नहीं रहता है। दशकों से गांव में रहने वाले मास्टर चौधरी धीर सिंह मस्जिद की देखभाल करते थे। मस्जिद की देखभाल उनके बाद उनके पुत्र चौधरी छत्रपाल सिंह करते हैं और त्योहारों पर मस्जिद की सफाई भी करवाते हैं। ग्राम बढ़ापुर निवासी अरुण कुमार, कामेंद्र सिंह बताते हैं कि आजादी के बाद ज्यादातर मुस्लिम परिवार भी आसपास के शहरों में जा बसे। इसके बावजूद गांव के जाट बिरादरी के लोग मस्जिद को धरोहर मानते हैं। अरुण कुमार के अनुसार ईद से पहले ही मस्जिद की सफाई कराई जाएगी जो कि हर साल कराई जाती है।
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