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शोध में बनाए रखनी होगी वैश्विक गुणवत्ता
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शोध में बनाए रखनी होगी वैश्विक गुणवत्ता
बिजनौर। वर्धमान कॉलेज में शोधकर्ताओं का एक सप्ताह तक चलने वाला फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम अर्थात एफडीपी ऑनलाइन शुरू हुआ। जिसमें देश के 20 विश्वविद्यालयों के करीब 177 शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय अनुभवों को साझा करेंगे। शोध के क्षेत्र में वैश्विक गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर रहा।
वर्धमान कॉलेज और महात्मा हंसराज शिक्षक विकास केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे कार्यक्रम का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों के शोधार्थियों व प्राध्यापकों को लाभ पहुंचाना है। एफडीपी कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। एफडीपी संयोजक डॉ. मुकेश कुमार, वर्धमान कॉलेज ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए एक सप्ताह की रूपरेखा प्रस्तुत की।
डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि उद्घाटन कार्यक्रम में भारत के 19 राज्यों से, 62 विश्वविद्यालयों के 37 विषयों के 177 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। प्राचार्य, हंसराज कॉलेज, दिल्ली प्रोफेसर राम व प्राचार्य, वर्धमान कॉलेज, प्रोफेसर सीएम जैन ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में इस एफडीपी के महत्व को समझाया। मुख्य अतिथि डॉ. फ़ैजा अब्बासी, डायरेक्टर, यूजीसी एचआरडीसी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से क्रियान्वित विभिन्न उपयोगी कार्यक्रमों से देश के दूरदराज इलाकों में बसे शोधार्थी व प्राध्यापक अपनी कार्यक्षमता और शोधक्षमता को आसानी से बढ़ा पा रहे हैं।
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शोधकर्ताओं के सवाल जवाब
डॉक्टर साधना यादव सहायक प्रोफेसर श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय वाराणसी ने पूछा की जर्नल की कैटेगारी का कैसे चयन करे। इस का जवाब देते हुए डॉ. फैजा अब्बासी ने कहा कि कम से कम स्कोप्स व यूजीसी केयर लिस्टेड जर्नलमें ही शोध पत्र प्रकाशित करें। प्रोफेसर नीता शाह गुजरात ने शोध के शीर्षक व क्षेत्र को चुनने की रणनीति के बारे मे बताया। द्वितीय सत्र की वक्ता डॉक्टर शाह का धन्यवाद ज्ञापित डॉक्टर ओमप्रकाश सिंह ने किया और एफडीपी आयोजन समिति, वर्धमान कॉलेज के सदस्य के रूप म डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. साबिर, डॉ. वैशाली पूनिया, डॉ. निदा खान व डॉ. ओपी सिंह शामिल रहे।
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बिजनौर। वर्धमान कॉलेज में शोधकर्ताओं का एक सप्ताह तक चलने वाला फैकल्टी डेवलपमेंट प्रोग्राम अर्थात एफडीपी ऑनलाइन शुरू हुआ। जिसमें देश के 20 विश्वविद्यालयों के करीब 177 शोधकर्ता अंतरराष्ट्रीय व राष्ट्रीय अनुभवों को साझा करेंगे। शोध के क्षेत्र में वैश्विक गुणवत्ता बनाए रखने पर जोर रहा।
वर्धमान कॉलेज और महात्मा हंसराज शिक्षक विकास केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में हो रहे कार्यक्रम का उद्देश्य देश के विभिन्न क्षेत्रों के शोधार्थियों व प्राध्यापकों को लाभ पहुंचाना है। एफडीपी कार्यक्रम का शुभारंभ सरस्वती वंदना से हुआ। एफडीपी संयोजक डॉ. मुकेश कुमार, वर्धमान कॉलेज ने प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए एक सप्ताह की रूपरेखा प्रस्तुत की।
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डॉ. मुकेश कुमार ने बताया कि उद्घाटन कार्यक्रम में भारत के 19 राज्यों से, 62 विश्वविद्यालयों के 37 विषयों के 177 प्रतिभागियों ने प्रतिभाग किया। प्राचार्य, हंसराज कॉलेज, दिल्ली प्रोफेसर राम व प्राचार्य, वर्धमान कॉलेज, प्रोफेसर सीएम जैन ने अपने अध्यक्षीय वक्तव्य में इस एफडीपी के महत्व को समझाया। मुख्य अतिथि डॉ. फ़ैजा अब्बासी, डायरेक्टर, यूजीसी एचआरडीसी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय ने कहा कि ऑनलाइन माध्यम से क्रियान्वित विभिन्न उपयोगी कार्यक्रमों से देश के दूरदराज इलाकों में बसे शोधार्थी व प्राध्यापक अपनी कार्यक्षमता और शोधक्षमता को आसानी से बढ़ा पा रहे हैं।
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शोधकर्ताओं के सवाल जवाब
डॉक्टर साधना यादव सहायक प्रोफेसर श्री अग्रसेन कन्या महाविद्यालय वाराणसी ने पूछा की जर्नल की कैटेगारी का कैसे चयन करे। इस का जवाब देते हुए डॉ. फैजा अब्बासी ने कहा कि कम से कम स्कोप्स व यूजीसी केयर लिस्टेड जर्नलमें ही शोध पत्र प्रकाशित करें। प्रोफेसर नीता शाह गुजरात ने शोध के शीर्षक व क्षेत्र को चुनने की रणनीति के बारे मे बताया। द्वितीय सत्र की वक्ता डॉक्टर शाह का धन्यवाद ज्ञापित डॉक्टर ओमप्रकाश सिंह ने किया और एफडीपी आयोजन समिति, वर्धमान कॉलेज के सदस्य के रूप म डॉ. मनीष गुप्ता, डॉ. साबिर, डॉ. वैशाली पूनिया, डॉ. निदा खान व डॉ. ओपी सिंह शामिल रहे।