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दो दिन बाद भी नहीं बुझाई जा सकी वन क्षेत्र में लगी आग
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हरेवली क्षेत्र के साहूवाला वन क्षेत्र में लगी भीषण आग।
- फोटो : BIJNOR
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दो दिन बाद भी नहीं बुझाई जा सकी वन क्षेत्र में लगी आग
हरेवली। साहूवाला वन क्षेत्र में लगी भीषण आग को दो दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक आग को बुझाया नहीं जा सका है। वन विभाग की सारी कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। लाखों रुपये की वन संपदा आग में जलकर राख होती जा रही है। जंगली जीव-जंतु आग में जलकर मर रहे हैं।
साहूवाला वन क्षेत्र में मंगलवार को आग लग गई थी। बुधवार तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। आग तेजी से फैलती जा रही है। आग ने अब तक वन क्षेत्र के करीब तीन किमी इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है। वन क्षेत्र से सटे गांव शाहनगर कुराली, रामनगर गोसाई, भगौता आदि गांव के किसान आग को लेकर बहुत चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि हर वर्ष वन क्षेत्र में आग लगती है जिसमें किसानों की सैकड़ों बीघा गन्ने व गेहूं की फसल जल जाती है। किसानों का आरोप है कि वन विभाग आग बुझाने में हर साल नाकाम रहता है। सारा जंगल जलाने के बाद आग स्वयं ही बुझती है। आग से बचने के लिए जंगली जानवर आबादी की तरफ दौड़ रहे हैं और किसानों की फसलों को उजाड़ रहे हैं।
वन क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र सिंह रावत का दावा है कि मंगलवार को लगी आग बुझा दी गई थी। यदि बुधवार को भी अगर आग लगी है तो टीम को भेजकर आग को बुझाया जाएगा।
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फायरलाइन निकाल कर बुझाई जाती है आग
वन क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि वन क्षेत्र में पानी की व्यवस्था नहीं होने से आग को बुझाने के लिए फायर लाइन का सहारा लिया जाता है। फायर लाइन निकालकर आग का संपर्क काट दिया जाता है और आग वहीं सिमट जाती है।
ये हैं वनों में आग लगने के कारण
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि वन क्षेत्र में आग लगने के अनेक कारण है। तेज हवा चलने पर बांसों के बीच घर्षण से निकली चिंगारी तथा वनों में जाने वाले राहगीरों के जलती बीड़ी या सिगरेट फेंक देने से आग लग जाती है। शरारती तत्वों एवं पशु चराने वाले भी इसका कारण होते हैं। गर्मी में वनों में सूखे पत्ते अधिक मात्रा में होते हैं। मामूली चिंगारी भी विकराल आग को जन्म दे देती है।
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हरेवली। साहूवाला वन क्षेत्र में लगी भीषण आग को दो दिन हो चुके हैं, लेकिन अभी तक आग को बुझाया नहीं जा सका है। वन विभाग की सारी कोशिशें नाकाम साबित हो रही हैं। लाखों रुपये की वन संपदा आग में जलकर राख होती जा रही है। जंगली जीव-जंतु आग में जलकर मर रहे हैं।
साहूवाला वन क्षेत्र में मंगलवार को आग लग गई थी। बुधवार तक आग ने विकराल रूप धारण कर लिया है। आग तेजी से फैलती जा रही है। आग ने अब तक वन क्षेत्र के करीब तीन किमी इलाके को अपनी चपेट में ले लिया है। वन क्षेत्र से सटे गांव शाहनगर कुराली, रामनगर गोसाई, भगौता आदि गांव के किसान आग को लेकर बहुत चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि हर वर्ष वन क्षेत्र में आग लगती है जिसमें किसानों की सैकड़ों बीघा गन्ने व गेहूं की फसल जल जाती है। किसानों का आरोप है कि वन विभाग आग बुझाने में हर साल नाकाम रहता है। सारा जंगल जलाने के बाद आग स्वयं ही बुझती है। आग से बचने के लिए जंगली जानवर आबादी की तरफ दौड़ रहे हैं और किसानों की फसलों को उजाड़ रहे हैं।
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वन क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र सिंह रावत का दावा है कि मंगलवार को लगी आग बुझा दी गई थी। यदि बुधवार को भी अगर आग लगी है तो टीम को भेजकर आग को बुझाया जाएगा।
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फायरलाइन निकाल कर बुझाई जाती है आग
वन क्षेत्राधिकारी वीरेंद्र सिंह रावत ने बताया कि वन क्षेत्र में पानी की व्यवस्था नहीं होने से आग को बुझाने के लिए फायर लाइन का सहारा लिया जाता है। फायर लाइन निकालकर आग का संपर्क काट दिया जाता है और आग वहीं सिमट जाती है।
ये हैं वनों में आग लगने के कारण
वन क्षेत्राधिकारी ने बताया कि वन क्षेत्र में आग लगने के अनेक कारण है। तेज हवा चलने पर बांसों के बीच घर्षण से निकली चिंगारी तथा वनों में जाने वाले राहगीरों के जलती बीड़ी या सिगरेट फेंक देने से आग लग जाती है। शरारती तत्वों एवं पशु चराने वाले भी इसका कारण होते हैं। गर्मी में वनों में सूखे पत्ते अधिक मात्रा में होते हैं। मामूली चिंगारी भी विकराल आग को जन्म दे देती है।