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वरदान बना फॉर्मिंग मशीनरी बैंक: दो हजार से ज्यादा किसान अब तक उठा चुके हैं फायदा, किराए पर उपलब्ध कराए जा रहे हैं कृषि यंत्र
Sun, 13 Feb 2022 11:49 AM IST
Dimple Sirohi
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला नेटवर्क, बिजनौर
Published by: Dimple Sirohi
Updated Sun, 13 Feb 2022 11:49 AM IST
सार
बैंकों में मल्चर, पैड़ी प्रबंध यंत्र व मिट्टी पलट हल शामिल हैं। अब तक दो हजार से ज्यादा किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। किराए की रकम एकत्र होती है। उस रकम को यंत्रों की मरम्मत पर ही खर्च किया जाता है।
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कृषि यंत्र
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले में गन्ना विभाग की ओर से गन्ना समितियों में फॉर्मिंग मशीनरी बैंकों को खोला गया है। किसान इन बैंकों से किराए पर कृषि यंत्रों को लेकर उपयोग कर सकते हैं। इसके लिए किसानों को सीधे बैंकों में जाना है। जिस कृषि यंत्र की उन्हें जरूरत है, उस कृषि यंत्र को लेकर खेत में जाकर काम करना है। अब तक दो हजार से ज्यादा किसान इसका फायदा उठा चुके है। 22 रुपये प्रति घंटे के हिसाब से कृषि यंत्रों को बैंकों से उपलब्ध कराया जा रहा है।
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धामपुर गन्ना समिति के विशेष सचिव मनोज कुमार कोंट ने बताया कि गन्ना विभाग की ओर से किसानों को यह बड़ी सुविधा दी जा रही है। पहले किसानों को पैड़ी गन्ना प्रबंधन करने को मल्चर, खेती की गहरी जुताई करने के लिए मिट्टी पलट हल नहीं मिलता था। लेकिन अब यह सब आसानी के साथ उपलब्ध कराया जा रहा है।
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इन यंत्रों को चलाने के लिए किसान के पास कम से कम 40 से साठ हार्स पावर की क्षमता का ट्रैक्टर होना चाहिए। क्योंकि इससे कम क्षमता का ट्रैक्टर इन यंत्रों को चला नहीं सकेगा। जिले में नौ गन्ना समितियां हैं, सभी में बैंक स्थापित किए गए हैं। इनका उद्देश्य किसानों को सस्ते में कृषि उपकरणों को उपलब्ध कराना है। किसानों का कहना है कि इन यंत्रों को उपयोग में लाने के बाद कम लागत पर अच्छी खेती हो रही है।
ये उपकरण हैं बैंक में उपलब्ध
बैंकों में मल्चर, पैड़ी प्रबंध यंत्र (खेत में पड़ी गन्ने की पत्ती और खरपतवारों की कुट्टी काटने वाली मशीन) व मिट्टी पलट हल शामिल हैं। धामपुर समिति में करीब 70 हजार किसान हैं। अब तक दो हजार से ज्यादा किसान इस योजना का लाभ उठा चुके हैं। किराए की रकम एकत्र होती है। उस रकम को यंत्रों की मरम्मत पर ही खर्च किया जाता है।
एक हजार किसानों पर 50 लाख बकाया
अधिकारियों ने बताया कि समिति के एक हजार किसान ऋण लेने के बाद भी डिफाल्टर हो गए हैं। जो प्रयास करने के बाद भी ऋण को जमा नहीं कर रहे हैं। वर्तमान में इनमें से अधिकांश की मौत हो चुकी है। कुछ ने अपनी जमीन को बेच डाला है। ऐसे में संबंधित किसानों की जमीन को तहसील में नीलाम कर बकाया को वसूलने का प्रयास किया जा रहा है।