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परिवर्तन व तकनीकी पगडंडी पर खेती बनी लाभकारी
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बिजनौर कलक्ट्रेट में मत्सय पालन व मोती की उत्कृष्ट खेती करने वाले किसान बिजेंद सिंह को सम्मानित ?
- फोटो : BIJNOR
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परिवर्तन व तकनीकी पगडंडी पर खेती बनी लाभकारी
बिजनौर। खर्च ज्यादा आय कम होने से खेती नुकसान का सौदा साबित हो रही है। इस कारण किसानों की नई पीढ़ी खेती करने से बच रही है और खेती की जगह अन्य कार्य करना पसंद कर रही है। जिले के एक युवा किसान विजेंद्र ने खेती करने में परिवर्तन करते हुए नई तकनीक का सहारा लिया, तो हानि वाली खेती लाभकारी बन गई। विजेंद्र खेतों में तालाब बनाकर मत्स्य पालन, मोती तथा गोबर आधारित धूपबत्ती उत्पाद कर रहे हैं। वह उत्पाद को ऑनलाइन बिक्री कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
गांव रामखेड़ा के युवा किसान विजेंद्र सिंह पुत्र तेजपाल सिंह मत्स्य पालन, मोती एवं गोबर आधारित धूपबत्ती उत्पादन कर ऑनलाइन बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में अपनी तीन बीघा भूमि में तालाब बनाकर मत्स्य पालन का कार्य प्रारंभ किया। ग्रास कार्प एवं गोल्डन प्रजाति की मछली का उत्पादन कर सालाना एक लाख की आय प्राप्त की। 2019 से उन्होंने मत्स्य उत्पादन की नवोन्मेषी तकनीक, बायोफ्लॉक को अपनाया। बायोफ्लॉक को वह पॉलीहाउस के अंदर शीतकाल में करते हैं। शीतकाल में जब मत्स्य उत्पादन कम और मांग ज्यादा होती है, तो वह बायोफ्लॉक के आठ टैंक से चार लाख प्रति सीजन की शुद्ध आय प्राप्त करते हैं। साथ ही तीन हजार मोती प्रति वर्ष उत्पादन करते हैं। 2022 में गोबर आधारित धूपबत्ती उत्पादन का कार्य भी शुरू किया है। अपना ब्रांड बनाकर मोती, धूपबत्ती ऑनलाइन बाजार में आसानी से बिक रही है। विजेंद्र सिंह को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक गिरीश चंद, जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र, एसडीओ मनोज रावत, योगेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।
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बिजनौर। खर्च ज्यादा आय कम होने से खेती नुकसान का सौदा साबित हो रही है। इस कारण किसानों की नई पीढ़ी खेती करने से बच रही है और खेती की जगह अन्य कार्य करना पसंद कर रही है। जिले के एक युवा किसान विजेंद्र ने खेती करने में परिवर्तन करते हुए नई तकनीक का सहारा लिया, तो हानि वाली खेती लाभकारी बन गई। विजेंद्र खेतों में तालाब बनाकर मत्स्य पालन, मोती तथा गोबर आधारित धूपबत्ती उत्पाद कर रहे हैं। वह उत्पाद को ऑनलाइन बिक्री कर अच्छा मुनाफा कमा रहे हैं।
गांव रामखेड़ा के युवा किसान विजेंद्र सिंह पुत्र तेजपाल सिंह मत्स्य पालन, मोती एवं गोबर आधारित धूपबत्ती उत्पादन कर ऑनलाइन बेच रहे हैं। उन्होंने बताया कि वर्ष 2018 में अपनी तीन बीघा भूमि में तालाब बनाकर मत्स्य पालन का कार्य प्रारंभ किया। ग्रास कार्प एवं गोल्डन प्रजाति की मछली का उत्पादन कर सालाना एक लाख की आय प्राप्त की। 2019 से उन्होंने मत्स्य उत्पादन की नवोन्मेषी तकनीक, बायोफ्लॉक को अपनाया। बायोफ्लॉक को वह पॉलीहाउस के अंदर शीतकाल में करते हैं। शीतकाल में जब मत्स्य उत्पादन कम और मांग ज्यादा होती है, तो वह बायोफ्लॉक के आठ टैंक से चार लाख प्रति सीजन की शुद्ध आय प्राप्त करते हैं। साथ ही तीन हजार मोती प्रति वर्ष उत्पादन करते हैं। 2022 में गोबर आधारित धूपबत्ती उत्पादन का कार्य भी शुरू किया है। अपना ब्रांड बनाकर मोती, धूपबत्ती ऑनलाइन बाजार में आसानी से बिक रही है। विजेंद्र सिंह को जिलाधिकारी उमेश मिश्रा ने प्रशस्ति-पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर उप कृषि निदेशक गिरीश चंद, जिला कृषि अधिकारी डॉ. अवधेश मिश्र, एसडीओ मनोज रावत, योगेंद्र सिंह आदि उपस्थित रहे।
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