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सर्वे के इंतजार में रुका मास्टर प्लान का विस्तार
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वर्तमान बिजनौर शहर का मास्टर प्लान
- फोटो : BIJNOR
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सर्वे के इंतजार में रुका मास्टर प्लान का विस्तार
बिजनौर। शहर के लिए मास्टर प्लान का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। एक साल पहले मास्टर प्लान के लिए सर्वे की कवायद तो हुई, लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंची। हालात यह हो गए कि सर्वे के लिए एजेंसी तक का चयन नहीं हो सका। वहीं शहर के लागू मास्टर प्लान की वैधता 2011 में ही समाप्त हो चुकी है। लगातार बढ़ती आबादी के बावजूद शहर को पिछले 11 सालों से नया मास्टर प्लान नहीं मिला। जिला मुख्यालय के बाहरी क्षेत्रों में जहां इससे अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा मिला तो वहीं सुनियोजित विकास पिछड़ गया।
बिजनौर शहर पिछले 11 सालों से नए मास्टर प्लान का इंतजार कर रहा है। नए सर्वे पुराने मास्टर प्लान से अलग करीब 38 हजार बीघा जमीन का सर्वे होना है। पुराने मास्टर प्लान की बात करें तो वह 2011 में ही समाप्त हो गया था। इसके बाद नया मास्टर प्लान नहीं बना। पिछले एक साल से प्रशासन नया मास्टर प्लान बनाने के लिए सर्वे कराने की तैयारी कर रहा है, लेकिन यह तैयारी अभी तक अंजाम तक नहीं पहुंची। हालांकि अब फिर से एजेंसी की तलाश शुरू कर दी गई है।
2031 तक लागू होगा नया मास्टर प्लान
अब प्रशासन ने नए सिरे से वर्ष 2031 तक का मास्टर प्लान बनाने की तैयारी की है। नए मास्टर प्लान के लिए के बाहर क्षेत्रों का सर्वे होना है। इसमें करीब 3200 हेक्टेयर जमीन शामिल की जाएगी। विनियमित क्षेत्र से इसकी पूरी रूप रेखा भी बन चुकी है, बस इंतजार है तो सर्वे करने वाली संस्था का। जो जीपीएस और अन्य तमाम तकनीक के जरिए सर्वे कर एक नया नक्शा बनाएगी।
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नए सर्वे में नई ग्रीन बेल्ट बनेंगी
नए मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट का निर्धारण भी नए सिरे से होना है। ऐसे में जहां कई भू माफिया जो कृषि भूमि पर कॉलोनी काटने की प्लानिंग कर रहे हैं, उनकी मंशा पर पानी फिर सकता है। वहीं कुछ को राहत भी मिल सकती है। शहर से बाहर काटी जा रही कॉलोनियों के नक्शे पास कराना भी मजबूरी हो जाएगा।
नए मास्टर प्लान के यह होंगे फायदे
- कॉलोनाइजर को पहले नक्शा पास कराना होगा।
- कॉलोनी में निर्धारित सड़क, पार्क, बिजली की सुविधा देनी होगी।
- मकान नक्शा पास होने के बाद ही बनेंगे, जो वैध होंगे।
- जमीनों के सर्किल रेट नए सिरे से तय हो सकते हैं।
- कॉलोनाइजर खरीदारों से आसानी से धोखाधड़ी नहीं कर पाएंगे।
नए मास्टर प्लान से इन्हें होगा नुकसान
- अवैध कॉलोनी बनाना मुश्किल हो जाएगा।
- कृषि भूमि, कॉमर्शियल भूमि पर आवासीय कॉलोनी नहीं बनेगी।
- प्लाटिंग और कॉलोनी के नाम पर धोखाधड़ी घटेंगी।
मैंने कुछ समय पहले ही चार्ज लिया है। नए मास्टर प्लान के सर्वे के लिए शीघ्र ही एजेंसी का चयन किया जाना है। इसकी फाइल मंगवाई है। सर्वे के बाद ही इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
- मोहित कुमार, एसडीएम सदर
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बिजनौर। शहर के लिए मास्टर प्लान का इंतजार लगातार लंबा होता जा रहा है। एक साल पहले मास्टर प्लान के लिए सर्वे की कवायद तो हुई, लेकिन अंजाम तक नहीं पहुंची। हालात यह हो गए कि सर्वे के लिए एजेंसी तक का चयन नहीं हो सका। वहीं शहर के लागू मास्टर प्लान की वैधता 2011 में ही समाप्त हो चुकी है। लगातार बढ़ती आबादी के बावजूद शहर को पिछले 11 सालों से नया मास्टर प्लान नहीं मिला। जिला मुख्यालय के बाहरी क्षेत्रों में जहां इससे अवैध कॉलोनियों को बढ़ावा मिला तो वहीं सुनियोजित विकास पिछड़ गया।
बिजनौर शहर पिछले 11 सालों से नए मास्टर प्लान का इंतजार कर रहा है। नए सर्वे पुराने मास्टर प्लान से अलग करीब 38 हजार बीघा जमीन का सर्वे होना है। पुराने मास्टर प्लान की बात करें तो वह 2011 में ही समाप्त हो गया था। इसके बाद नया मास्टर प्लान नहीं बना। पिछले एक साल से प्रशासन नया मास्टर प्लान बनाने के लिए सर्वे कराने की तैयारी कर रहा है, लेकिन यह तैयारी अभी तक अंजाम तक नहीं पहुंची। हालांकि अब फिर से एजेंसी की तलाश शुरू कर दी गई है।
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2031 तक लागू होगा नया मास्टर प्लान
अब प्रशासन ने नए सिरे से वर्ष 2031 तक का मास्टर प्लान बनाने की तैयारी की है। नए मास्टर प्लान के लिए के बाहर क्षेत्रों का सर्वे होना है। इसमें करीब 3200 हेक्टेयर जमीन शामिल की जाएगी। विनियमित क्षेत्र से इसकी पूरी रूप रेखा भी बन चुकी है, बस इंतजार है तो सर्वे करने वाली संस्था का। जो जीपीएस और अन्य तमाम तकनीक के जरिए सर्वे कर एक नया नक्शा बनाएगी।
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नए सर्वे में नई ग्रीन बेल्ट बनेंगी
नए मास्टर प्लान में ग्रीन बेल्ट का निर्धारण भी नए सिरे से होना है। ऐसे में जहां कई भू माफिया जो कृषि भूमि पर कॉलोनी काटने की प्लानिंग कर रहे हैं, उनकी मंशा पर पानी फिर सकता है। वहीं कुछ को राहत भी मिल सकती है। शहर से बाहर काटी जा रही कॉलोनियों के नक्शे पास कराना भी मजबूरी हो जाएगा।
नए मास्टर प्लान के यह होंगे फायदे
- कॉलोनाइजर को पहले नक्शा पास कराना होगा।
- कॉलोनी में निर्धारित सड़क, पार्क, बिजली की सुविधा देनी होगी।
- मकान नक्शा पास होने के बाद ही बनेंगे, जो वैध होंगे।
- जमीनों के सर्किल रेट नए सिरे से तय हो सकते हैं।
- कॉलोनाइजर खरीदारों से आसानी से धोखाधड़ी नहीं कर पाएंगे।
नए मास्टर प्लान से इन्हें होगा नुकसान
- अवैध कॉलोनी बनाना मुश्किल हो जाएगा।
- कृषि भूमि, कॉमर्शियल भूमि पर आवासीय कॉलोनी नहीं बनेगी।
- प्लाटिंग और कॉलोनी के नाम पर धोखाधड़ी घटेंगी।
मैंने कुछ समय पहले ही चार्ज लिया है। नए मास्टर प्लान के सर्वे के लिए शीघ्र ही एजेंसी का चयन किया जाना है। इसकी फाइल मंगवाई है। सर्वे के बाद ही इसकी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी।
- मोहित कुमार, एसडीएम सदर