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छोटी उम्र में दूसरों की जिंदगी बचाने का जज्बा संजोए है डॉ. असना
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डॉ. असना परवीन।
- फोटो : NAZIBABAD
छोटी उम्र में दूसरों की जिंदगी बचाने का जज्बा संजोए है डॉ. असना
नजीबाबाद। उम्र केवल 25 वर्ष, जज्बा उम्र से काफी बड़ा। एक ही संकल्प और जज्बा है, कोरोना पीड़ितों की जिंदगी को बचाना। नजीबाबाद की डॉ. असना परवीन उत्तराखंड में अपनी जान की परवाह न कर कोरोना पीड़ितों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने वाले टीम की सक्रिय सदस्य हैं।
पारस पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या फरजाना परवीन की 25 वर्षीय पुत्री डॉ. असना परवीन उत्तराखंड में दून चिकित्सालय देहरादून में कोरोना पीड़ितों की सेवा में लगी है। डॉ. असना के पिता स्व. मो. आफताब का एक ही स्वप्न था बेटी को डॉ. बनाना और देश सेवा के लिए आगे लाना। वैश्विक कोरोना महामारी से निपटने के लिए डॉ. असना परवीन भी कोरोना फाइटर्स टीम में अग्रणी है। अपने परिजनों से दूर चिकित्सा सेवा भाव को जिंदगी की मकसद बताने वाली डॉ. असना कहती है कि उसे अपनी जान से ज्यादा कोरोना पीड़ितों की जान बचाने की फिक्र है। डॉ. असना का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल्द ही देश से कोरोना वायरस का खात्मा हो जाएगा और सबकी जिंदगी एक बार फिर से मामूल पर आ जाएगी।
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नजीबाबाद। उम्र केवल 25 वर्ष, जज्बा उम्र से काफी बड़ा। एक ही संकल्प और जज्बा है, कोरोना पीड़ितों की जिंदगी को बचाना। नजीबाबाद की डॉ. असना परवीन उत्तराखंड में अपनी जान की परवाह न कर कोरोना पीड़ितों को चिकित्सा सुविधा मुहैया कराने वाले टीम की सक्रिय सदस्य हैं।
पारस पब्लिक स्कूल की प्रधानाचार्या फरजाना परवीन की 25 वर्षीय पुत्री डॉ. असना परवीन उत्तराखंड में दून चिकित्सालय देहरादून में कोरोना पीड़ितों की सेवा में लगी है। डॉ. असना के पिता स्व. मो. आफताब का एक ही स्वप्न था बेटी को डॉ. बनाना और देश सेवा के लिए आगे लाना। वैश्विक कोरोना महामारी से निपटने के लिए डॉ. असना परवीन भी कोरोना फाइटर्स टीम में अग्रणी है। अपने परिजनों से दूर चिकित्सा सेवा भाव को जिंदगी की मकसद बताने वाली डॉ. असना कहती है कि उसे अपनी जान से ज्यादा कोरोना पीड़ितों की जान बचाने की फिक्र है। डॉ. असना का कहना है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जल्द ही देश से कोरोना वायरस का खात्मा हो जाएगा और सबकी जिंदगी एक बार फिर से मामूल पर आ जाएगी।
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