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डग्गामार वाहन बन रहे जाम की वजह
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बिजनौर में रोडवेज परिसर के पास खड़े डग्गामार वाहन।
- फोटो : BIJNOR
डग्गामार वाहन बन रहे जाम की वजह
बिजनौर। जिला मुख्यालय पर डग्गामार वाहन चालक नियमों को धता बताकर वाहनों का संचालन कर रहे हैं। चेकिंग अभियान चलता है तो कुछ दिनों के लिए ये शांत हो जाते हैं तो डग्गामारी कम होती है। लेकिन थोड़े दिनों बाद फिर से ये अपने पुराने ढर्रे पर आ जाते हैं। रोजाना होने वाली इस डग्गामारी से एक ओर तो शहर में जाम से बुरे हालात रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ इससे उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बिजनौर डिपो को लगभग एक लाख रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है।
जिला मुख्यालय पर जाम का झाम शहर के लिए नासूर बनता जा रहा है। डीएम से लेकर अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के कार्यालय और आवास यहीं पर स्थित हैं। यही नहीं परिवहन मंत्री अशोक कटारिया भी जनपद बिजनौर के ही रहने वाले हैं। फिर भी जाम की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। यहां रोडवेज बस स्टैंड से चंद कदम की दूरी पर ही जिलाधिकारी का आवास है। लोगों का आरोप है कि पुलिस और परिवहन विभाग की उदासीनता के चलते जिले भर में डग्गामार वाहन दौड़ रहे हैं। रोजवेज बस स्टैंड के आसपास दूर-दूर तक ये अवैध वाहन खड़े रहतें हैं। रोडवेज बस स्टैंड की एक साइड में जिला पंचायत का डाक बंगला आ रहा है।
इन वाहनों के खड़े रहने से इस क्षेत्र में दिन भर जाम लगा रहता है। बिजनौर डिपो के अफसरों की मानें तो वे एसपी से लेकर एआरटीओ तक से कई बार शिकायत कर चुके हैं। चेकिंग होने के बाद कुछ दिनों के लिए इससे राहत मिलती है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अगर रोडवेज के अधिकारी-कर्मचारी इन चालकों से वाहन हटाने के लिए कहते हैं तो डग्गामार वाहन चालक उनसे झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। एआरटीओ प्रवर्तन मनोज सिंह का कहना है कि किसी भी हालत में डग्गामार वाहन नहीं चलने दिए जाएंगे। कई बार अभियान चलाकर डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई की गई है। जिले में यदि कोई भी वाहन चालक नियमों की अनदेखी करेगा तो उस पर कार्रवाई अवश्य की जाएगी।
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संयुक्त टीम बनाकर करेंगे कार्रवाई
एसडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि डग्गामार वाहनों के विरुद्ध, पुलिस, एआरटीओ आदि की संयुक्त टीम बनाकर कार्रवाई की जाएगी। जब तक इसका स्थायी रूप से समाधान नहीं होता, तब तक अभियान जारी रहेगा। नियमानुसार रोडवेज बस अड्डे के एक किलोमीटर के दायरे में कोई भी वाहन स्टैंड नहीं बन सकता। इसके बावजूद अन्य स्थानों को तो छोड़िए जिला मुख्यालय पर ही इसकी अवहेलना की जा रही है। एआरएम विनोद कुमार मौर्य के अनुसार रोडवेज बस अड्डे के सामने से ही हो रही डग्गामारी के कारण बिजनौर डिपो को रोजाना लगभग एक लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि वे कई बार इन डग्गामार वाहन चालकों को समझा चुके हैं, लेकिन ये मानने को तैयार नहीं हैं।
अवैध रूप से प्रेस लिखकर चलाए जा रहे वाहन
शहरवासियों का कहना है कि मंत्री जी ये डग्गामारी बंद कराकर शहर को जाम के झाम से मुक्त कराने की ओर अपना रुख कीजिए, जिससे लोग सुकून से रह सकें। रोजाना होने वाले जाम की यह समस्या सुबह से लेकर शाम तक पूरे नगर में बनी रहती है। जनपद के अन्य नगर भी इससे अछूते नहीं हैं। कुछ डग्गामारी करने वाले वाहन संचालक चेकिंग से बचने और अफसरों पर रौब गालिब करने के लिए अवैध रूप से अपने वाहनों पर प्रेस लिखवाकर संचालन कर रहे हैं। ये वाहन चालक वास्तविक प्रेस के वाहनों के लिए भी परेशानी का सबब बने हैं।
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बिजनौर। जिला मुख्यालय पर डग्गामार वाहन चालक नियमों को धता बताकर वाहनों का संचालन कर रहे हैं। चेकिंग अभियान चलता है तो कुछ दिनों के लिए ये शांत हो जाते हैं तो डग्गामारी कम होती है। लेकिन थोड़े दिनों बाद फिर से ये अपने पुराने ढर्रे पर आ जाते हैं। रोजाना होने वाली इस डग्गामारी से एक ओर तो शहर में जाम से बुरे हालात रहते हैं, वहीं दूसरी तरफ इससे उत्तर प्रदेश परिवहन निगम के बिजनौर डिपो को लगभग एक लाख रुपये प्रतिदिन का नुकसान हो रहा है।
जिला मुख्यालय पर जाम का झाम शहर के लिए नासूर बनता जा रहा है। डीएम से लेकर अन्य जिला स्तरीय अधिकारियों के कार्यालय और आवास यहीं पर स्थित हैं। यही नहीं परिवहन मंत्री अशोक कटारिया भी जनपद बिजनौर के ही रहने वाले हैं। फिर भी जाम की समस्या से छुटकारा नहीं मिल पा रहा है। यहां रोडवेज बस स्टैंड से चंद कदम की दूरी पर ही जिलाधिकारी का आवास है। लोगों का आरोप है कि पुलिस और परिवहन विभाग की उदासीनता के चलते जिले भर में डग्गामार वाहन दौड़ रहे हैं। रोजवेज बस स्टैंड के आसपास दूर-दूर तक ये अवैध वाहन खड़े रहतें हैं। रोडवेज बस स्टैंड की एक साइड में जिला पंचायत का डाक बंगला आ रहा है।
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इन वाहनों के खड़े रहने से इस क्षेत्र में दिन भर जाम लगा रहता है। बिजनौर डिपो के अफसरों की मानें तो वे एसपी से लेकर एआरटीओ तक से कई बार शिकायत कर चुके हैं। चेकिंग होने के बाद कुछ दिनों के लिए इससे राहत मिलती है, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। अगर रोडवेज के अधिकारी-कर्मचारी इन चालकों से वाहन हटाने के लिए कहते हैं तो डग्गामार वाहन चालक उनसे झगड़ा करने पर उतारू हो जाते हैं। एआरटीओ प्रवर्तन मनोज सिंह का कहना है कि किसी भी हालत में डग्गामार वाहन नहीं चलने दिए जाएंगे। कई बार अभियान चलाकर डग्गामार वाहनों पर कार्रवाई की गई है। जिले में यदि कोई भी वाहन चालक नियमों की अनदेखी करेगा तो उस पर कार्रवाई अवश्य की जाएगी।
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संयुक्त टीम बनाकर करेंगे कार्रवाई
एसडीएम सदर विक्रमादित्य सिंह मलिक ने बताया कि डग्गामार वाहनों के विरुद्ध, पुलिस, एआरटीओ आदि की संयुक्त टीम बनाकर कार्रवाई की जाएगी। जब तक इसका स्थायी रूप से समाधान नहीं होता, तब तक अभियान जारी रहेगा। नियमानुसार रोडवेज बस अड्डे के एक किलोमीटर के दायरे में कोई भी वाहन स्टैंड नहीं बन सकता। इसके बावजूद अन्य स्थानों को तो छोड़िए जिला मुख्यालय पर ही इसकी अवहेलना की जा रही है। एआरएम विनोद कुमार मौर्य के अनुसार रोडवेज बस अड्डे के सामने से ही हो रही डग्गामारी के कारण बिजनौर डिपो को रोजाना लगभग एक लाख रुपये तक का नुकसान हो रहा है। उन्होंने बताया कि वे कई बार इन डग्गामार वाहन चालकों को समझा चुके हैं, लेकिन ये मानने को तैयार नहीं हैं।
अवैध रूप से प्रेस लिखकर चलाए जा रहे वाहन
शहरवासियों का कहना है कि मंत्री जी ये डग्गामारी बंद कराकर शहर को जाम के झाम से मुक्त कराने की ओर अपना रुख कीजिए, जिससे लोग सुकून से रह सकें। रोजाना होने वाले जाम की यह समस्या सुबह से लेकर शाम तक पूरे नगर में बनी रहती है। जनपद के अन्य नगर भी इससे अछूते नहीं हैं। कुछ डग्गामारी करने वाले वाहन संचालक चेकिंग से बचने और अफसरों पर रौब गालिब करने के लिए अवैध रूप से अपने वाहनों पर प्रेस लिखवाकर संचालन कर रहे हैं। ये वाहन चालक वास्तविक प्रेस के वाहनों के लिए भी परेशानी का सबब बने हैं।