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कैदी की रिहाई से इंकार
Updated Tue, 13 Feb 2018 12:16 AM IST
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बिजनौर। हत्या के मामले में सेंट्रल जेल में आजीवन कारावास की सजा काट रहे कैदी नरेश उर्फ धांधू की समय पूर्व रिहाई पर शासन ने रोक लगा दी है।
जिले के थाना शिवालाकलां के गांव रामोरूपपुर निपवासी नरेश उर्फ धांधु ने जमीन के विवाद में अपने चार साथियों के साथ मिलकर गांव के ही गेंदा की 29 दिसंबर 1998 को हत्या कर दी थी। नरेश को तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने 12 सितंबर सन 2000 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दस जुलाई 2017 तक नरेश 18 वर्ष दो माह 18 दिन की सजा काट चुका था। जेल में नरेश का आचरण संतोषजनक रहा। इसे देखते हुए कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं महानिरीक्षक ने नरेश की रिहाई के लिए शासन को पत्र लिखा था। इस पत्र को उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव सूर्यप्रकाश सिंह सेंगर ने खारिज कर दिया है। संयुक्त सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि एसपी व डीएम ने कैदी की समय पूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की है। संबंधित न्यायालय के पीठासीन अधिकारी ने भी नरेश की समय पूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की है। सलाहकार समिति की आख्या में पाया गया है कि नरेश ने जमीनी विवाद में अपने साथियों के साथ मिलकर गेंदा की हत्या करके जघन्य अपराध किया है। इस तरह के अपराधियों की समय पूर्व रिहाई से समाज में न्याय प्रणाली के बारे में विपरीत संदेश जाएगा, इसलिए समय पूर्व रिहाई को शासन ने अस्वीकार कर दिया है।
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जिले के थाना शिवालाकलां के गांव रामोरूपपुर निपवासी नरेश उर्फ धांधु ने जमीन के विवाद में अपने चार साथियों के साथ मिलकर गांव के ही गेंदा की 29 दिसंबर 1998 को हत्या कर दी थी। नरेश को तृतीय अपर सत्र न्यायाधीश ने 12 सितंबर सन 2000 को उम्रकैद की सजा सुनाई थी। दस जुलाई 2017 तक नरेश 18 वर्ष दो माह 18 दिन की सजा काट चुका था। जेल में नरेश का आचरण संतोषजनक रहा। इसे देखते हुए कारागार प्रशासन एवं सुधार सेवाएं महानिरीक्षक ने नरेश की रिहाई के लिए शासन को पत्र लिखा था। इस पत्र को उत्तर प्रदेश शासन के संयुक्त सचिव सूर्यप्रकाश सिंह सेंगर ने खारिज कर दिया है। संयुक्त सचिव ने अपने पत्र में कहा है कि एसपी व डीएम ने कैदी की समय पूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की है। संबंधित न्यायालय के पीठासीन अधिकारी ने भी नरेश की समय पूर्व रिहाई की संस्तुति नहीं की है। सलाहकार समिति की आख्या में पाया गया है कि नरेश ने जमीनी विवाद में अपने साथियों के साथ मिलकर गेंदा की हत्या करके जघन्य अपराध किया है। इस तरह के अपराधियों की समय पूर्व रिहाई से समाज में न्याय प्रणाली के बारे में विपरीत संदेश जाएगा, इसलिए समय पूर्व रिहाई को शासन ने अस्वीकार कर दिया है।