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आंबेडकर की मूर्ति स्थापना को लेकर विवाद में मूर्ति खंडित
Updated Sat, 10 Nov 2018 11:54 PM IST
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आंबेडकर प्रतिमा हटाने पर गरमाया विवाद
स्योहारा(बिजनौर)। गांव सद्दोबरखा में शुक्रवार को कुएं पर आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर शुरू हुई प्रक्रिया का विवाद शनिवार को और बढ़ गया। दो संप्रदाय में चल रहे इस विवाद में पुलिस के समझाने पर हटाई जा रही आंबेडकर की स्थापित प्रतिमा का हाथ खंडित हो गया। इसे लेकर दलित समाज के लोग भड़क गए। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। ऐहतियातन गांव में भारी पुलिस बल तैनात है।
गांव सद्दोबरखा में पहले तीन कुएं थे। ग्रामीणों के अनुसार इनमें से एक कुआं मुस्लिम आबादी में था। इसे मुस्लिम समाज ने पाट दिया था। दूसरा कुआं सवर्ण आबादी में था। इसे भी पाट लिया गया। तीसरा कुआं दलित आबादी के पास में स्थित है। इसे ग्राम प्रधान लईक अहमद अंसारी ने एक सप्ताह पूर्व पाट दिया था। दलित समाज के लोग इस पर भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कराना चाहते थे। शुक्रवार की रात दलित समाज के लोगों ने कुएं के पास प्रतिमा रखने के लिए चबूतरा बनवाया। आरोप है कि ग्राम प्रधान के भाई आरिफ ने अपने कुछ साथियों के साथ मौके पर पहुंचकर चबूतरे को लात मार कर तोड़ दिया। इसे लेकर दलित समाज के लोगों में रोष व्याप्त हो गया।
शनिवार को दलित समाज के लोगों ने चबूतरे को ठीक कर उस पर भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करा दी। इस पर मुस्लिम समाज के लोगों के एतराज किया। घटना स्थल पर पहुंचे थानाध्यक्ष ने दोनों पक्षों के लोगों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद थानाध्यक्ष ने दलित समाज के लोगों को इस बात के लिए राजी कर लिया कि एसडीएम से स्वीकृति लेकर ही प्रतिमा स्थापित की जाए। इसके बाद वहां से स्थापित प्रतिमा को हटवा दिया गया। इस दौरान प्रतिमा का एक हाथ खंडित हो गया। इसे लेकर दलित समाज के लोगों में रोष व्याप्त हो गया। दलित समाज के मोनू, सतीश, दलवीर, जयवीर, लवली, नीटू, अमित, बिजेंद्र, जगपाल सिंह, दिले, सुखदेव का कहना है कि जब गांव के तीन कुओं में एक पर सवर्ण समाज, एक पर मुस्लिम बिरादरी के लोगों का कब्जा है तो दलित बस्ती के कुएं पर समाज का हक होना चाहिए। आरोप है कि ग्राम प्रधान इस पर भी कब्जा करना चाहता है। इस कुएं पर बने चबूतरे पर दलित समाज के लोग पहले से ही पूजा करते आ रहे हैं। अब अगर इस कुएं के किनारे पर डा. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा लगाना चाहते है तो इस पर एतराज गलत है। दूसरे पक्ष के ग्राम प्रधान लईक अहमद, आरिफ, आमिर, राहत अली, मुस्तकीम, वसीम अंसारी, सलीम अंसारी, नदीम लतीफ का कहना है कि दलित समाज के लोग कुएं पर प्रतिमा लगा कर नई प्रथा शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं।
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थानाध्यक्ष अरिहंत कुमार सिद्धार्थ का कहना है कि फिलहाल प्रतिमा हटवा दी गई है। अब गांव में किसी प्रकार का कोई तनाव नहीं है। फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।
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स्योहारा(बिजनौर)। गांव सद्दोबरखा में शुक्रवार को कुएं पर आंबेडकर की प्रतिमा स्थापना को लेकर शुरू हुई प्रक्रिया का विवाद शनिवार को और बढ़ गया। दो संप्रदाय में चल रहे इस विवाद में पुलिस के समझाने पर हटाई जा रही आंबेडकर की स्थापित प्रतिमा का हाथ खंडित हो गया। इसे लेकर दलित समाज के लोग भड़क गए। फिलहाल गांव में तनावपूर्ण शांति बनी हुई है। ऐहतियातन गांव में भारी पुलिस बल तैनात है।
गांव सद्दोबरखा में पहले तीन कुएं थे। ग्रामीणों के अनुसार इनमें से एक कुआं मुस्लिम आबादी में था। इसे मुस्लिम समाज ने पाट दिया था। दूसरा कुआं सवर्ण आबादी में था। इसे भी पाट लिया गया। तीसरा कुआं दलित आबादी के पास में स्थित है। इसे ग्राम प्रधान लईक अहमद अंसारी ने एक सप्ताह पूर्व पाट दिया था। दलित समाज के लोग इस पर भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित कराना चाहते थे। शुक्रवार की रात दलित समाज के लोगों ने कुएं के पास प्रतिमा रखने के लिए चबूतरा बनवाया। आरोप है कि ग्राम प्रधान के भाई आरिफ ने अपने कुछ साथियों के साथ मौके पर पहुंचकर चबूतरे को लात मार कर तोड़ दिया। इसे लेकर दलित समाज के लोगों में रोष व्याप्त हो गया।
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शनिवार को दलित समाज के लोगों ने चबूतरे को ठीक कर उस पर भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा स्थापित करा दी। इस पर मुस्लिम समाज के लोगों के एतराज किया। घटना स्थल पर पहुंचे थानाध्यक्ष ने दोनों पक्षों के लोगों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन बात नहीं बनी। इसके बाद थानाध्यक्ष ने दलित समाज के लोगों को इस बात के लिए राजी कर लिया कि एसडीएम से स्वीकृति लेकर ही प्रतिमा स्थापित की जाए। इसके बाद वहां से स्थापित प्रतिमा को हटवा दिया गया। इस दौरान प्रतिमा का एक हाथ खंडित हो गया। इसे लेकर दलित समाज के लोगों में रोष व्याप्त हो गया। दलित समाज के मोनू, सतीश, दलवीर, जयवीर, लवली, नीटू, अमित, बिजेंद्र, जगपाल सिंह, दिले, सुखदेव का कहना है कि जब गांव के तीन कुओं में एक पर सवर्ण समाज, एक पर मुस्लिम बिरादरी के लोगों का कब्जा है तो दलित बस्ती के कुएं पर समाज का हक होना चाहिए। आरोप है कि ग्राम प्रधान इस पर भी कब्जा करना चाहता है। इस कुएं पर बने चबूतरे पर दलित समाज के लोग पहले से ही पूजा करते आ रहे हैं। अब अगर इस कुएं के किनारे पर डा. भीमराव आंबेडकर की प्रतिमा लगाना चाहते है तो इस पर एतराज गलत है। दूसरे पक्ष के ग्राम प्रधान लईक अहमद, आरिफ, आमिर, राहत अली, मुस्तकीम, वसीम अंसारी, सलीम अंसारी, नदीम लतीफ का कहना है कि दलित समाज के लोग कुएं पर प्रतिमा लगा कर नई प्रथा शुरू करने का प्रयास कर रहे हैं।
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थानाध्यक्ष अरिहंत कुमार सिद्धार्थ का कहना है कि फिलहाल प्रतिमा हटवा दी गई है। अब गांव में किसी प्रकार का कोई तनाव नहीं है। फिर भी सुरक्षा की दृष्टि से पर्याप्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है।