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जागरूक होने से संविधान का बच पाना संभव : मनोज कुमार
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धामपुर में पत्रकारों से वार्ता करते पूर्व अपर जिला जज मनोज कुमार सिंह। संवाद
धामपुर। बहुजन मैत्री संविधान जागरूकता महासम्मेलन के मुख्य संयोजक पूर्व अपर जिला सत्र न्यायाधीश मनोज कुमार ने कहा कि वर्तमान में भारत का संविधान खतरे में है। लोकतंत्र के जागरूक होेने से ही संविधान का बच पाना संभव है। इसके लिए लोगों में जागरूकता लाने के लिए संगठन की ओर से 17 दिसंबर को धामपुर के केएम इंटर कॉलेज के मैदान में महासम्मेलन का आयोजन किया जाएगा।
पत्रकारों से वार्ता में मुख्य संयोजक ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया के अन्य संविधानों में श्रेष्ठतम है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। बाबा साहब ने सभी के हितों की रक्षा के लिए मजबूत संविधान लिखा। आज तक संविधान का पूर्ण का पालन नहीं हो सका। जिसके चलते देश में असमानता बढ़ती जा रही है। भारत में बाबा साहब का कारवां पीछे जा रहा है। संवैधानिक संस्थाएं संविधान के उद्देश्यों को पूरा करने में असफल हैं। देश में संविधान के अनुसार समता, न्याय बंधुता के बजाय असमानता, अन्याय और नफरत फैलाई जा रही है। अशिक्षा बेरोजगारी बढ़ रही है। गरीब और अधिक गरीब होता जा रहा है। देश की अधिकांश पूंजी कुछ लोगों के हाथों में है। संविधान के पिलर कमजोर हो रहे हैं।
इन बिगड़ते हालातों और बाबा साहेब के कारवां को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया और संविधान की रक्षा, कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जुट गए। अभी उनकी 18 वर्ष की न्यायाधीश के रूप में और सेवा बची थी। राष्ट्र विरोधी लोग संविधान को कमजोर कर रहे हैं। संविधान को किसी भी दशा में क्षति पहुंचाने नहीं दी जाएगी। इसके लिए जो भी त्याग देना पड़ेगा, हमेशा तैयार रहेंगे। इस दौरान संस्कृति संघ भारत के संयोजक भंते रतन थेरा, एडवोकेट शमशाद अहमद, रमेश चंद्र गुप्ता मौजूद रहे।
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पत्रकारों से वार्ता में मुख्य संयोजक ने कहा कि भारत का संविधान दुनिया के अन्य संविधानों में श्रेष्ठतम है। भारत दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। बाबा साहब ने सभी के हितों की रक्षा के लिए मजबूत संविधान लिखा। आज तक संविधान का पूर्ण का पालन नहीं हो सका। जिसके चलते देश में असमानता बढ़ती जा रही है। भारत में बाबा साहब का कारवां पीछे जा रहा है। संवैधानिक संस्थाएं संविधान के उद्देश्यों को पूरा करने में असफल हैं। देश में संविधान के अनुसार समता, न्याय बंधुता के बजाय असमानता, अन्याय और नफरत फैलाई जा रही है। अशिक्षा बेरोजगारी बढ़ रही है। गरीब और अधिक गरीब होता जा रहा है। देश की अधिकांश पूंजी कुछ लोगों के हाथों में है। संविधान के पिलर कमजोर हो रहे हैं।
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इन बिगड़ते हालातों और बाबा साहेब के कारवां को आगे बढ़ाने के लिए उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दिया और संविधान की रक्षा, कमजोर वर्गों के उत्थान के लिए जुट गए। अभी उनकी 18 वर्ष की न्यायाधीश के रूप में और सेवा बची थी। राष्ट्र विरोधी लोग संविधान को कमजोर कर रहे हैं। संविधान को किसी भी दशा में क्षति पहुंचाने नहीं दी जाएगी। इसके लिए जो भी त्याग देना पड़ेगा, हमेशा तैयार रहेंगे। इस दौरान संस्कृति संघ भारत के संयोजक भंते रतन थेरा, एडवोकेट शमशाद अहमद, रमेश चंद्र गुप्ता मौजूद रहे।
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