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‘छाड़ा बान माझ उर लागा, मरती बार कपटु सब त्यागा’
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‘छाड़ा बान माझ उर लागा, मरती बार कपटु सब त्यागा’
नजीबाबाद/नांगलसोती। ‘छाड़ा बान माझ उर लागा, मरती बार कपटु सब त्यागा’ मेघनाद की माया से परेशान लक्ष्मण ने कोसलपति श्रीरामजी के प्रताप का स्मरण करके बाण का संधान किया, बाण मेघनाद की छाती पर लगा। मरते समय मेघनाद ने सब सब कपट त्याग दिया। मेघनाद का वध होते ही रामलीला पंडाल प्रभु श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कुंभकरण को रावण की सेना द्वारा नींद जगाने का दृश्य मनोहारी रहा।
श्रीराम मंडल के निर्देशन में आयोजित रामलीला मंचन में आदर्श कला परिषद के कलाकारों ने मेघनाद वध और सलोचना सति लीला का मंचन किया। युद्ध स्थल में कुंभकरण के मारे जाने की सूचना आते ही रावण के दरबार में शोक छा जाता है। पिता की आज्ञा लेकर स्वयं मेघनाद युद्ध भूमि में जाने से पूर्व अपनी पत्नी सलोचना से मिलने महल पहुंचते हैं। सलोचना द्वारा युद्ध में न जाने की पेशकश को ठुकराते हुए मेघनाद सलोचना को रोता हुआ छोड़कर यज्ञ करने पहुंच गया। युद्ध में मेघनाद की मृत्यु और सलोचना के सती होने की लीला का मंचन हुआ। इस दौरान रामलीला कमेटी के साहू राकेश अग्रवाल, नरेंद्र शर्मा, अमित वर्मा, रंधावा सिंह, राकेश महेंद्रा आदि मौजूद रहे। अविनाश भटनागर ने राम, आकाश भटनागर ने लक्ष्मण, संदीप महेंद्रा ने हनुमान, योगेश भारद्वाज ने सलोचना, साकेत शर्मा ने मेघनाद का अभिनय किया। जतिन वर्मा ने नल, देव वर्मा ने नील और राघव ने जामवंत का अभिनय किया।
वहीं, आदर्श रामलीला कमेटी सौफतपुर द्वारा आयोजित श्री रामलीला में अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण मूर्छा का मंचन हुआ। विभीषण की सलाह पर इलाज के लिए बुलाए गए सुषेण वैद्य संजीवनी बूटी लाने को कहते हैं। हनुमान जी पर्वत उठाकर लाते हैं और लक्ष्मण के प्राण बचाते हैं। लीला मंचन में दिनेश कुमार ने हनुमान, मिथुन ने लक्ष्मण, दीपू ने राम, हिमांशु ने सुग्रीव, विकास ने अंगद, अन्नू ने रावण, सोनू ने मेघनाद, चेतराम ने सुषेण वैद्य, मुंशी जी ने विभीषण और कलाकार डायरेक्टर अर्जुन सिंह, कमेटी अध्यक्ष ब्रह्मपाल सिंह, अरुण कुमार की देखरेख में हुआ।
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नजीबाबाद/नांगलसोती। ‘छाड़ा बान माझ उर लागा, मरती बार कपटु सब त्यागा’ मेघनाद की माया से परेशान लक्ष्मण ने कोसलपति श्रीरामजी के प्रताप का स्मरण करके बाण का संधान किया, बाण मेघनाद की छाती पर लगा। मरते समय मेघनाद ने सब सब कपट त्याग दिया। मेघनाद का वध होते ही रामलीला पंडाल प्रभु श्रीराम के जयकारों से गूंज उठा। कुंभकरण को रावण की सेना द्वारा नींद जगाने का दृश्य मनोहारी रहा।
श्रीराम मंडल के निर्देशन में आयोजित रामलीला मंचन में आदर्श कला परिषद के कलाकारों ने मेघनाद वध और सलोचना सति लीला का मंचन किया। युद्ध स्थल में कुंभकरण के मारे जाने की सूचना आते ही रावण के दरबार में शोक छा जाता है। पिता की आज्ञा लेकर स्वयं मेघनाद युद्ध भूमि में जाने से पूर्व अपनी पत्नी सलोचना से मिलने महल पहुंचते हैं। सलोचना द्वारा युद्ध में न जाने की पेशकश को ठुकराते हुए मेघनाद सलोचना को रोता हुआ छोड़कर यज्ञ करने पहुंच गया। युद्ध में मेघनाद की मृत्यु और सलोचना के सती होने की लीला का मंचन हुआ। इस दौरान रामलीला कमेटी के साहू राकेश अग्रवाल, नरेंद्र शर्मा, अमित वर्मा, रंधावा सिंह, राकेश महेंद्रा आदि मौजूद रहे। अविनाश भटनागर ने राम, आकाश भटनागर ने लक्ष्मण, संदीप महेंद्रा ने हनुमान, योगेश भारद्वाज ने सलोचना, साकेत शर्मा ने मेघनाद का अभिनय किया। जतिन वर्मा ने नल, देव वर्मा ने नील और राघव ने जामवंत का अभिनय किया।
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वहीं, आदर्श रामलीला कमेटी सौफतपुर द्वारा आयोजित श्री रामलीला में अंगद-रावण संवाद और लक्ष्मण मूर्छा का मंचन हुआ। विभीषण की सलाह पर इलाज के लिए बुलाए गए सुषेण वैद्य संजीवनी बूटी लाने को कहते हैं। हनुमान जी पर्वत उठाकर लाते हैं और लक्ष्मण के प्राण बचाते हैं। लीला मंचन में दिनेश कुमार ने हनुमान, मिथुन ने लक्ष्मण, दीपू ने राम, हिमांशु ने सुग्रीव, विकास ने अंगद, अन्नू ने रावण, सोनू ने मेघनाद, चेतराम ने सुषेण वैद्य, मुंशी जी ने विभीषण और कलाकार डायरेक्टर अर्जुन सिंह, कमेटी अध्यक्ष ब्रह्मपाल सिंह, अरुण कुमार की देखरेख में हुआ।
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