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Bijnor News: जाति छिपाकर बनी प्रधान, तीन साल की मिली सजा
Fri, 18 Jul 2025 12:55 AM IST
मेरठ ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
संवाद न्यूज एजेंसी, बिजनौर
Updated Fri, 18 Jul 2025 12:55 AM IST
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बिजनौर। अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर असलमपुर भुल्लन की ग्राम प्रधान बनी शिवाली को दोषी पाने पर एससी/एसटी एक्ट कोर्ट के विशेष जज अवधेश कुमार ने तीन वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। दोषी महिला पर बीस हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
विश्व दलित परिषद युवा मोर्चा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नगीना निवासी पुष्पेंद्र आनंद ने मामले में जुलाई 2017 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि कोतवाली ब्लॉक की ग्राम पंचायत असलमपुर भुल्लन का ग्राम प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित था। गैर अनुसूचित जाति की महिला शिवाली पत्नी ओमप्रकाश चौहान ने अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नामांकन दाखिल किया।
वह मूलतः पश्चिम बंगाल के मालदा जनपद की रहने वाली थी। चुनाव में वह ग्राम प्रधान चुनी गईं। शिवाली के ग्राम प्रधान निर्वाचित होने पर उसकी प्रतिद्वंद्वी लक्ष्मी देवी के संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ।
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पुलिस क्षेत्राधिकारी नगीना ने मामले की विवेचना करते हुए शिवाली सहित कई लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में विचारण के दौरान कई गवाह पेश किए गए, जिन्होंने आरोपों का समर्थन किया। अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चुनाव लड़कर ग्राम प्रधान बनने के अपराध को संगीन मानते हुए महिला शिवाली को सजा सुनाई जबकि इस मामले में शामिल हल्का लेखपाल ओमप्रकाश को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त कर दिया।
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विश्व दलित परिषद युवा मोर्चा के तत्कालीन राष्ट्रीय अध्यक्ष नगीना निवासी पुष्पेंद्र आनंद ने मामले में जुलाई 2017 में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट में कहा गया था कि कोतवाली ब्लॉक की ग्राम पंचायत असलमपुर भुल्लन का ग्राम प्रधान पद अनुसूचित जाति की महिला के लिए आरक्षित था। गैर अनुसूचित जाति की महिला शिवाली पत्नी ओमप्रकाश चौहान ने अनुसूचित जाति का फर्जी प्रमाण पत्र लगाकर नामांकन दाखिल किया।
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वह मूलतः पश्चिम बंगाल के मालदा जनपद की रहने वाली थी। चुनाव में वह ग्राम प्रधान चुनी गईं। शिवाली के ग्राम प्रधान निर्वाचित होने पर उसकी प्रतिद्वंद्वी लक्ष्मी देवी के संवैधानिक अधिकारों का हनन हुआ।
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पुलिस क्षेत्राधिकारी नगीना ने मामले की विवेचना करते हुए शिवाली सहित कई लोगों के खिलाफ कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। कोर्ट में विचारण के दौरान कई गवाह पेश किए गए, जिन्होंने आरोपों का समर्थन किया। अदालत ने फर्जी दस्तावेजों के आधार पर चुनाव लड़कर ग्राम प्रधान बनने के अपराध को संगीन मानते हुए महिला शिवाली को सजा सुनाई जबकि इस मामले में शामिल हल्का लेखपाल ओमप्रकाश को साक्ष्य के अभाव में दोष मुक्त कर दिया।