{"_id":"61bb8714810443293c48e26c","slug":"bank-employees-protest-against-privatization-bijnor-news-mrt5693842154","type":"story","status":"publish","title_hn":"निजीकरण के विरोध में उतरे बैंक कर्मचारी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
निजीकरण के विरोध में उतरे बैंक कर्मचारी
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
निजीकरण के विरोध में उतरे बैंक कर्मचारी
बिजनौर। निजीकरण के विरोध में जिले भर के राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं पर ताले लटके रहे। बैंकों में दो दिन की हड़ताल के पहले दिन 150 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। एटीएम से पैसे निकालकर लोगों ने काम चलाया। काफी उपभोक्ताओं को परेशानी भी उठानी पड़ी। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि जिले में भी बैंकों में करीब ढाई हजार का स्टाफ है।
बृहस्पतिवार को एसबीआई, पीएनबी, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र आदि की 166 शाखाओं पर ताले लटके रहे। कर्मचारियों ने काम नहीं किया और कई जगह एकत्र होकर प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों ने एसबीआई कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। एसबीआईएस सचिव मोहित कुमार व आलोक आर्य ने कहा कि बैंक कर्मचारियों को निजीकरण के खिलाफ अब घर से बाहर निकलकर प्रदर्शन करना होगा। बैंक कर्मी देश आर्थिक सेनानी हैं। अपनी पूरी क्षमता से देशसेवा करना उनका धर्म है। इस दौरान दीपक कुमार, सुमिरन पाल, संदीप कुमार, रजनीश कुमार, अनिल विश्नोई, नीरज कुमार, महेश चंद्रा, जितेंद्र कुमार, रामलाल, बाबूराम, अजय सूद, विरेंद्र कुमार, नेहा हरित, अंशिका सेठी आदि मौजूद रहे। पीएनबी के क्षेत्रीय कार्यालय पर भी प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने किसी भी सूरत में निजीकरण लागू न होने देने की बात कही। एसबीआई के वरिष्ठ कर्मचारी सुमिरन पाल ने बताया कि किसी निजी बैंक को नुकसान होने पर उसे सरकारी बैंक में विलय कर सहारा दिया जाता है। जब सभी बैंक ही निजी हो जाएंगे तो इसकी भरपाई कैसे की जाएगी। निजी बैंक किसी भी सरकारी योजना में सक्रियता नहीं दिखाते हैं। वे केवल अपने लाभ के लिए ही काम करते हैं।
एटीएम रहे नकदी से फुल
जिले में 166 बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। हालांकि 200 से अधिक एटीएम में बुधवार रात ही पैसे रखे गए थे। बैंक अफसरों का दावा है एटीएम कार्ड चलाने वाले या ऑनलाइन बैंकिंग इस्तेमाल करने वालों को परेशानी नहीं आएगी। जिले में राष्ट्रीयकृत बैंक अब बीसीए नियुक्त कर रहे हैं। ये गांव देहात में जाकर उपभोक्ताओं की नकदी जमा करते हैं और भुगतान भी। बीएसए नियमित कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें कुछ वेतन व कमीशन दिया जाता है। अगर बीएसए को नियमित किया जाए तो इससे इनकी आमदनी बढ़ेगी।
विज्ञापन
नहीं हो रही भर्ती
बैंकों में निजीकरण को काफी समय से बढ़ावा दिया जा रहा है। कई बैंकों में एटीएम वैन, सुरक्षा आदि का कार्य निजी कंपनी के हाथों में है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी आउट सोर्सिंग से रखे जा रहे हैं। एसबीआई में लंबे समय से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त नहीं हुए हैं। नियमित कर्मचारियों की भर्ती न होने की वजह से भी बैंक स्टाफ की किल्लत झेल रहे हैं।
विज्ञापन
बिजनौर। निजीकरण के विरोध में जिले भर के राष्ट्रीयकृत बैंकों की शाखाओं पर ताले लटके रहे। बैंकों में दो दिन की हड़ताल के पहले दिन 150 करोड़ का लेनदेन प्रभावित हुआ। एटीएम से पैसे निकालकर लोगों ने काम चलाया। काफी उपभोक्ताओं को परेशानी भी उठानी पड़ी। बैंक कर्मचारियों का कहना है कि जिले में भी बैंकों में करीब ढाई हजार का स्टाफ है।
बृहस्पतिवार को एसबीआई, पीएनबी, इंडियन बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा, यूको बैंक, सेंट्रल बैंक, बैंक ऑफ महाराष्ट्र आदि की 166 शाखाओं पर ताले लटके रहे। कर्मचारियों ने काम नहीं किया और कई जगह एकत्र होकर प्रदर्शन किया। यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियन के आह्वान पर बैंक कर्मचारियों ने एसबीआई कार्यालय पर प्रदर्शन करते हुए सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। एसबीआईएस सचिव मोहित कुमार व आलोक आर्य ने कहा कि बैंक कर्मचारियों को निजीकरण के खिलाफ अब घर से बाहर निकलकर प्रदर्शन करना होगा। बैंक कर्मी देश आर्थिक सेनानी हैं। अपनी पूरी क्षमता से देशसेवा करना उनका धर्म है। इस दौरान दीपक कुमार, सुमिरन पाल, संदीप कुमार, रजनीश कुमार, अनिल विश्नोई, नीरज कुमार, महेश चंद्रा, जितेंद्र कुमार, रामलाल, बाबूराम, अजय सूद, विरेंद्र कुमार, नेहा हरित, अंशिका सेठी आदि मौजूद रहे। पीएनबी के क्षेत्रीय कार्यालय पर भी प्रदर्शन किया गया। कर्मचारियों ने किसी भी सूरत में निजीकरण लागू न होने देने की बात कही। एसबीआई के वरिष्ठ कर्मचारी सुमिरन पाल ने बताया कि किसी निजी बैंक को नुकसान होने पर उसे सरकारी बैंक में विलय कर सहारा दिया जाता है। जब सभी बैंक ही निजी हो जाएंगे तो इसकी भरपाई कैसे की जाएगी। निजी बैंक किसी भी सरकारी योजना में सक्रियता नहीं दिखाते हैं। वे केवल अपने लाभ के लिए ही काम करते हैं।
विज्ञापन
एटीएम रहे नकदी से फुल
जिले में 166 बैंक शाखाओं में ताले लटके रहे। हालांकि 200 से अधिक एटीएम में बुधवार रात ही पैसे रखे गए थे। बैंक अफसरों का दावा है एटीएम कार्ड चलाने वाले या ऑनलाइन बैंकिंग इस्तेमाल करने वालों को परेशानी नहीं आएगी। जिले में राष्ट्रीयकृत बैंक अब बीसीए नियुक्त कर रहे हैं। ये गांव देहात में जाकर उपभोक्ताओं की नकदी जमा करते हैं और भुगतान भी। बीएसए नियमित कर्मचारी नहीं होते हैं और उन्हें कुछ वेतन व कमीशन दिया जाता है। अगर बीएसए को नियमित किया जाए तो इससे इनकी आमदनी बढ़ेगी।
विज्ञापन
नहीं हो रही भर्ती
बैंकों में निजीकरण को काफी समय से बढ़ावा दिया जा रहा है। कई बैंकों में एटीएम वैन, सुरक्षा आदि का कार्य निजी कंपनी के हाथों में है। चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी भी आउट सोर्सिंग से रखे जा रहे हैं। एसबीआई में लंबे समय से चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी नियुक्त नहीं हुए हैं। नियमित कर्मचारियों की भर्ती न होने की वजह से भी बैंक स्टाफ की किल्लत झेल रहे हैं।