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कोरोना के कारण पिछड़ा कुष्ठ रोगी खोज अभियान
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बिजनौर। कोरोना महामारी की वजह से इस बार बजट न आने के कारण कुष्ठ रोगी खोज अभियान नहीं चल पाया। एक अप्रैल से अक्तूबर 2020 तक केवल 62 कुष्ठ रोगी पंजीकृत किए गए, जबकि पिछले साल स्वास्थ्य विभाग की ओर से चलाए गए दो अभियानों के दौरान 246 मरीजों की खोज की गई थी। इस बार अक्तूबर माह तक कुल 122 और पिछले साल 381 मरीजों ने पूरा उपचार कराकर कुष्ठ को अलविदा कहा।
चिकित्सकों के अनुसार कुष्ठ रोग माइक्रो बैक्टीरियम लेप्रे (एमबीएल) नामक जीवाणु के कारण होता है। यह रोग किसी को भी हो सकता है। कुष्ठ रोग आनुवांशिक नहीं है और इसका पाप-पुण्य से कोई संबंध नहीं है। कुष्ठ रोग दो प्रकार का होता है, संक्रामक और असंक्रामक। कुष्ठ रोग एमडीटी नामक दवा खाने से पूरी तरह से ठीक हो जाता है। सभी सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज और दवाई मुफ्त में उपलब्ध है।
कुष्ठ रोग के प्रति कुछ भ्रांतियां फैली हैं। कुष्ठ रोगी के साथ रहने, खाने-पीने, छूने से यह बीमारी नहीं फैलती। इसका सभी को ध्यान रखना चाहिए। राष्ट्रीय कुष्ठ रोग निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत कुष्ठ रोगियों का चयन कर उनका समुचित उपचार किया जाता है। जिले में कुल छह कुष्ठ आश्रम संचालित हैं। इनमें बिजनौर, नजीबाबाद, धामपुर, स्योहारा, हल्दौर, चांदपुर शामिल हैं। फिलहाल इन सभी छह कुष्ठ आश्रमों में लगभग 180 मरीज निवास करते हैं।
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जिला कुष्ठ अधिकारी डा. शैलेश जैन ने बताया कि शासन के निर्देश पर पिछले साल फरवरी और जुलाई माह में कुष्ठ रोगी खोज अभियान चलाया गया। इस बार भी ये जनवरी और जुलाई में चलना था। पिछली बार के इन दोनों अभियानों में लगभग 264 कुष्ठ रोगी खोजे गए थे। उपचार कराकर दवा खाने के बाद दोनों करीब 381 लोगों ने कुष्ठ से मुक्ति पाई। इस बार अभियान न चलने के कारण अप्रैल से अक्तूबर 2020 तक केवल 62 कुष्ठ रोगी ही पंजीकृत किए गए। लगभग 122 समय पर दवाई खाकर पूर्णत: ठीक हो चुके हैं। अभी 99 मरीजों का उपचार चल रहा है।
कुष्ठ रोग के लक्षण
-त्वचा पर सुन्न चकत्ते होना।
-त्वचा का रंग तैलीय होना।
-त्वचा का मोटा होना।
-कोई नुकीली चीज चुभाने पर भी अहसास न होना।
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चिकित्सकों के अनुसार कुष्ठ रोग माइक्रो बैक्टीरियम लेप्रे (एमबीएल) नामक जीवाणु के कारण होता है। यह रोग किसी को भी हो सकता है। कुष्ठ रोग आनुवांशिक नहीं है और इसका पाप-पुण्य से कोई संबंध नहीं है। कुष्ठ रोग दो प्रकार का होता है, संक्रामक और असंक्रामक। कुष्ठ रोग एमडीटी नामक दवा खाने से पूरी तरह से ठीक हो जाता है। सभी सरकारी अस्पतालों में इसका इलाज और दवाई मुफ्त में उपलब्ध है।
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कुष्ठ रोग के प्रति कुछ भ्रांतियां फैली हैं। कुष्ठ रोगी के साथ रहने, खाने-पीने, छूने से यह बीमारी नहीं फैलती। इसका सभी को ध्यान रखना चाहिए। राष्ट्रीय कुष्ठ रोग निवारण कार्यक्रम के अंतर्गत कुष्ठ रोगियों का चयन कर उनका समुचित उपचार किया जाता है। जिले में कुल छह कुष्ठ आश्रम संचालित हैं। इनमें बिजनौर, नजीबाबाद, धामपुर, स्योहारा, हल्दौर, चांदपुर शामिल हैं। फिलहाल इन सभी छह कुष्ठ आश्रमों में लगभग 180 मरीज निवास करते हैं।
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जिला कुष्ठ अधिकारी डा. शैलेश जैन ने बताया कि शासन के निर्देश पर पिछले साल फरवरी और जुलाई माह में कुष्ठ रोगी खोज अभियान चलाया गया। इस बार भी ये जनवरी और जुलाई में चलना था। पिछली बार के इन दोनों अभियानों में लगभग 264 कुष्ठ रोगी खोजे गए थे। उपचार कराकर दवा खाने के बाद दोनों करीब 381 लोगों ने कुष्ठ से मुक्ति पाई। इस बार अभियान न चलने के कारण अप्रैल से अक्तूबर 2020 तक केवल 62 कुष्ठ रोगी ही पंजीकृत किए गए। लगभग 122 समय पर दवाई खाकर पूर्णत: ठीक हो चुके हैं। अभी 99 मरीजों का उपचार चल रहा है।
कुष्ठ रोग के लक्षण
-त्वचा पर सुन्न चकत्ते होना।
-त्वचा का रंग तैलीय होना।
-त्वचा का मोटा होना।
-कोई नुकीली चीज चुभाने पर भी अहसास न होना।